Dehradun: उद्यान घोटाला केस में CBI ने पूर्व निदेशक बवेजा समेत 26 लोगों से की पूछताछ, कई हो सकते हैं गिरफ्तार
एजेंसी ने अधिकारियों और कर्मचारियों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाए हैं। बताया जा रहा कि सीबीआई इन अधिकारियों और कर्मचारियों में से कुछ को जल्द गिरफ्तार भी कर सकती है।
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चर्चित उद्यान घोटाले में सीबीआई ने कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग के पूर्व निदेशक एचएस बवेजा, पूर्व मुख्य उद्यान अधिकारी नैनीताल राजेंद्र कुमार सिंह समेत कुल 26 लोगों से सीबीआई ने बृहस्पतिवार को पूछताछ की। इनमें उत्तराखंड के विभागीय अधिकारी और जम्मू कश्मीर व हिमाचल की नर्सरी से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
तीनों राज्यों में 20 से ज्यादा जगहों पर तलाशी भी ली गई। एजेंसी ने अधिकारियों और कर्मचारियों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाए हैं। बताया जा रहा कि सीबीआई इन अधिकारियों और कर्मचारियों में से कुछ को जल्द गिरफ्तार भी कर सकती है। घोटाले की बात उद्यान निदेशालय रानीखेत से अप्रैल 20222 में उठी थी। उस वक्त लोगों ने क्षेत्र के बागान और निदेशालय की हालात पर चिंता जाहिर की थी।
निदेशालय में न तो निदेशक और न ही कोई अन्य कर्मचारी बैठता है। करीब नौ माह बाद वहां पर उद्यान विभाग के निदेशक एचएस बवेजा आए तो गुस्साए लोगों ने निदेशालय की तालाबंदी कर डाली। तब से ही बवेजा के चिट्ठे खुलने शुरू हो गए। प्रदेशभर में उद्यान विभाग में हुए पूर्व के घोटालों को लेकर प्रदर्शन होने लगे। उत्तरकाशी में भी उद्यान बचाओ उद्यान लगाओ समिति ने आंदोलन किया।
इसके बाद पता चला कि विभाग में फलदार पौधों की खरीद फरोख्त में वित्तीय गड़बड़ी की गई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विभाग से सूचनाएं मांगी तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि उद्यान निदेशक की ओर से पहले एक नकली नर्सरी अनिका ट्रेडर्स को पूरे राज्य में करोड़ों की पौध खरीद का कार्य देकर बड़े घोटाले को अंजाम दिया।
जब उद्यान लगाओ उद्यान बचाओ यात्रा से जुड़े किसानों और उत्तरकाशी के किसानों की ओर से इस प्रकरण को उठाया तो आनन-फानन में अनिका ट्रेडर्स के आवंटन को रद्द करने का पत्र जारी कर दिया गया, लेकिन पौधे अब भी अनिका ट्रेडर्स के ही बांटे गए। इधर, नैनीताल के तत्कालीन मुख्य उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार सिंह के साथ मिलकर बवेजा ने एक फर्जी आवंटन जम्मू कश्मीर की एक और नर्सरी बरकत एग्रो फार्म को कर दिया।
भौतिक सत्यापन में भी गड़बड़ी का जिक्र याचिकाकर्ता ने याचिका में किया है। बरकत एग्रो फार्म को इनवॉइस बिल आने से पहले ही भुगतान कर दिया गया तो कहीं बिलों पर अकाउंटेंट के हस्ताक्षर के बिना ही करोड़ों रुपये ठिकाने लगा दिए गए।
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जिस दिन वर्क ऑर्डर, उसी दिन आ गए पौधे
दअरसल, घोटाला करने वालों ने जम्मू कश्मीर से उत्तराखंड की दूरी का भी ध्यान नहीं दिया। सूचनाओं में पता चला कि जिस दिन वर्क ऑर्डर जारी हुए उसी दिन जम्मू कश्मीर की नर्सरी से पौधे आना भी दर्शाया गया। इन्हीं सब बातों को लेकर हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं दायर की गई। तब तक सरकार का भी इस मामले में कम ही ध्यान था। अलबत्ता एसआईटी का गठन जरूर कर दिया गया था। गत वर्ष अक्तूबर में हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश पारित किया। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट भी गई, लेकिन वहां भी हाईकोर्ट के आदेश को ही बरकरार रखा गया।
अफसर-कर्मियों से सुबह से शाम तक पूछताछ
सीबीआई ने जांच के लिए कुल 12 टीमों का गठन किया है। सीबीआई के वसंत विहार ऑफिस में एचएस बवेजा समेत कुल 26 अधिकारियों और कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया है। इसके साथ ही इनके ठिकानों पर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के नैनीताल, रानीखेत, देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चंबा आदि और जम्मू कश्मीर में तलाशी भी ली गई। सीबीआई के अधिकारिक सूत्रों ने बताया, तलाशी अभियान पूरा हो चुका है। बहुत से दस्तावेज व अन्य सामग्री कब्जे में ली गई है। हालांकि, सूत्रों ने अभी किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है।