{"_id":"5a6013a44f1c1b68268b4ecc","slug":"hearing-transfer-news-officer-in-fear","type":"story","status":"publish","title_hn":"ताजा तबादलों से उत्तराखंड की नौकरशाही में मची खलबली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ताजा तबादलों से उत्तराखंड की नौकरशाही में मची खलबली
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 18 Jan 2018 01:54 PM IST
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तबादले
- फोटो : amar ujala
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सिविल सर्विसेज बोर्ड बनाकर उसकी सिफारिश पर ही तबादले करने की बजाय पसंद-नापसंद के आधार पर किए जा रहे आईएएस अधिकारियों के ताजा तबादलों से राज्य की नौकरशाही में भारी असंतोष है।
इस तरह के तबादलों के पीछे, आईएएस अफसरों का एक धड़ा दबी जुबान से एक नए ‘पावर सेंटर’ के अनावश्यक दखल को जिम्मेदार ठहरा रहा है। नाराज अफसर आपस में चर्चा कर रहे हैं। खबर है कि जल्द ही असंतुष्ट अफसर एक बैठक करेंगे, जिसके बाद आगे की रणनीति बना सकते हैं। संभव है कि नाराजगी स्वरूप कुछ अफसर जल्द ही छुट्टी चले जाएं। एक असंतुष्ट वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि हम इसके खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस भी कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के अलावा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने भी आईएएस अफसरों के तबादलों के लिए सिविल सर्विसेज बोर्ड बनाकर उसकी सिफारिश पर ही तबादले करने के निर्देश जारी किए हैं। मगर राज्य में पारदर्शी और नियम-कानून की सरकार का दावा करने के बावजूद यह बोर्ड अब तक गठित नहीं हुआ। ऐसे में अफसरों को पसंद और नापसंद के आधार पर बदला जा रहा है।
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नए साल में आईएएस अफसरों की दूसरी तबादला सूची मंगलवार देर रात कुछ ऐसे ही अंदाज में जारी हुई है। इसमें चौदह आईएएस अधिकारियों के कामकाज में बदलाव किया गया है।
सचिव स्तर के अधिकारियों की कमी का रोना रोने वाली सरकार ने हाल ही में अपर सचिव से प्रभारी सचिव बने दो अधिकारियों के विभागों में बढ़ोतरी करने के बजाय उन्हें और हल्का कर दिया। इसमें डॉ. पंकज पांडेय से तकनीकीशिक्षा और डॉ. रंजीत सिन्हा से उच्च शिक्षा को हटाकर यह चार्ज दूसरे अफसरों को दे दिया गया। गौरतलब है कि बीते दिनों रूसा के तहत हुई कंप्यूटरों की विवादित खरीद पर डॉ. रंजीत सिन्हा ने ही आपत्ति की थी, जिसके बाद अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह को सफाई देनी पड़ी।
माना जा रहा है कि सिन्हा को इसी मामले में निपटा दिया गया। चर्चा है कि लगातार होने वाले इन तबादलों में एक नए ‘पावर सेंटर’ का भरपूर दखल है। इसे लेकर अफसरों का एक धड़ा क्षुब्ध है। बीते दिनों ऊर्जा विभाग में तैनात एक आईएएस अधिकारी भी इसी ‘पावर सेंटर’ की मनमानी के चलते लंबी छुट्टी पर चले गए। नाराजगी इस कदर है कि खनन और आबकारी विभाग में अफसर चार्ज लेने तक को तैयार नहीं हो रहे हैं। कुछ और अफसरों के भी जल्द ही छुट्टी पर जाने की तैयारी की खबर है।
सिविल सर्विसेज बोर्ड का गठन करना राज्य सरकार के स्तर का मामला है। सुप्रीम कोर्ट या भारत सरकार के आदेश का पालन किया जाना चाहिए।
-आनंद वर्द्धन, सचिव (आईएएस एसोसिएशन)
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इस तरह के तबादलों के पीछे, आईएएस अफसरों का एक धड़ा दबी जुबान से एक नए ‘पावर सेंटर’ के अनावश्यक दखल को जिम्मेदार ठहरा रहा है। नाराज अफसर आपस में चर्चा कर रहे हैं। खबर है कि जल्द ही असंतुष्ट अफसर एक बैठक करेंगे, जिसके बाद आगे की रणनीति बना सकते हैं। संभव है कि नाराजगी स्वरूप कुछ अफसर जल्द ही छुट्टी चले जाएं। एक असंतुष्ट वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि हम इसके खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस भी कर सकते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के अलावा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने भी आईएएस अफसरों के तबादलों के लिए सिविल सर्विसेज बोर्ड बनाकर उसकी सिफारिश पर ही तबादले करने के निर्देश जारी किए हैं। मगर राज्य में पारदर्शी और नियम-कानून की सरकार का दावा करने के बावजूद यह बोर्ड अब तक गठित नहीं हुआ। ऐसे में अफसरों को पसंद और नापसंद के आधार पर बदला जा रहा है।
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नए साल में आईएएस अफसरों की दूसरी तबादला सूची मंगलवार देर रात कुछ ऐसे ही अंदाज में जारी हुई है। इसमें चौदह आईएएस अधिकारियों के कामकाज में बदलाव किया गया है।
सचिव स्तर के अधिकारियों की कमी का रोना रोने वाली सरकार ने हाल ही में अपर सचिव से प्रभारी सचिव बने दो अधिकारियों के विभागों में बढ़ोतरी करने के बजाय उन्हें और हल्का कर दिया। इसमें डॉ. पंकज पांडेय से तकनीकीशिक्षा और डॉ. रंजीत सिन्हा से उच्च शिक्षा को हटाकर यह चार्ज दूसरे अफसरों को दे दिया गया। गौरतलब है कि बीते दिनों रूसा के तहत हुई कंप्यूटरों की विवादित खरीद पर डॉ. रंजीत सिन्हा ने ही आपत्ति की थी, जिसके बाद अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह को सफाई देनी पड़ी।
माना जा रहा है कि सिन्हा को इसी मामले में निपटा दिया गया। चर्चा है कि लगातार होने वाले इन तबादलों में एक नए ‘पावर सेंटर’ का भरपूर दखल है। इसे लेकर अफसरों का एक धड़ा क्षुब्ध है। बीते दिनों ऊर्जा विभाग में तैनात एक आईएएस अधिकारी भी इसी ‘पावर सेंटर’ की मनमानी के चलते लंबी छुट्टी पर चले गए। नाराजगी इस कदर है कि खनन और आबकारी विभाग में अफसर चार्ज लेने तक को तैयार नहीं हो रहे हैं। कुछ और अफसरों के भी जल्द ही छुट्टी पर जाने की तैयारी की खबर है।
सिविल सर्विसेज बोर्ड का गठन करना राज्य सरकार के स्तर का मामला है। सुप्रीम कोर्ट या भारत सरकार के आदेश का पालन किया जाना चाहिए।
-आनंद वर्द्धन, सचिव (आईएएस एसोसिएशन)