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पर्यावरण की समस्याओं का सभी के प्रयासों से करना होगा समाधान : राज्यपाल

Sun, 30 Nov 2025 08:31 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 30 Nov 2025 08:31 PM IST
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Environmental problems will have to be solved through everyone's efforts: Governor
राज्यपाल ने किया ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय में आयोजित ड्ल्यूएसडीएम-2025 का किया समापन
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तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के विचारक, शोधकर्ता और चिंतकों ने किया विभिन्न विषयों पर चिंतन-मंथन
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। पर्यावरण की समस्याओं का सभी के प्रयासों से व्यावहारिक और प्रभावी समाधान करना होगा। यह कहना है राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) का। उन्होंने यह बात ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय आपदा प्रबंधन विश्व शिखर सम्मेलन-2025 व 20वां उत्तराखंड राज्य एवं तकनीकी सम्मेलन के समापन कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहा।
राज्यपाल ने कहा कि पर्यावरण जिस तरह से दूषित हो रहा है, वह चेतावनी की सीमा से परे पहुंच चुका है। हम पृथ्वी और प्रकृति की चेतावनी को अनसुना न करें, कोविड-19 ने हमें चेताया भी था कि हमको विकास के नीतिगत प्रयास करने होंगे। पर्यावरण क्षेत्र में भारी इंजीनियरिंग के स्थान पर परंपरागत और पर्यावरण अनुकूलित निर्माण को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा, हिमालय के निवासियों को अधिक जिम्मेदारी लेनी होगी और पर्यावरण संरक्षण के आसान रास्ते तलाशने होंगे।
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राज्यपाल ने सम्मेलन में शामिल चिंतकों और विचारकों को पर्यावरण बचाव का ब्रांड एंबेसडर बताते हुए सभी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ की अवधारणा को आत्मसात करने का संकल्प लेने को कहा।
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राज्यपाल ने विज्ञान सम्मेलन के विजेताओं को युवा वैज्ञानिक सम्मान से सम्मानित किया। साथ ही राज्य के 95 ब्लॉक से प्रीमियर लीग में चुनकर आए विजेताओं को भी सम्मानित किया। इससे पूर्व उन्होंने वाटर रिसोर्सेज ऑफ हिमालय रीजन पुस्तक का विमोचन किया।
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आपदाएं सर्वव्यापी, तो समाधान भी सार्वभौमिक होने चाहिए : डॉ. अनिल जोशी
हैस्को के संस्थापक पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि आपदा प्रकृति की प्रतिक्रिया होती है। आज दुनिया में आपदा से कोई भी सुरक्षित नहीं। यदि किसी को लगता है कि वह आज सुरक्षित है तो तय मानिए कि कल उसके पास भी आपदा आने के पूरे आसार हैं। इसीलिए जब आपदा का प्रभाव सर्वत्र है तो इसके निराकरण के प्रयास भी सभी को सामूहिक रूप से करने होंगे। उन्होंने इसके लिए एक सामूहिक रोडमैप बनाने की जरूरत बताई। जिसमें सभी स्तर पर सभी जनमानस का योगदान शामिल हो।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एचओडी सदस्य राजेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भारत आपदा की दृष्टि से टॉप 10 संवेदनशील देश में शामिल है। आज देश के हर नागरिक को आपदा से बचाव के तौर-तरीके जानने की आवश्यकता है, आपदा के जोखिम को बढ़ाने वाली छोटी-बड़ी आदतों को त्यागना होगा। उन्होंने कहा, एनडीएमए की आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली की जानकारी देने वाला सचेत एप ने आपदा के दौरान बहुत जान बचाई है। उन्होंने सभी नागरिकों को सचेत एप को डाउनलोड करने को कहा। उन्होंने कहा, सभी को टीच एंड ट्रेन योर कम्युनिटी के सिद्धांत को अपनाना होगा। इसके अलावा भूकंप रोधी निर्माण, प्लास्टिक और कूड़े का सही निस्तारण व जल संरक्षण के छोटे-छोटे प्रयासों को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा।

यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने तीन दिवसीय समारोह की उपलब्धियां व सुझाव से सबको अवगत कराया। उन्होंने कहा कि 28 नवंबर को मुख्यमंत्री ने सिल्क्यारा विजय दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। कार्यक्रम के समापन पर ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. कमल घनसाला ने कहा,हमें सहयोग और सहभागिता के साथ आगे बढ़ना होगा और समुदायों को सशक्त बनाना होगा।
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