एक्सक्लूसिव : 341 शिक्षकों की कमी देहरादून में 48 दिनों के भीतर 20 शिक्षक हो गए सरप्लस
341 सहायक अध्यापकों की कमी वाले हरिद्वार जिले में 48 दिन के भीतर 20 शिक्षक सरप्लस हो गए। सवाल यह है कि शून्य तबादला सत्र के बावजूद 361 शिक्षक कहां से आ गए ? प्रदेश में वर्तमान शिक्षा सत्र को शून्य तबादला सत्र घोषित किया गया है।
वहीं पिछले दो साल से बेसिक के शिक्षकों की भर्ती भी नहीं हुई फिर भी हरिद्वार जिले में जहां 341 शिक्षकों की कमी थी वहां अब 20 शिक्षक सरप्लस हैं। यह हम नहीं कह रहे बल्कि हरिद्वार जिले के अधिकारियों की ओर से हाल ही में शिक्षा निदेशालय को जो दो अलग-अलग पत्र भेजे गए हैं । उससे यह बात सामने आ रही है।
दरअसल जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ आनंद भारद्वाज की ओर से शिक्षा निदेशालय को 13 अगस्त 2020 को एक पत्र भेजा गया। इस पत्र में कहा गया कि जिले में जिला विकास समन्वयक एवं निगरानी समिति (दिशा) की 23 जुलाई 2020 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में बैठक हुई।
बैठक में जिले के अधिकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को बताया कि आरटीआई के मानक के अनुसार जिले में प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापकों के 341, प्रधानाध्यापकों के 15, उच्च प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापकों के 97, सहायक अध्यापक एलटी के 95, लेक्चरर के 75, हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक के 33 और इंटर कॉलेज के प्रिंसिपलों के 16 पद खाली हैं।
जबकि अब 23 नवंबर 2020 को जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी हनुमान प्रसाद विश्वकर्मा की ओर से शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखा गया है कि 30 सितंबर 2020 की छात्र संख्या एवं आरटीई के मानक के अनुसार जिले में सहायक अध्यापकों के कुल 2569 पद स्वीकृत हैं। जिसके प्रति 2590 सहायक अध्यापक कार्यरत होने के कारण जिले में 20 सहायक अध्यापक सरप्लस हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस जिले में हाल ही में बड़ी संख्या में शिक्षकों की पद खाली थे वहां अब इतने शिक्षक सरप्लस कैसे हो गए।
पहाड़ चढ़ने से रोकना था तो बताई शिक्षकों की कमी
दरअसल शिक्षकों की कमी और सरप्लस का पूरा मामला शिक्षकों को पहाड़ चढ़ने से रोकने और शिक्षकों की भर्ती का है। वर्ष 2017 में विभिन्न जिलों से हरिद्वार में 82 शिक्षकों को नियमों को ताक पर रखकर भेजा गया था। इनमें कुछ शिक्षकों की कठिनाई को देखते हुए शासन ने उन्हें हरिद्वार में ही बने रहने के निर्देश दिए। वही कुछ हाईकोर्ट से स्थगन आदेश ले आए थे।
इसके अलावा शेष शिक्षकों उनके मूल जिलों के लिए कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए गए थे। विभाग के अधिकारियों का कहना था कि इन शिक्षकों को वापस उनकी मूल तैनाती पर भेजा गया तो इससे जिले में शिक्षकों की कमी हो जाएगी।
जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ आनंद भारद्वाज ने 13 जुलाई 2020 को शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखा कि दिशा की बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अन्य जिलों से हरिद्वार में आए शिक्षकों को जिले में शिक्षकों की कमी को देखते हुए इन्हें यही रोकने के लिए निदेशालय और शासन को प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है।
उन्होंने शिक्षा निदेशालय से कहा कि इन शिक्षकों को हरिद्वार में ही बने रहने के लिए शासन से अनुमति ली जाए। जबकि अब बेसिक के शिक्षकों की भर्ती के संबंध में शिक्षा निदेशालय ने जिले से शिक्षकों के खाली पदों की जानकारी मांगी तो जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी ने निदेशालय को लिखे पत्र में कहा कि जिले में शिक्षकों की कमी नही है। यहां 20 शिक्षक सरप्लस हैं।
शिक्षक भर्ती के लिए बेरोजगारों को अन्य जिलों से करना पड़ सकता है आवेदन
प्रदेश में इन दिनों बेसिक के शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन हरिद्वार जिले में बेसिक के शिक्षकों के पद खाली न होने से इस जिले के हजारों बेरोजगारों को शिक्षक भर्ती के लिए अन्य जिलों से आवेदन करना पड़ सकता है।
हरिद्वार जिले में बेसिक के सहायक अध्यापकों की कमी नही है। 30 सितंबर 2020 की छात्र संख्या एवं आरटीई मानक के अनुसार जिले में 20 शिक्षक सरप्लस हैं। इस संबंध में एक बार फिर से सभी छह विकासखंडों के उप शिक्षा अधिकारियों से शिक्षकों के खाली पदों की रिपोर्ट मांगी गई है। - हनुमान प्रसाद विश्वकर्मा, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक
लॉकडाउन की वजह से बच्चे रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए होंगे यही वजह है कि शिक्षकों के पद सरप्लस हो रहे हैं। इस मामले में अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। - डा. आनंद भारद्वाज, मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार
हरिद्वार में शिक्षकों के पद खाली होने के कुछ दिनों के भीतर यहां शिक्षक सरप्लस कैसे हो गए इस मामले को दिखवाया जाएगा। - आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक