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हेपेटाइटिस सी वैक्सीन के नाम पर देवभूमि में लाखों की ठगी
ब्यूरो / अमर उजाला, दिनेशपुर
Updated Wed, 15 Jun 2016 01:10 PM IST
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फर्जीवाड़ा
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उत्तराखंड में एक एनजीओ द्वारा क्षेत्र के गांवों व नगर के विभिन्न वार्डों में हेपेटाइटिस सी की रोकथाम के नाम पर शिविर लगाकर लाखों रुपये ठगने का मामला प्रकाश में आया है।
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बिना किसी सरकारी अनुमति के पिछले तीन महीने से क्षेत्र में चल रहे इस गोरखधंधे पर किसी की नजर नहीं पड़ी। वार्ड पांच में मंगलवार को लगाए गए शिविर में पत्रकारों ने पहुंचकर इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया। शिविर में मौजूद युवतियां भागने में सफल रही, जबकि क्षेत्र में शिविर को संचालित करने वाले सुपरवाइजर को लोगों ने दिन भर बंधक बनाए रखने के बाद शाम को पुलिस के हवाले कर दिया।
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देहरादून की रिसर्च इंडिया और सैहगवां पोस्ट बरात बोझ नगारिया पीलीभीत की सूर्योदय ग्राम विकास शिक्षा समिति स्वयंसेवी संस्था पिछले तीन महीने से क्षेत्र के विभिन्न गांवों व नगर के कई वार्डों में शिविर लगाकर हेपेटाइटिस सी काला पीलिया की रोकथाम के नाम पर हेपेटाइटिस बी का वैक्सीन लगाकर लोगों से 60-60 रुपये वसूल रही थी।
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संस्था द्वारा लाउडस्पीकर के जरिए मुनादी कराकर काला पीलिया जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति बचाव का झांसा भी दिया गया। मंगलवार को वार्ड 5 दुर्गा मंदिर में शिविर लगा। चूंकि हेपेटाइटिस सी का वैक्सीन अभी तक नहीं बना और इसके बचाव का टीका लगाने की बात सुनकर नगर के पत्रकारों के साथ भाजपा मंडल अध्यक्ष हिमांशु सरकार, वार्ड सभासद सुब्रतो गोस्वामी आदि मौके पर पहुंचे। देखा कि कुछ युवतियों द्वारा लोगों को हेपेटाइटिस बी का वैक्सीन लगाया जा रहा है।
पत्रकारों ने जब यह पूछा हेपेटाइटिस सी का प्रचार कर हेपेटाइटिस बी का वैक्सीन क्यों लगाया जा रहा है तो शिविर में मौजूद युवतियां कोई जवाब नहीं दे पाईं। शक होने पर प्रभारी चिकित्साधिकारी जेएस बिष्ट को मौके पर बुलाया गया। चिकित्साधिकारी ने शिविर में मौजूद अनुमति पत्र आदि का अवलोकन किया तो सारे फर्जी निकले। उन्होंने तत्काल शिविर को बंद करने के निर्देश दिए और शिविर में मौजूद जेएनएम संगीता को संस्था के पदाधिकारियों को बुलाने की बात कही।
बाद में संस्था के सुपरवाइजर जसपुर खुर्द निवासी दुष्यंत कुमार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। इस बीच लोगों का हुजूम भी स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गया। सुपरवाइजर ने शिविर के लिए सीएमओ का परमीशन होने की बात कही, मगर वह प्रभारी चिकित्साधिकारी को स्वास्थ्य महकमे व प्रशासन का कोई अनुमति पत्र नहीं दिखा पाए। मामले की जानकारी सीएमओ हेमंत जोशी को दी गई।
उन्होंने भी जिले इस तरह के किसी भी प्रकार के शिविर चलाने का आदेश जारी करने की बात से इंकार कर दिया। जिसके बाद लोग भड़क गए। लोगों ने सुपरवाइजर को बंधक बना लिया और संस्था के पदाधिकारियों को मौके पर बुलाकर उनका पैसा वापस देने की बात कही। देर शाम तक किसी भी पदाधिकारी के मौके पर नही पहुंचने के कारण लोगों ने सुपरवाइजर को पुलिस के हवाले कर दिया। रात को नगर व क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने संस्था के खिलाफ धोखाधड़ी की तहरीर थाने में दे दी थी।
रजिस्टेशन के नाम पर 60-60 रुपये वसूले
दिनेशपुर। पिछले तीन महीने में क्षेत्र के लोगों को काला पीलिया से बचाव के नाम पर एनजीओ अब तक लाखों रुपये ऐंठ चुकी है। उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संस्था रजिस्ट्रेशन शुल्क मिलाकर पहली वैक्सीन लगाने के लिए प्रति व्यक्ति से 60 रुपये वसूल रही थी। संस्था की ओर से 10 एमएल के एक वायल को आधा एमएल प्रति के हिसाब से बीस लोगों को लगाया जा रहा था। यानी 10 एमएल वायल के 12 सौ रुपये वसूले जा रहे थे। जबकि भारत सीरम एचपीबी-बी नाम का जो वैक्सीन संस्था इस्तेमाल कर रही थी, खुले बाजार में उसकी कीमत 170 रुपये मात्र है।
संस्था से मिलता है मानदेय
संस्था के सुपरवाइजर दुष्यंत कुमार ने प्रभारी चिकित्साधिकारी के साथ जनप्रतिनिधियों के सामने बताया कि संस्था उसे दस हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से मानदेय देती है। शिविर में मौजूद अन्य युवतियों को आठ हजार रूपये प्रति माह दिया जाता है। जबकि घर-घर जाकर प्रचार करने वाले स्थानीय बिचौलिये को पांच सौ रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी दी जाती है। उसे गदरपुर ब्लाक का जिम्मा सौंपा गया है। वह प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपये की रकम संस्था को सौंपते है। रकम लेने देहरादून से हरीश शुक्ला और राकेश सक्सेना नामक व्यक्ति के अलावा पीलीभीत के नेतराम राठौर आते थे। मगर आज संस्था का भंडाफोड़ होने के बाद सुपरवाइजर को बचाने कोई नहीं आया।