रुड़की: बाढ़ में नौ लोगों के बहने की सूचना पर दौड़ी पुलिस, रेस्क्यू के बाद सामने आई हकीकत तो...
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गंगा नदी में आई बाढ़ से माड़ाबेला गांव के समीप तालाब में मछली मार रहे नौ लोगों के बाढ़ में बहने की सूचना से अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही बचाव दल और अधिकारी घटना स्थल की ओर दौड़ पड़े। रेसक्यू करके सभी को बचा लिया गया।
हालांकि बाद में पता चला कि यह आपदा से पूर्व राहत कार्यों की तैयारी के लिए मॉक ड्रिल था। दिन के बारह बजे थे। आपदा से जुड़े विभागों के वायरलेस सेट पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने बताया कि गंगा नदी में बाढ़ आने से माड़ाबेला के पास तालाब मे मछली मार रहे नौ लोग बह गए हैं।
आनन-फानन में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी माड़ाबेला गांव पहुंचे। राजस्व, स्वास्थ्य, पुलिस, अग्निशमन, पशुधन आदि विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों भी पहुंचे। तत्काल ही राहत और बचाव कार्य शुरू किया। सामाजिक संस्था मेरठ सेवा समाज से आए 54 प्रशिक्षित आपदा मित्रों ने भी बचाव कार्यों में पुलिस व प्रशासन की मदद की।
रेसक्यू खत्म होने के बाद पहुंची जल पुलिस
लगभग डेढ़ घंटे के रेस्क्यू आपरेशन के बाद टीम ने सभी नौ लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया। इनमें से चार की हालत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खानपुर भेजा गया। जबकि पांच को उनके घर भेज दिया गया। बाद में पता चला कि गंगा जलस्तर नहीं बढ़ा था, बल्कि आपदा राहत एवं बचाव कार्यों को परखने के लिए मॉक ड्रिल की गई थी। तहसीलदार गोपाल सिंह ने बताया कि मॉक ड्रिल सफल रहा। इस दौरान खानपुर थानाध्यक्ष भगवान मेहर, नायब तहसीलदार सुशील कुमार, बिजेंद्र कश्यप, मनोज पांडे, मंगू सिंह, नरेंद्रपाल, एफएसओ शिशुपाल सिंह नेगी व अवधेश कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
रेसक्यू खत्म होने के बाद पहुंची जल पुलिस
गंगा में बहने की सूचना हरिद्वार जल पुलिस को भी दी गई थी। लेकिन जल पुलिस की टीम आपरेशन खत्म होने के काफी देर बाद पहुंची। एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा ने जल पुलिस की इस लेटलतीफी को खासी गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि जल पुलिस के लेट पहुंचने के कारणों की जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी।