Exclusive: नोट नहीं अब पेट की भूख ले जा रही अपराध की ओर, हालात नहीं बदले तो विकट होगी स्थिति
- शहरी क्षेत्र में बढ़ रहे छोटे अपराध, खाने पीने की चीजें चुराने की घटनाएं आ रहीं सामने
- कई मामलों में दुकानदारों और लोगों ने ऐसे लोगों को पकड़ा, लेकिन बाद में छोड़ा
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लॉकडाउन और उसके बाद संगठित अपराधों में कमी देखने को मिली है। लेकिन, अब छोटे अपराध समाज की दहलीज पर खड़े हैं। ये वह अपराध हैं जो नोटों की भूख या रंजिशन नहीं बल्कि पेट की भूख को शांत करने के लिए अंजाम दिए रहे हैं। गली मोहल्लों में ऐसे मामलों में एकाएक बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिनमें किसी ने भूख मिटाने को कुछ चुराया या छीन लिया।
हालांकि, ये सभी मामले ऐसे हैं जो फिलहाल पुलिस के रजिस्टर में जगह नहीं बना सके हैं। क्योंकि, कहीं न कहीं समाज की अपनी न्याय प्रणाली ही इनका फैसला कर देती है। यदि इस तरह का अपराध करने वाला पकड़ा जाता है तो लोग उसे उसकी मजबूरी के चलते छोड़ देते हैं। यही नहीं अगर किसी की दुकान या किसी व्यक्ति से खाने पीने की कोई चीज चुराई है तो वह शिकायत करने से परहेज करता है।
ये घटनाएं हैं गवाह
दुकान के बाहर रखी आलू की बोरी उठाई
बल्लूपुर चौक के पास कुद दिन पहले एक दुकान के बाहर से आलू की बोरी उठा ली गई। बोरी में 20 किलो से ज्यादा आलू थे। इस मामले की दुकानदार ने कोई शिकायत नहीं की। स्थानीय लोगों में इस बात की खासी चर्चा रही। ऐसे में अब दुकानदार ने बाहर रखे सामान को पहले से ज्यादा व्यवस्थित कर दिया है।
मोमो लेकर भागा युवक
बात बंजारावाला क्षेत्र की है। यहां एक फास्टफूड की दुकान पर सामान्य सा दिखने वाला युवक आकर खड़ा हुआ। दुकानदार के मुताबिक काफी देर तक वह कुछ नहीं बोला। लेकिन, जब किसी और के लिए मोमो पैक किए तो वह उस पैकेट को लेकर भागने लगा। वहां खड़े लोगों ने उसे पकड़ लिया। मगर, उसने अपनी मजबूरी बताई तो दुकानदार ने उसे जाने दिया।
महिला ने उठाया ब्रेड का पैकेट
मोथरोवाला में एक दुकान के बाहर रखे ब्रेड के पैकेट कम हो गए। दुकानदार ने सीसीटीवी फुटेज में दिखा तो पता चला कि एक महिला ने पैकेट उठाया था। दुकान में भीड़ ज्यादा थी तो दुकानदार को इसका पता नहीं चला। लेकिन, दुकानदार ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया। दुकानदार ने बताया कि महिला को उसने आसपास के क्षेत्र में भीख मांगते हुए देखा है। मजबूरी में ही उसने यह कदम उठाया होगा।
हालात नहीं बदले तो विकट होगी स्थिति
ये चंद घटनाएं बीते एक सप्ताह के भीतर की हैं। चूंकि, अपराध बेहद छोटी प्रकृति के हैं तो लोगों ने इनमें शिकायत भी नहीं की। मगर, जानकारों की मानें तो लॉकडाउन में लोगों को खूब राशन आदि वितरित किया गया। हालात अब भी वैसे ही हैं लेकिन अब कोई सुध नहीं ले रहा है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि इस तरह के अपराधों में इजाफा हुआ तो स्थिति और भी विकट हो सकती है।