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उत्तराखंड में उद्योग लगाने पर उद्यमियों को मिलेगी विशेष छूट, होगा फायदा ही फायदा

Thu, 26 Apr 2018 10:45 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 26 Apr 2018 10:45 PM IST
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 Gst Discount for Entrepreneurs for established Industry in uttarakhand

राज्य में स्थापित होने वाले उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार टैक्स में छूट देगी। राज्य के अंदर सीधे उपभोक्ता को माल बेचने पर उद्योगों को राज्य माल एवं सेवा कर (एसजीएसटी) से टैक्स की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

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बृहस्पतिवार को कैबिनेट से टैक्स में छूट देने की मंजूरी दी गई। इससे 21 मार्च 2020 से पहले उत्पादन शुरू करने वाले उद्योगों को टैक्स में राहत मिलेगी। पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने व रोजगार सृजन करने के लिए राज्य सरकार की ओर से विशेष एकीकृत औद्योगिक प्रोत्साहन नीति-2008 व सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति-2015 के तहत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नए उद्योगों को वैट (मूल्यवर्धित कर) प्रणाली में टैक्स छूट देने का प्रावधान था।
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लेकिन एक जुलाई 2017 से देशभर में जीएसटी लागू होने से उद्योगों को मिलने वाली टैक्स छूट समाप्त हो गई। इसे देखते हुए एसजीएसटी हिस्से से उद्योगों को टैक्स में छूट देने को मंजूरी दे दी है।

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‘ए’ श्रेणी के जिलों में 90 प्रतिशत टैक्स छूट

 Gst Discount for Entrepreneurs for established Industry in uttarakhand
जीएसटी - फोटो : अमर उजाला

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति की अवधि 31 जनवरी 2015 से 31 मार्च 2020 तक निर्धारित है। इस अवधि के बीच स्थापित उद्योगों को उत्पादन शुरू करने की तिथि से अधिकतम 10 वर्ष या 31 मार्च 2025 तक एसजीएसटी से टैक्स की प्रतिपूर्ति की जाएगी। लेकिन इसके लिए यह शर्त है कि राज्य के अंदर उद्योगों में उत्पादित माल की बिक्री सीधे उपभोक्ता को होनी चाहिए।

‘ए’ श्रेणी के जिलों में 90 प्रतिशत टैक्स छूट
प्रदेश सरकार ने एमएसएमई नीति के तहत उद्योग स्थापित करने के लिए जिलों को श्रेणियों में विभाजित किया है। ‘ए’ श्रेणी जिलों में स्थापित उद्योगों को बिजनेस टू कंज्यूमर माल विक्रय पर 90 प्रतिशत और ‘बी’ श्रेणी जिलों में 75 प्रतिशत की दर से टैक्स की प्रतिपूर्ति होगी। पहले उद्योगों को पूरा टैक्स सरकार के खाते में जमा करना होगा। इसके बाद सरकार उद्योगों के दावों पर एसजीएसटी हिस्से से टैक्स वापस करेगी। टैक्स प्रतिपूर्ति के लिए उद्योगों को दावा प्रत्येक तीन माह की समाप्ति के बाद अगले छह माह के अंदर संबंधित जिला उद्योग केंद्र में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

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