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Uttarakhand: हरेला पर्व पर सीएम धामी ने किया पौधरोपण, इस खास थीम पर किया गया कार्यक्रम का आयोजन
Wed, 16 Jul 2025 02:59 PM IST
रेनू सकलानी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Wed, 16 Jul 2025 02:59 PM IST
सार
हरेला पर्व पर पौधरोपण करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हरेला प्रदेश की संस्कृति, प्रकृति और चेतना से जुड़ा एक गहरा भाव है, जो हमें पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारियों की याद दिलाता है।
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हरेला पर सीएम ने किया पौधरोपण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को हरेला पर गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज परिसरदेहरादून में हरेला का त्योहार मनाओ, धरती मां का ऋण चुकाओ थीम पर आयोजित राज्यव्यापी पौधारोपण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रुद्राक्ष का पौधा रोपा ।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, प्रकृति और चेतना से जुड़ा एक गहरा भाव है, जो हमें पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारियों की याद दिलाता है। उन्होंने बताया कि हरेला पर्व के दिन लगभग पांच लाख पौधे रोपे जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग के प्रत्येक डिवीजन में 50 प्रतिशत फलदार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि इस महाभियान में सरकार द्वारा जनसहभागिता, स्वयंसेवी संगठनों, छात्र-छात्राओं, महिला समूहों और पंचायतों का सहयोग लिया जा रहा है।
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कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल की जाए, जब तक वे वृक्ष का रूप न ले लें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता से समृद्ध राज्य है, जिसकी रक्षा करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।
सदियों से चली आ रही पंरपरा
कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड में श्रावण मास में हरेला पूजन के उपरांत वृक्षारोपण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जो हमारी सांस्कृतिक चेतना और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का प्रमाण है। हरेला पर्व हमें यह सिखाता है कि प्रकृति की रक्षा करना केवल दायित्व नहीं, बल्कि एक पुनीत कर्तव्य है।
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वहीं वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि लोकपर्व हरेला प्रदेश के 2,389 स्थानों पर मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हरेला पर्व पर लगाए गए पौधों का सर्वाइवल रेट 80 प्रतिशत से अधिक रहा है। उन्होंने जल स्तर में हो रही गिरावट को गंभीर चिंता का विषय बताया और कहा कि इसके लिए हमें पौधारोपण एवं जलधाराओं के संरक्षण हेतु निरंतर प्रयास करने होंगे।