ज्योतिषाचार्य केए दुबे पदमेश को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, राज्यपाल ने किया सम्मानित
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अमर उजाला की ओर से आयोजित ज्योतिष महाकुंभ के समापन के मौके पर मुख्य अतिथि राज्यपाल डॉ के के पॉल ने देश भर से आए ज्योतिषाचार्यों को सम्मानित किया। उन्होंने ज्योतिषाचार्य केए दुबे पदमेश को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा।
साथ ही ज्योतिषाचार्य सतीश शर्मा, अजय भांबी, लेखराज शर्मा, जया मदान, शिवानी खेतान, विनोद त्यागी, डा.एचएस रावत, मां त्रिशला, पदमा शार्म, मुकेश भारद्वाज, राम लखन गैरोला, पंडित संषोष खंडूरी, पीपीएस राणा एवं सुनील पैन्यूली को ज्योतिष विभूषण अवार्ड प्रदान किया गया।
मुख्य अतिथि राज्यपाल ने कहा कि ज्योतिष देश की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। इस विरासत को जीवित रखने के लिए वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर इसे सुदृढ़ करना होगा। इसके लिए सतत शोध की जरूरत है। इससे लोगों की जिज्ञासाओं को दूर किया जा सकता है। यह बात राज्यपाल डॉ. केके पाल ने सोमवार को अमर उजाला-ग्राफिक एरा ज्योतिष महाकुंभ के समापन समारोह में कही।
प्राचीनकाल में ऋ षि पाराशर ने अपने गहन निरीक्षण, अनुभव एवं पूर्वानुभूति की आंतरिक शक्तियों से इस शास्त्र को आगे बढ़ाया। वर्तमान में विज्ञान की नई-नई खोजों के साथ इसे जोड़कर, इसके वैज्ञानिक आधार को प्रमाणित करके, इसके प्रति जिज्ञासा बढ़ाने एवं इसकी उपादेयता सिद्ध करने और इसकी स्वीकार्यता के लिए गंभीरता से कार्य करने की जरूरत है।
अपने मूल्यों पर आज भी कायम है भारतीय संस्कृति
उन्होंने कहा कि विश्व में केवल भारतीय सभ्यता संस्कृति ऐसी है, जो 5000 साल से आज तक जीवित है। कई सभ्यतायें समय के साथ नष्ट हो गईं, लेकिन भारतीय सभ्यता और संस्कृति अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों के कारण आज भी विद्यमान है।
राज्यपाल ने देश में ज्योतिष के इतिहास एवं भारतीय जीवन पद्धति से जुड़े संस्कारों पर प्रकाश डाला। देश में ज्योतिष का महत्व और प्रचार भरपूर है इसे वैज्ञानिक तथ्यों के साथ दुनिया के अन्य देशों तक प्रचारित किया जा सकता है।
आम आदमी को पता होना चाहिए कि ज्योतिषियों द्वारा बताए गए उपायों से नुकसान को टाला नहीं बल्कि कम किया जा सकता है। जैसे तेज धूप में छाता लगाने से धूप का असर कम हो जाता है। इसी तरह ज्योतिषियों द्वारा बताए गए उपाए से नुकसान के असर को कम किया जा सकता है।
हमारे पास खगोलीय गणना, ग्रह प्रभाव का वैज्ञानिक आधार होना चाहिए। स्वास्थ्य विषयों पर आधारित इस महाकुंभ में लोगों के कष्टों व कुंडली आदि के दुष्प्रभावों व बीमारियों का समाधान करने के लिए हमें ज्योतिष के वैज्ञानिक आधार पर और शोध करना होगा।
ज्योतिष शास्त्र को दुनिया में नई स्वीकार्यता तभी मिलेगी जब इसकी बुनियाद विज्ञान के क्षेत्र में हुए नये बदलाव न सिद्धांतों के आधार पर खड़ी होगी। ज्योतिष को विज्ञान के तौर पर साबित करके इसकी उपयोगिता और प्रमाणिकता को निर्विवादित साबित करने के लिए गंभीर वैचारिक मंथन किया जायेगा।