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विवाद के बीच चीन सीमा के करीब भारतीय जेट फाइटरों ने भरी उड़ान, लिपुलेख में सतर्कता बढ़ाई

Tue, 01 Sep 2020 08:23 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 01 Sep 2020 08:23 PM IST
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India China border clash news: India jet fighter plane fly Close to China border In Lipulekh
- फोटो : फाइल फोटो

पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के वास्तविक नियंत्रण रेखा पार कर भारत की जमीन में घुसने की नापाक कोशिश और मानसरोवर क्षेत्र में मिसाइल बेस बनाने की सूचना के बाद लिपुलेख में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। मंगलवार को भारतीय जेट फाइटरों ने सीमा पर उड़ान भरी। सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने भी अग्रिम चौकियों में जाकर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। 

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चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। लद्दाख में चीनी सैनिकों की ओर से की जा रही उकसावे की हरकतों को देखते हुए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से सटी भारत-चीन सीमा पर लिपुलेख में भी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट हो गईं हैं।
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यह भी पढ़ें: भारत-चीन विवाद: चीनी सैनिकों से झड़प के बाद लिपुलेख में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, सीमा पर बढ़ाई गश्त
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लिपुलेख में सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान चीन की हर नापाक कोशिश का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सचेत हैं। मंगलवार को भारतीय वायु सेना के जेट फाइटर ने सीमा पर उड़ान भरकर स्थिति का जायजा लिया। इसके अलावा, सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने भी अग्रिम चौकियों का निरीक्षण किया।

हालात से निपटने की पूरी तैयारी

सूत्रों के अनुसार, लिपुलेख सीमा पर फिलहाल शांति है। चीन की ओर से किसी तरह की हरकत नहीं की गई है, लेकिन जिस तरह से लद्दाख में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिक उकसावे की कार्रवाई कर रहे हैं, उसे देखते हुए यहां पर भी इस तरह के हालात से निपटने की पूरी तैयारी की गई है। 

चीन अपना दबदबा बनाए रखने के लिए पीओके को बचाना चाहता है। इसलिए उकसावे के लिए इस तरह की कार्रवाई बार-बार कर रहा है। 14 जून के बाद से चीनी सैनिक सीमा पर इस तरह की हरकतें लगातार कर रहे हैं। वर्ष 1962 में चीन ने भारत को धोखा दिया था। तब हालात अलग थे, आज भारत की सेना हर परिस्थिति का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। यदि चीन कोई नापाक हरकत करता है तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
-रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल सत्यपाल सिंह गुलेरिया। 

चीन दक्षिण एशिया में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए भारत के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है और भारत पर चारों ओर दबाव डालना चाहता है लेकिन चीन को इस बात का आभास हो जाना चाहिए कि अब भारत 1962 का भारत नहीं रहा। भारत की सेनाएं चीन का हर जगह मुकाबला करने में सक्षम हैं। जब से कैलाश मानसरोवर क्षेत्र को मिसाइल क्षेत्र बनाने की सेटेलाइट से तस्वीरें आई हैं, हिंदू, बौद्ध, जैन आदि उनके पवित्र धार्मिक स्थल के युद्ध भूमि में बदले जाने से चिंतित हैं।  
- बद्री दत्त कसनियाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक मामलों के जानकार।

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