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Historical Building: 900 साल पुरानी इमारत का नया स्वरूप है यूएसडीएमए की नई बिल्डिंग, जानिए है क्या इसकी खासियत

Mon, 07 Aug 2023 12:57 PM IST
रेनू सकलानी विनोद मुसान, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 07 Aug 2023 12:57 PM IST
सार

इस माह के अंत तक निर्माण की प्रक्रिया पूरी होते ही इसे यूएसडीएमए को सौंप दिया जाएगा। प्रदेश में वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद इस भवन की परिकल्पना की गई थी।

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Historical Building USDMA new building is a redesign of 900-year-old building Uttarakhand news in hindi
यूएसडीएमए की छह मंजिला नई इमारत - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) की छह मंजिला नई इमारत बनकर लगभग तैयार है। खास बात यह है कि आधुनिक तकनीक से सुसज्जित इस भवन की डिजाइन उत्तरकाशी जिले में स्थित ऐतिहासिक पहाड़ी वास्तुकला कोटि बनाल शैली के 900 साल पुराने भवन से लिया गया है।

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भवन को बनाने में 87.5 करोड़ रुपये खर्च आया है। जबकि 53 करोड़ रुपये से भवन में आपदा प्रबंधन से संबंधित उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। इस माह के अंत तक निर्माण की प्रक्रिया पूरी होते ही इसे यूएसडीएमए को सौंप दिया जाएगा। प्रदेश में वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद इस भवन की परिकल्पना की गई थी। ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में एक स्थान पर बैठकर आपदा प्रबंधन की ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसके जमीन पर उतारा जा सके।

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भूकंप भी आसानी से है झेल सकती
देहरादून में सहस्रधारा आईटी पार्क में स्थित भवन का निर्माण कार्य जनवरी 2020 में शुरू किया गया था, जिसके इस माह के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। भवन का निर्माण वर्ल्ड बैंक वित्त पोषित उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट (यूडीआरपी) के तहत किया गया है।

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यह उत्तराखंड की पहली ऐसी बिल्डिंग है, जिसे 4-स्टार ग्रिया का प्रमाणपत्र मिला है, जो आठ मेग्नीट्यूट तक का भूकंप भी आसानी से झेल सकती है। बिल्डिंग को सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) जैसे सीसीटीवी, आईपीबीएक्स, डेटा नेटवर्किंग, वाईफाई ऑन-ग्रिड, सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली, पब्लिक एड्रेसेबल वॉयस अलार्म (पीएवीए) प्रणाली से सुसज्जित किया जाएगा। इस इमारत में 80 बेस आइसोलेशन सिस्टम लगाए गए हैं, जिन्हें विशेष तौर पर अमेरिका से मंगाया गया था। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा ने बताया कि बिल्डिंग के पूरी तरह तैयार होते ही विभाग सहित कंट्रोल रूम को वहीं शिफ्ट कर दिया जाएगा।

24 घंटे सातों दिन काम करेगा आपातकाल के लिए ट्रांजिट हॉस्टल

बिल्डिंग में कार्यालय, राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र, एसईओसी वॉर रूम, फ्यूजन सेंटर, जीआईएस लैब, कांफ्रेंस हॉल, प्रशिक्षण हॉल, मीटिंग हॉल, रिटायरिंग रूम, कैफेटेरिया, संचालन और लॉजिस्टिक टीम के लिए चर्चा कक्ष, सशस्त्र बलों, वैज्ञानिक एजेंसियों, एनजीओ के लिए चर्चा कक्ष, 24x7 आपातकाल के लिए ट्रांजिट हॉस्टल, अपना सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), एकीकृत भवन प्रबंधन प्रणाली (आईबीएमएस) से सुसज्जित किया जाएगा।

ये भी खास है इस भवन में

- यूएसडीएमए की नई बिल्डिंग का निर्माण 4073.62 वर्ग मीटर भूखंड में किया गया है।

- इसमें बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर सहित छह मंजिलें हैं, जिन्हें ग्रीन बिल्डिंग के तौर पर बनाया गया है।

- डिजाइन को राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (एसआईडीए) ने दी मंजूरी, आईआईटी रुड़की ने किया पास।

- भवन को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि दिन की रोशनी का अधिकतम उपयोग हो सके।

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क्या है कोटि बनाल शैली

उत्तरकाशी के मोरी, बड़कोट, पुरोला और उपला टकनौर क्षेत्र में कोटि बनाल शैली के भवन देखने को मिलते हैं। जो करीब 900 साल पुराने बताए जाते हैं। इन्हें पंचपुरा भवन भी कहा जाता है, जो पहाड़ की आर्थिक समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। ये भवन स्थापत्य और विज्ञान का शानदार नमूना हैं, जो भूकंप के झटकों को भी आसानी से सह लेते हैं। भूकंपरोधी होने के साथ ही ये भवन ईको फ्रेंडली भी हैं। इन्हीं घरों पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘कोटि बनाल’ ने एशिया के सबसे बड़े ग्रीन फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड हासिल किया है।

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