Uttatakhand : सात साल में पर्यटन क्षेत्र में पांच लाख रोजगार जुटाएगी सरकार, अमेरिकी एजेंसी ने पेश किया रोडमैप
सीएम ने साफ किया कि वित्तीय वर्ष के दौरान समयबद्ध ढंग से बजट का उपयोग हो और सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हो, इसके लिए वह हर महीने खुद समीक्षा करेंगे। इसके लिए उन्होंने सभी विभागों को दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए।
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विस्तार
प्रदेश सरकार 2030 पर्यटन क्षेत्र में पांच लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर जुटाएगी। पर्यटन, उद्यान, शहरी विकास समेत पांच प्रमुख क्षेत्रों से जीडीपी में सालाना 88,500 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व अर्जित करने का लक्ष्य बनाया है। इसके लिए आगामी वर्षों में सरकार इन पांच प्रमुख क्षेत्रों में तीन लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश जुटाने का लक्ष्य बनाएगी।
अमेरिकी एजेंसी मैकेंजी ग्लोबल ने शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष सशक्त उत्तराखंड @ 2025 और 2030 तक के लिए तैयार किए गए रोडमैप का प्रस्तुतीकरण किया। सीएम ने इस पर विभागाध्यक्षों को अगले 30 दिन में कार्ययोजना पर अमल की रणनीति बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने ताकीद किया कि सभी अफसरों की समयबद्ध कार्ययोजना के लिए जवाबदेही तय होगी।
वित्तीय वर्ष के पहले ही दिन मुख्यमंत्री ने अवकाश होने के बावजूद आलाधिकारियों की बैठक बुलाई। बैठक में मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, आनंद बर्द्धन, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगौली, मैकेंजी के सीनियर पार्टनर अमित खेर अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।
2025 तक अग्रणी राज्य बनाने के लक्ष्यों की नियमित समीक्षा
सीएम ने निर्देश दिए कि 2025 तक उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए विभागों का जो लक्ष्य दिए गए हैं, उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभागों ने अब तक धरातल पर क्या काम किए, इसकी नियमित समीक्षा होगी।
हर महीने खुद करेंगे आय-व्यय की समीक्षा
सीएम ने साफ किया कि वित्तीय वर्ष के दौरान समयबद्ध ढंग से बजट का उपयोग हो और सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हो, इसके लिए वह हर महीने खुद समीक्षा करेंगे। इसके लिए उन्होंने सभी विभागों को दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए।
पर्वतीय जिलों की जीडीपी बढ़ाने पर खास जोरसीएम के मुताबिक, राज्य की जीडीपी में देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिले का बड़ा योगदान है। शेष 10 पर्वतीय जिलों की जीडीपी में करीब 30 प्रतिशत का योगदान है। सरकार पर्यटन, उद्यान, उद्योग के क्षेत्र में नई योजनाओं से पहाड़ के जिलों की जीडीपी को बढ़ाएगी।
किस सेक्टर में कितनी संभावना
पर्यटन : एक करोड़ पर्यटक का लक्ष्य।
2030 तक वास्तविक पर्यटकों की संख्या 40 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ करने का लक्ष्य। इससे एक लाख प्रत्यक्ष व चार लाख अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावना। जीडीपी में 40-50 हजार करोड़ की अतिरिक्त जीडीपी बढ़ना।
हेल्थ केय रः चार नए अस्पताल और दो मेडिकल कॉलेज खुलेंगे।
1500-2000 अतिरिक्त केयर बेड बनाए जाएंगे। हर जिले में डायग्नोस्टिक सुविधाएं। इससे 2000 करोड़ का जीडीपी में योगदान।
उद्यान (सेब) : किसानों की आय 10 गुना की बढ़ेगी।
वर्तमान में 150 करोड़ की सेब की आर्थिकी को 3,000 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य। इससे 25-30 हजार किसानों की आय में 10 गुना बढ़ोतरी होगी। इससे जीडीपी में 2,500 करोड़ का योगदान।
विदेश में नौकरी : 70-90 हजार युवाओं को विदेश में नौकरी।
सरकार नर्सिंग, आतिथ्य, स्वास्थ्य कर्मी व अन्य क्षेत्रों में 70 से 90 हजार युवाओं को प्रशिक्षण देगी और उन्हें विदेश में नौकरी के अवसर उपलब्ध कराएगी। इससे राज्य में 3,000-4,000 करोड़ रुपये का विदेश से मुद्रा आएगी। इससे जीडीपी में 4000 की बढ़ोतरी होगी।
शहरी विकास : सात शहरी केंद्र बनेंगे।
25 से 40 लाख शहरी आबादी के लिए घर उपलब्ध कराए जाएंगे। सात शहरी केंद्र विकसित होंगे। इससे सालाना 30 हजार करोड़ रुपये की जीडीपी बढ़ेगी।
प्रदेश में पर्यटन, कृषि, उद्यान, उद्योग के क्षेत्र में कार्य करने के लिए अनेक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में लघु समयावधि की कार्ययोजना के साथ ही 2030 तक और क्या बेहतर किया जा सकता है। इस दिशा में तेजी से कार्य किया जाए। इन क्षेत्रों से जहां राज्य में लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, राज्य की जीडीपी में भी तेजी से वृद्धि होगी।
- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
सीएम ने ये निर्देश भी दिए
कुमांऊ क्षेत्र में कुछ ऐसे नये पर्यटक एवं धार्मिक स्थल विकसित किए जाएं कि चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु, गढ़वाल के साथ कुमाऊं के नैसर्गिक सौंदर्य का आनंद भी ले सकें।
पर्यटन की दृष्टि से कई सर्किटों के माध्यम से पूरे उत्तराखंड को जोड़ने के प्रयास हों।
राज्य के स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर ध्यान दिया जाए।
एप्पल और कीवी मिशन पर तेजी से कार्य किया जाए।
पर्वतीय क्षेत्रों में ऐरोमेटिक प्लांट की खेती को बढ़ावा मिले।
राज्य में उच्च शिक्षण संस्थानों में डिग्री कोर्स के अलावा कौशल विकास से संबंधित डिप्लोमा कोर्स संचालित हों।
होम स्टे को तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा।