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गंगा सफाई पर HC सख्त, केंद्र को विशेष कानून बनाने के आदेश

Sat, 03 Dec 2016 03:39 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल Updated Sat, 03 Dec 2016 03:39 AM IST
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high court order to center on ganga conservation
कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

गंगा की सफाई को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सामाजिक विकास के लिए गंगा के संरक्षण को आवश्यक बताते हुए केंद्र सरकार को इसके लिए विशेष कानून बनाने का आदेश दिया है। साथ ही गंगा के उद्गम से गंगा सागर तक के पांच राज्यों के लिए तीन माह में अंतरराज्यीय परिषद का गठन करने को भी कहा है।

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कोर्ट ने कैग को भी आदेश दिया कि गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए जारी राशि का ऑडिट कर राष्ट्रपति के समक्ष पेश करें। इसके साथ ही कोर्ट ने उत्तराखंड में एक जनवरी से प्लास्टिक बैग को पूरी तरह प्रतिबंध कर दिया है।
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शुक्रवार को न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार गंगा के उद्गम से गंगा सागर तक आने वाले उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल की अंतरराज्यीय परिषद का गठन तीन माह के भीतर करे।

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106 उद्योग बंद करने और 180 पर कार्रवाई के निर्देश

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गंगा

हाईकोर्ट ने केंद्र को नदी संरक्षण क्षेत्र बनाकर निर्माण प्रतिबंधित करने और गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए नेशनल वाटर डेवलपमेंट एजेंसी और वाटर रिसोर्सेज डेवलपमेंट काउंसिल का गठन करने का भी आदेश दिया। केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिए हैं कि वह नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के लिए बनी डीपीआर की धनराशि 266 करोड़ में से स्टेट प्रोग्राम मैनेजमेंट ग्रुप को छह सप्ताह के भीतर उसका हिस्सा अवमुक्त करें।

कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि गंगा नदी में तीन अरब लीटर अनट्रीटेड सीवर बहाया जा रहा है। अधिवक्ता ललित मिगलानी की जनहित याचिका पर कोर्ट ने आदेश दिए कि पूर्व में जिन 180 उद्योगों को नोटिस दिए गए थे, उन पर कार्रवाई की जाए। जिन 106 उद्योगों को बंदी के नोटिस दिये गये थे, उन्हें बंद कराया जाए। कोर्ट ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं और कहा कि प्रदूषण करने वाले उद्योगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराए जाए।

500 मीटर दायरे में मलमूत्र विसर्जन पर 5000 जुर्माना

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प्लास्टिक बैग

कोर्ट ने कहा कि नदी से 500 मीटर की दूरी तक मलमूत्र विसर्जन करने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाए। प्रदेश सरकार को नगरपालिका अधिनियम में इस आशय का संशोधन करने को कहा गया। हाईकोर्ट ने गंगा किनारे पचास से अधिक अतिथियों के रहने की क्षमता वाले होटल और बडे़ आश्रम न खोलने के निर्देश दिए हैं। नगरपालिका हरिद्वार और ऋषिकेश को पर्याप्त संख्या में शौचालय बनाने को कहा है। 

एक जनवरी से प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध
हाईकोर्ट ने उत्तराखंड राज्य में प्लास्टिक बैग को पूरी तरह से प्रतिबंध करते हुए निर्देश दिया और कहा कि सरकार प्लास्टिक का उपयोग न होने के संबंध में जनता को जागरूक करे। गंगा में नहाने पर साबुन, शैंपू या तेल के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। उत्तराखंड में सभी नगरपालिकाओं को आदेश दिया है कि कूड़ा निस्तारण के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाएं। भविष्य में गंगा मे दो किलोमीटर के दायरे में चीनी मिल, पेपर, डिस्टलरी, टैक्सटाइल उद्योगों पर रोक लगाई जाए।

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