इन्होंने गोबर की बनाई गणेश प्रतिमा और फिर किया कुछ ऐसा कि अब हमेशा इनके बीच रहेंगे गजानंद
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पर्यावरण संरक्षण के लिए इन्होंने गणेश चतुर्थी पर एक ऐसी तरकीब निकाली, जो मिसाल बन गई। पढ़िए क्या किया इन्होंने... जिले में गणेश महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर श्रद्धालुओं द्वारा एक भव्य शोभा यात्रा निकालने के बाद मूर्ति को मणिकर्णिका घाट पर विसर्जित किया।
वहीं मांडौं गांव स्थित बारही शक्तिपीठ में गोबर से तैयार गणेश प्रतिमा का गंगाजल से भरे कुंड में विधि विधान के साथ विसर्जन किया गया। इसके ऊपर अनार का एक पौधा लगाकर नई परंपरा शुरू की गई।
कुंड में अनार का पौधा रोपा
पिछले 11 दिन से मनाए जा रहे गणेश महोत्सव का भव्य समापन किया गया। मंगलवार को महोत्सव के अंतिम दिन नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा नगर के विभिन्न हिस्सों से होते हुए मणिकर्णिका घाट पर पहुंची। गणेश मूर्ति की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मूर्ति भागीरथी में विसर्जित की गई।
वहीं मांडौं गांव में महोत्सव के अंतिम दिन गोबर गणेश की मूर्ति को जल से भरे कुंड में विसर्जित किया गया। इसके बाद कुंड में अनार का पौधा रोपा गया। इस मौके पर विमल नौटियाल, सुरेंद्र पुरी, देवेश्वरी भट्ट, ब्रहमानंद नौटियाल, पुष्पा देवी, सरोज भट्ट, चैतराम भट्ट, जगन्नाथ भट्ट, शिव प्रसाद भट्ट, भूपेश कुड़ियाल, राजेश रतूडी, शंभू प्रसाद नौटियाल, रामकृष्ण नौटियाल आदि मौजूद थे।