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बेहद 'टेड़ा' है नई भर्ती का यह फैसला
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 09 Nov 2013 09:45 AM IST
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देहरादून में राज्य कैबिनेट ने शुक्रवार को एक ऐसा जोखिम भरा निर्णय लिया जिसे बगैर दृढ़ इच्छा शक्ति के पूरा करना मुमकिन नहीं है।
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सीधी भर्ती से भरने का निर्णय
विभिन्न विभागों में जिन रिक्त पड़े पदों को सीधी भर्ती से भरने का निर्णय लिया गया हैं, कार्मिकों की नियुक्ति के बाद सरकार को हर साल वेतन के लिए दो हजार करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाने होंगे। और, सरकार के लिए यह किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।
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राज्य स्थापना दिवस से एक दिन पहले सरकार ने सरकारी विभागों में रिक्त पड़े पदों पर भर्ती करने का निर्णय तो लिया लेकिन वित्तीय संसाधनों को जुटाना आसान काम नहीं होगा। क्योंकि वर्तमान हालातों में तो राजस्व जुटाने के लीकेज पर भी रोक लगाना संभव नहीं हो रहा है। राज्य पर इस समय 22 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्जा है।
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सरकार के वश की बात नहीं
हर साल वार्षिक प्लान तो बढ़ता है लेकिन रेवेन्यू बढ़ता नहीं दिखता। दूसरी तरफ नॉन प्लान (वेतन व संबंधित खर्चे) जितनी तेजी से बढ़ रहे हैं उन्हें कम करना भी सरकार के वश की बात नहीं है।
इसलिए अप्रैल 2012 तक का जो आकड़ा वित्त विभाग के पास है उसके अनुसार सरकारी विभागों में राजपत्रित व अराजपत्रित और समूग ग के 48 हजार से ज्यादा पद रिक्त हैं।
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और पूरे राज्य में लगभग 18 हजार ऐसी कर्मी हैं जो कि तदर्थ, संविदा व दैनिक वेतनभोगी के रूप में काम कर रहे हैं। इस हिसाब से यदि इन्हें स्थाई किया जाता है तो तीस हजार पदों पर सीधी भर्ती करनी ही होगी।
सालाना दो हजार करोड़ रुपए की जरूरत
इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी के 18 हजार से ज्यादा पदों पर आउट सोर्सिंग से भर्ती होगी। इतने व्यापक पैमाने पर रोजगार देने के लिए सरकार को सालाना दो हजार करोड़ रुपए की जरूरत होगी।
इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी के18503 पद रिक्त हैं जो कि आउट सोर्सिंग से भरे जाने हैं। क्योंकि छठवें वेतनमान के लागू होने के बाद चतुर्थ श्रेणी के पदों पर आउट सोर्सिंग वाली से नियुक्ति करने का प्रावधान लागू हो गया था।
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