संभलकर, आपके जनधन खातों पर है आयकर अफसरों की नजर
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जनधन और वर्षों से साइलेंट पड़े खातों पर आयकर विभाग की नजर है। आयकर विभाग की टीम सोमवार को कुछ बैंकों में पहुंची और अधिकारियों से जनधन एवं साइलेंट खातों का विवरण मांगा।
नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने जनधन के खातों में धनराशि जमा न कराने के लिए आगाह कर दिया था। जनधन खाते में एक वित्तीय वर्ष के भीतर एक लाख रुपए तक का लेनदेन हो सकता है जबकि 50 हजार से अधिक का बैलेंस नहीं होना चाहिए।
जनधन खातों में एक लाख रुपए से अधिक वाले खाते आयकर विभाग के रडार पर आ सकते हैं। साथ ही ऐसे खातों पर भी आयकर विभाग की नजर है, जो साइलेंट हैं। ऐसे खातों में अगर अधिक धनराशि जमा हो रही है या निकाली जा रही है तो जांच के दायरे में आ सकते हैं।
जनधन खाते की लिमिट एक लाख
सोमवार को आयकर विभाग की टीमें कुछ बैंकों में पहुंचीं। उन्होंने बैंक प्रबंधकों से जनधन के ऐसे खातों का विवरण मांगा गया है, जिसमें लेनदेन निर्धारित सीमा से अधिक हुआ है या जमा राशि अधिक है। 9 नवंबर से 18 नवंबर तक हुए लेनदेन पर विशेष नजर रखी जा रही है। दोपहर में ही जनधन खाते का विवरण लेकर खातों की गहनता से जांच की गई।
दो साल से बंद पड़े जनधन के अधिकांश खाते भी साइलेंट खातों के साथ ही एक्टिवेट हो रहे हैं, लेकिन जनधन योजना के खातों में आरबीआई की गाइड लाइन के मुताबिक ही पैसा जमा किया या निकाला जा सकता है। इन खातों में कोई भी व्यक्ति 50 हजार रुपए से ज्यादा का डिपॉजिट नहीं करा सकता है।
एसबीआई टीपीनगर शाखा प्रबंधक विजय प्रसाद ने बताया कि जनधन योजना के तहत खोले गए खातों में सालभर में मात्र एक लाख रुपए तक का लेनदेन किया जा सकता है। एक बार में मात्र 10 हजार रुपए तक की निकासी का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि जनधन खातों में आरबीआई के नियमों के तहत की जमा, निकासी की जा रही है।