एक्सक्लूसिव: चीन सीमा से सटी अग्रिम चौकियों में शीतकाल में भी रहेगी सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी
- सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी और लिपुलेख तक सड़क बनने से 12 फीट की बर्फबारी में भी जारी रहेंगी गतिविधियां
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चीन से तनातनी के बीच इस साल शीतकाल में भी अग्रिम चौकियों में सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी रहेगी। लिपुलेख तक सड़क बनने के बाद आवागमन भी बढ़ा है। ऐसे में सीमा से सटे व्यास घाटी के गांवों में प्रवास पर गए अधिकांश परिवार व्यापारिक गतिविधियों के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ही रहेंगे। यह पहला अवसर होगा जब चीन सीमा पर स्थित गांवों में आठ से 12 फीट बर्फ में भी चहल-पहल रहेगी।
धारचूला के व्यास घाटी में बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, रोंगकांग, नाभी, कुटी गांव स्थित हैं। रं समुदाय के लोग हर साल भेड़ों और अन्य मवेशियों के साथ अप्रैल में प्रवास पर अपने इन्हीं मूल गांवों में जाते हैं। कुछ परिवार वहां पर जड़ी बूटी की खेती करते हैं तो कुछ रेस्टोरेंट, दुकान और होटल का कारोबार करते हैं।
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बर्फबारी शुरू होते ही फसलों को समेटकर अक्तूबर के अंत तक वापस लौट आते हैं। कुटी में 15 फीट तक बर्फ पड़ने से वहां से सभी परिवार धारचूला लौट आते हैं। केवल गुंजी गांव ही ऐसा है जहां शीतकाल में भी 10 से 15 परिवार उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित इसी गांव में रहते हैं।
अन्य गांवों में दो-तीन परिवार ही वहां पर भेड़ों या अन्य जानवरों के साथ रहते हैं। ग्रामीणों के प्रवास से लौटते ही अधिकांश गांव पूरी तरह से जनशून्य हो जाते हैं। यहां केवल सेना के जवान ही आठ से 12 फुट बर्फ में गश्त करते हैं।
60 प्रतिशत लोगों ने शीतकाल में भी मूल गांवों में ही रुकने का मन बनाया
इस साल लद्दाख में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की कोशिशों के बाद लिपुलेख में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की गई है। सभी अग्रिम चौकियों में पिछले वर्षों की तुलना में सेना और अर्द्धसैनिक बलों के अधिक जवान तैनात हैं। लिपुलेख तक सड़क बनने से बीआरओ की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। बीआरओ की सड़क के निर्माण में सीमांत के 500 से अधिक लोग मजदूरी कर रहे हैं। इसको देखते हुए प्रवास पर गए 60 प्रतिशत लोगों ने शीतकाल में भी मूल गांवों में ही रुकने का मन बनाया है।
सात गांवों के 450 परिवार जाते हैं प्रवास पर
धारचूला की व्यास घाटी में स्थित बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, रोंगकांग, नाभी, कुटी गांवों के 450 परिवार हर साल प्रवास पर अपने इन मूल गांवों में जाते हैं। कुटी के धर्मेंद्र कुटियाल ने बताया कि कुटी गांव के 208 परिवार हैं, जिनमें से 50-60 परिवार प्रवास पर जाते हैं। रोंगकांग की प्रधान अंजू रौंकली ने बताया कि व्यास घाटी में अब सड़क पहुंच गई है। इस साल कैलाश यात्रा और भारत-चीन व्यापार न होने से मानसून काल में कारोबार ठप रहा। ऐसे में कई ग्रामीणों ने शीतकाल में भी वहीं रुकने का मन बनाया है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में शीतकाल में रहना आसान नहीं था। इस साल लिपुलेख तक सड़क पहुंच गई है। गांवों तक जाना आसान हो गया है। सुरक्षा बलों के वहां पर तैनात होने और बीआरओ का सड़क का काम जारी होने से शीतकाल में भी ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
- मंगल सिंह बुदियाल, ग्राम प्रधान बूंदी।