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Dehradun News: जयकारों के बीच हुआ श्री झंडे जी का आरोहण
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श्री दरबार साहिब में श्रद्धालुओं के लिए रविवार का दिन बेहद खास रहा। यहां सुबह श्री झंडे जी का आरोहण बड़े जोश के साथ किया गया। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु आरोहण के साक्षी बने और श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज का आशीर्वाद लिया। 14 मार्च (कल) को श्री दरबार साहिब का नगर कीर्तन निकाला जाएगा।
रविवार सुबह आठ बजे पुराने श्री झंडे जी को उतारा गया व पूजा अर्चना की गई। फिर नए श्री झंडे जी को संगतों ने दूध, घी, शहद, गंगाजल व पंचगव्यों के साथ स्नान कराया। इसके बाद 90 फीट ऊंचे श्री झंडे जी पर सादे और शनील के गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। खास बात यह है कि इस दौरान श्री झंडे जी को जमीन पर नहीं रखा जाता है। संगतें अपने हाथों पर श्री झंडे जी को थामे रहती हैं। दोपहर करीब 12.30 बजे श्री झंडे जी पर दर्शनी गिलाफ चढ़ाया गया। यह दृश्य देख संगतों व दूनवासियों की आंखों से आंसू छलक आए। हर कोई दर्शनी गिलाफ को छूकर पुण्य अर्जित करने के लिए उत्सुक दिखा।
शाम 3.58 मिनट पर जैसे ही श्री दरबार साहिब देहरादून के सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज ने आरोहण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया, वैसे ही पूरी द्रोणनगरी श्री गुरु राम राय जी महाराज के जयकारों से गूंज उठी। शाम 4 बजकर 12 मिनट पर श्री झंडे जी का आरोहण पूर्ण हुआ। इस दौरान ढोल नगाड़ों की थाप और कीर्तन की धुन पर संगत झूम रही थी। आरोहण के साथ ही दून के ऐतिहासिक श्री झंडे जी मेले का उद्घाटन हो गया। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश सहित देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने मत्था टेक सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान हर साल की तरह एक बाज ने श्री झंडे जी की परिक्रमा की।
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- एलईडी स्क्रीन पर हुआ आरोहण का सजीव प्रसारण -
श्री झंडे जी के आरोहण का सजीव प्रसारण विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए श्री दरबार साहिब मेला समिति ने परिसर के अंदर दो एलईडी स्क्रीन लगाई हुई थीं। इसके अलावा यूट्यूब व फेसबुक पेज पर भी मेले का सजीव प्रसारण प्रसारित हुआ।
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- पवित्र सरोवर में लगाई डुबकी
श्रद्धालुओं ने श्री दरबार साहिब स्थित पवित्र सरोवर में डुबकी लगाई। सुबह से ही श्रद्धालु यहां स्नान कर रहे थे। दोपहर बाद सरोवर के चारों तरफ संगतों के जुटने से यहां का नजारा भी दर्शनीय लग रहा था। साथ ही बच्चों ने भी सरोवर के स्नान का आनंद उठाया।
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- एशिया के सबसे बड़े मेलों में शुमार -
पंजाब में जन्मे गुरु राम राय महाराज के जन्म उत्सव के तौर पर शुरू हुआ यह मेला आज पूरे भारत ही नहीं बल्कि एशिया के बड़े मेलों में शुमार है। कहा जाता है कि गुरु राम राय महाराज ने यहां डेरा डाला था।
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- डेरादून से देहरादून का सफर -
सिखों के सातवें गुरु हर राय महाराज के बड़े पुत्र गुरु राम राय महाराज ने अल्पायु में ही खूब ज्ञान अर्जित कर लिया था। छोटी उम्र में ही वह संगठन के साथ भ्रमण पर निकल गए। अपने भ्रमण के दौरान वे 1675 में चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन दून पहुंचे। माना जाता है कि उनकी प्रतिष्ठा में झंडा मेले की शुरुआत हुई जो आज एक बड़े वार्षिक समारोह का रूप ले चुका है। देहरादून के खुड़बुड़ा मोहल्ले में गुरु राम राय के घोड़े का पैर जमीन में धंस गया और उन्होंने संगत को यहीं रुकने का आदेश दिया। बताया जाता है कि महाराज ने चारों दिशाओं में तीर चलाए और जहां तक तीर गए उतनी जमीन पर अपनी संगत को ठहरने को कहा। गुरु राम राय महाराज के यहां डेरा डालने के कारण इसे डेरादून कहा जाने लगा, जो बाद में देहरादून हो गया।
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रविवार सुबह आठ बजे पुराने श्री झंडे जी को उतारा गया व पूजा अर्चना की गई। फिर नए श्री झंडे जी को संगतों ने दूध, घी, शहद, गंगाजल व पंचगव्यों के साथ स्नान कराया। इसके बाद 90 फीट ऊंचे श्री झंडे जी पर सादे और शनील के गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। खास बात यह है कि इस दौरान श्री झंडे जी को जमीन पर नहीं रखा जाता है। संगतें अपने हाथों पर श्री झंडे जी को थामे रहती हैं। दोपहर करीब 12.30 बजे श्री झंडे जी पर दर्शनी गिलाफ चढ़ाया गया। यह दृश्य देख संगतों व दूनवासियों की आंखों से आंसू छलक आए। हर कोई दर्शनी गिलाफ को छूकर पुण्य अर्जित करने के लिए उत्सुक दिखा।
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शाम 3.58 मिनट पर जैसे ही श्री दरबार साहिब देहरादून के सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज ने आरोहण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया, वैसे ही पूरी द्रोणनगरी श्री गुरु राम राय जी महाराज के जयकारों से गूंज उठी। शाम 4 बजकर 12 मिनट पर श्री झंडे जी का आरोहण पूर्ण हुआ। इस दौरान ढोल नगाड़ों की थाप और कीर्तन की धुन पर संगत झूम रही थी। आरोहण के साथ ही दून के ऐतिहासिक श्री झंडे जी मेले का उद्घाटन हो गया। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश सहित देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने मत्था टेक सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान हर साल की तरह एक बाज ने श्री झंडे जी की परिक्रमा की।
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- एलईडी स्क्रीन पर हुआ आरोहण का सजीव प्रसारण -
श्री झंडे जी के आरोहण का सजीव प्रसारण विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए श्री दरबार साहिब मेला समिति ने परिसर के अंदर दो एलईडी स्क्रीन लगाई हुई थीं। इसके अलावा यूट्यूब व फेसबुक पेज पर भी मेले का सजीव प्रसारण प्रसारित हुआ।
- पवित्र सरोवर में लगाई डुबकी
श्रद्धालुओं ने श्री दरबार साहिब स्थित पवित्र सरोवर में डुबकी लगाई। सुबह से ही श्रद्धालु यहां स्नान कर रहे थे। दोपहर बाद सरोवर के चारों तरफ संगतों के जुटने से यहां का नजारा भी दर्शनीय लग रहा था। साथ ही बच्चों ने भी सरोवर के स्नान का आनंद उठाया।
- एशिया के सबसे बड़े मेलों में शुमार -
पंजाब में जन्मे गुरु राम राय महाराज के जन्म उत्सव के तौर पर शुरू हुआ यह मेला आज पूरे भारत ही नहीं बल्कि एशिया के बड़े मेलों में शुमार है। कहा जाता है कि गुरु राम राय महाराज ने यहां डेरा डाला था।
- डेरादून से देहरादून का सफर -
सिखों के सातवें गुरु हर राय महाराज के बड़े पुत्र गुरु राम राय महाराज ने अल्पायु में ही खूब ज्ञान अर्जित कर लिया था। छोटी उम्र में ही वह संगठन के साथ भ्रमण पर निकल गए। अपने भ्रमण के दौरान वे 1675 में चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन दून पहुंचे। माना जाता है कि उनकी प्रतिष्ठा में झंडा मेले की शुरुआत हुई जो आज एक बड़े वार्षिक समारोह का रूप ले चुका है। देहरादून के खुड़बुड़ा मोहल्ले में गुरु राम राय के घोड़े का पैर जमीन में धंस गया और उन्होंने संगत को यहीं रुकने का आदेश दिया। बताया जाता है कि महाराज ने चारों दिशाओं में तीर चलाए और जहां तक तीर गए उतनी जमीन पर अपनी संगत को ठहरने को कहा। गुरु राम राय महाराज के यहां डेरा डालने के कारण इसे डेरादून कहा जाने लगा, जो बाद में देहरादून हो गया।