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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Former Union Minister Rajyavardhan Singh Rathore interviews

मोदी तय करेंगे मुझे कहां करनी है सियासी फील्डिंग - राज्यवर्धन राठौर

Mon, 14 Oct 2019 11:11 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 14 Oct 2019 11:11 AM IST
सार

  • मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने पर बोले पूर्व खेल मंत्री 
  • देहरादून लिटरेचर फेस्ट के दौरान हुई मुलाकात में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री ने साझा की दिल की बात

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Former Union Minister Rajyavardhan Singh Rathore interviews
rajyavardhan rathore - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सूचना प्रसारण व खेल राज्यमंत्री के तौर पर अलग छाप छोड़ने वाले सांसद राज्यवर्धन राठौर अपनी नई राजनीतिक जिम्मेदारी को लेकर अंजान हैं। उन्हें नहीं मालूम कि केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी कौन सी राजनीतिक भूमिका तय कर रखी है। आत्मविश्वास और उत्साह से लबरेज राठौर कहते हैं कि उन्हें इस बात की जल्दबाजी नहीं है कि कप्तान मोदी सियासी ग्राउंड पर उनसे किस जगह फील्डिंग करवाते हैं। मौजूदा वक्त को वे एक पड़ाव मानते हैं।

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वे कहते हैं कि पार्टी भविष्य की जिस लीडरशिप को तैयार कर रही है, उसका वे बहुत छोटा सा हिस्सा हैं। दरअसल, उनको लेकर खूब चर्चा है कि मोदी मंत्रिमंडल से बाहर रखने के पीछे पार्टी ने उनके लिए कुछ बड़ा सोचकर रखा है। देहरादून लिटरेचर फेस्ट में पहुंचे कर्नल राज्यवर्धन राठौर (रि.) से अमर उजाला राज्य ब्यूरो प्रमुख अरुणेश पठानिया ने उनकी पूर्व सैन्य अधिकारी, बतौर खिलाड़ी और खेल मंत्री के रूप में निभाई जिम्मेदारी के साथ मंत्रिमंडल से ड्रॉप होने से जुड़ी चर्चा पर विस्तार से बातचीत की। यहां पेश है बातचीत के मुख्य अंश...
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एक पूर्व सैन्य अधिकारी, ओलंपिक मेडलिस्ट होने के बाद राजनीति में आना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
 

यही दुर्दशा है कि देश सेवा को और देश को दिशा देने वालों को हम विपरीत कहते हैं। अब नई तरह की राजनीति का युग है। जहां पर उन लोगों के लिए स्थान है, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया है। जेटली जी राजनीति में आने वाले लोगों से एक प्रश्न पूछते थे कि भाई करते क्या हो? कोई अगर जवाब देता था कि राजनीति करता हूं। तो दोबारा पूछते थे कि करते क्या हो? आप राजनीति से पैसा नहीं कमा सकते। पहले कुछ कर के आओ। न केवल साधनों की वजह से बल्कि तजुर्बा लेकर आओ। अपने साथ कुछ मूल्य लेकर आओ। अब ऐसा दौर है। सेना और खेल में मेरा अनुभव इस नए युग की राजनीति में बहुत काम आया। 
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सेना और खेल से मिली कौन सी सीख राजनीति में काम आई? 

सेना पेशा नहीं जीने का तरीका है। सैनिक कंधे पर बोझ लेकर चलता है, छाती पर नहीं। सैनिक को नींद अच्छी आती है। सारा जीवन आप सेना में मानव प्रबंधन, प्रशासन और मिशन आधारित जीवन जीते हैं। खेल भी इसी तरह से हैं। उसमें चुनौतियां बड़ी रहती हैं। हारने और जीतने पर संयम बनाए रखना जरूरी है। विरोधी को इज्जत के साथ लेकिन विरोधी के तौर पर देखना चाहिए। एक ऐसा समय था जब भारत ओलंपिक में नहीं जीतता था। मैं और मेरी तरह के जिन लोगों ने उस दौर में पदक जीते यह उसी की बदौलत है कि आज हमारा हर खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का आत्मविश्वास लेकर खेलता है। यह ऐसे अनुभव हैं, जो आज के दौर की राजनीति में आपके बहुत काम आते हैं। 

आपने बतौर केंद्रीय राज्य खेल मंत्री और एक खिलाड़ी होने के नाते नीति निर्धारण में क्या नया किया था? 

मंत्रालय कोई भी हो, लेकिन असल में आप प्रधानमंत्री के एडवाइजर होते हैं। आपकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता को धरातल पर उतारने की होती है। मोदी जी पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने खेल और खिलाड़ियों को नई दिशा दी। वो मानते हैं जो खेल खेलता है उसका चरित्र अलग होता है। जो खेलेगा वो खिलेगा। उससे व्यक्तित्व में बड़ा बदलाव आता है। प्रधानमंत्री फिटनेस और योग पर इतना फोकस लेकर आए। खेलो इंडिया मूवमेंट लेकर आए। यह स्कूलों में बच्चों के लिए मंच है। हमारे सामने खेलों में बेंच स्ट्रेंथ की बड़ी कमी है। एक खिलाड़ी के बाद उस स्पर्धा में दूसरा नहीं मिलता, लेकिन खेलो इंडिया से यह कमी दूर हो जाएगी। कुछ वर्षों बाद हमारे पर हर स्पर्धा में बेहतरीन खिलाड़ी होंगे।

मोदी सरकार की दूसरी पारी में आपको मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने की कोई खास वजह रही? 

प्रधानमंत्री जी के दिमाग में बहुत सारे फैक्टर होते हैं, जिनके हिसाब से वे अपनी टीम का चयन करते हैं। इतना बड़ा देश है तो उसमें हर तरह का प्रतिनिधित्व रखना होता है। सबको अपनी अपनी जिम्मेदारी मिलती है। या तो आज मिलेगी या कल मिलेगी। लेकिन जिम्मेदारी सबको मिलेगी।

इस बार मोदी मंत्रिमंडल में न रहना आपको अखरा? 

प्लान और आइडिया तो आज भी हम प्रधानमंत्री जी को देते हैं। प्रधानमंत्री जी का दफ्तर हमेशा उनके लिए खुला रहता है जो आइडिया देना चाहते हैं। यह अलग बात है कि जब लोग किसी को अच्छा काम करते देखते हैं तो चाहने वाले अपने हिसाब से आप को बढ़ता देखना चाहते हैं। यह हर परिवार और संस्थान में होता है। प्रधानमंत्री जी ने सबसे पहले मुझे सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया तो उसके पीछे भी उनकी सोच थी। हमारी पार्टी लोगों के व्यक्तित्व निखार कर 15-20 साल के बाद के राजनीतिक भविष्य को तैयार कर रही है। इसीलिए अलग-अलग जिम्मेदारी दी जाती है। 

अपने राजनीतिक करियर को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं? 

मुझे देश के लिए समाज के लिए काम करना है। यह निर्णय हमारे कैप्टन को करना है कि किस फील्डर को कहां लगाएं। अगर चार पांच फील्डर ऐसे आ जाएं कि हमें कवर पर ही रहना है तो वो टीम कैसे चलेगी। ऐसे में कप्तान को तय करना होता है, वो जहां तैनात करेंगे वहीं जिम्मेदारी से काम करना है।

तो आप भाजपा के भविष्य की लीडरशिप तैयार करने के प्लान का हिस्सा हैं? 

छोटा सा हिस्सा हूं। बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें पार्टी भविष्य के लिए तैयार कर रही है। एक समय आडवानी जी ने ग्रूमिंग की। आज प्रधानमंत्री जी और अमित शाह जी एक  प्लान के तहत काम कर रहे हैं। 
 

चर्चा है कि आप राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के विकल्प के तौर पर तैयार किए जा रहे हैं। आप क्या मानते हैं? 
आपके काम करने का तरीका और क्षमता को देख कर पार्टी आपका आकलन करती है। बहुत पहले से आपको बताया नहीं जाता कि आपको क्या जिम्मेदारी दी जानी है। पहले आप अपनी सीख के लिए परिश्रम करते हैं फिर पार्टी अपने हिसाब से आपको जिम्मेदारी देती है। मैंने अपने आप को हमेशा संतुष्ट पाया। जब मैं सेना में था तो संतुष्ट था। जो मेरी चार पीढ़ियां कर रही थी, मैं भी वही कर रहा हूं। उसके बाद खेलने का मौका मिला तो उससे लगा कि यह तो बोनस है जीवन में। पहले आपने सेना में शानदार काम किया और अब खेलों में राष्ट्र का नेतृत्व कर रहा हूं। शूटिंग में पहला ओलंपिक सिल्वर मिला, जो उस समय तक किसी ने नहीं जीता था। तब ऐसा एहसास हुआ कि मेडल जीतने के लिए खिलाड़ियों को जैसा वातावरण की जरूरत है वो नहीं मिल रहा, तो नीति निर्धारण में आ गया। बिना किसी राजनीतिक बैकग्राउंड आपको टिकट मिल जाए, मंत्री पद मिल जाए, तो इससे बड़ा बोनस क्या हो सकता है। इतने बोनस मिलने के बाद आप बोंलेंगे साहब मेरे साथ यह ठीक नहीं हुआ। अब मैं मानता हूं कि राजनीतिक जीवन का एक पड़ाव है। यह पड़ाव आपको बहुत कुछ सीखाता है। मैं शुक्रगुजार हूं प्रधानमंत्री जी का यह पड़ाव तो उन्होंने मुझे दिया। 

आपके राजनीतिक जीवन में आए इस ‘पड़ाव’ का कैसे सदुपयोग कर रहे हैं? 
इस पड़ाव के दौरान मुझे अपने लोकसभा क्षेत्र में अधिक समय देने का। पार्टी के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का मौका मिला। मुझे अब समय मिल रहा है। युवाओं से बातचीत का मौका मिल रहा है। लंबे अरसे बाद एक बार फिर भारतीय सैन्य अकादमी में आ पाया। आइडिया मिल रहे हैं। अपने क्षेत्र में डेढ़ सौ किलोमीटर दूर उपचुनाव चल रहे हैं उसमें सक्रियता से जिम्मेदारी निभा रहा हूं।  

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