महाराज और बहुगुणा को साधने में लगे हरीश
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कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं की चुनाव को लेकर हिचक मान मनौवल के बाद भी दूर होती नहीं दिख रही है। गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज से मुख्यमंत्री हरीश रावत की दो दौर एक ही दिन में खासी बातचीत हुई।
माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच कुछ हद तक बर्फ पिघली भी है। पर सारा मामला सुलझ ही गया हो ऐसा भी नही है।
उधर, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से होली मिलने के बहाने मिलने की हरीश रावत की कोशिश कामयाब नही हो पाई।
पिछले कुछ दिनों से महाराज की नाराजगी उत्तराखंड में आपदा को लेकर किए गए कामों को लेकर सामने आ रही थी। महाराज लगातार सरकार पर हमलावर थे और मुख्यमंत्री हरीश रावत बदले हुए हालात में खुलकर कुछ कह भी नहीं पा रहे थे।
दिल्ली में दिल मिलाने की कोशिश
मंगलवार को दोनों नेताओं के बीच में दिल्ली में दो अलग-अलग दौर की बातचीत हुई। सूत्रों के मुताबिक इस बातचीत में महाराज ने उन तमाम मुद्दों पर हरीश रावत से बातचीत की जिनको वे पिछले कुछ समय से उठाते आ रहे हैं।
महाराज ने यह साफ कहा कि वरिष्ठ कांग्रेसी होने के बावजूद उनकी उपेक्षा की जा रही है। संगठन के लोगों के मान सम्मान को दरकिनार किया जा रहा है। आपदा के बाद पहाड़ पलायन की चपेट में हैं।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कार्यकर्ताओं को दायित्व दिए जाने के मामले में महाराज से सूची सौंपने को भी कहा है। खुद महाराज इस मुलाकात की पुष्टि कर रहे हैं।
महाराज ने नहीं खोले अपने पत्ते
महाराज का कहना है कि हरीश रावत यह स्वीकार कर रहे हैं कि कार्यकर्ताओं का समायोजन होना चाहिए। क्षेत्र के विकास कार्य को लेकर सरकार ने जितनी घोषणाएं की हैं उनकी जानकारी दी जाएगी। पर महाराज खुलकर यह नहीं कह रहे है कि इस मुलाकात को वे खुद कितना कारगर मानते हैं।
(तस्वीरों में देखिए उत्तराखंड की होली)
दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को हरीश समर्थक अब एक सकारात्मक पहल मान रहे हैं। इनका कहना है कि इस बातचीत से स्थिति संभलेगी और ऐसे में जल्द ही टिकटों पर फैसला हो सकता है।
महाराज तो मिले पर बहुगुणा अभी भी दूर
उधर, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से होली मिलन के बहाने मिलने की मुख्यमंत्री हरीश रावत की कोशिश सफल नहीं हो पाई। सोमवार को रावत पैदल ही बहुगुणा के आवास की ओर बढ़ गए थे। वहां उन्हें बताया गया कि बहुगुणा देहरादून में हैं ही नहीं।
इनका है कहना
दोनों नेताओं के बीच बातचीत एक सकारात्मक पहल है। इससे यह संदेश भ्ीा गया है कि कांग्रेस में किसी की कोई नाराजगी नही है। चुनाव के लिए कांग्रेस एकजुट हैं। महाराज ने क्षेत्र की समस्याओं को ही मुख्यमंत्री के सामने उठाया था। हर कांग्रेसी यह करता है। इसको नाराजगी से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए।
-धीरेंद्र प्रताप, कांग्रेस प्रवक्ता