{"_id":"612942c58ebc3ef1634abd7e","slug":"emphasis-on-creation-of-new-technology-for-divyangjan-city-news-drn3886950171","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिव्यांगजनों के लिए नवीन तकनीकी के निर्माण पर जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिव्यांगजनों के लिए नवीन तकनीकी के निर्माण पर जोर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय दृष्टि बाधित दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान की ओर से कार्यशाला का आयोजन किया। इस दौरान दिव्यांगजनों के लिए नवीन तकनीक एवं नवीन सहायक उपकरणों का निर्माण कर उनका सशक्तीकरण करने पर जोर दिया गया।
विशेष शिक्षा में सहायक उपकरणों की भूमिका विषय पर हुई कार्यशाला में अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड मुक्त विवि के कुलपति प्रो. ओम प्रकाश सिंह नेगी ने कहा कि वर्तमान समय सूचना तकनीकी का है। और डिजिटल तकनीकी का प्रयोग कोविड काल ने हम सभी को करना सिखा दिया है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में परिवर्तन कर अधिक से अधिक तकनीकियों का समावेश किया जाना जरूरी है। साथ ही उन्होंने मुक्त विवि का एक अध्ययन केंद्र संस्थान में खोलने की बात कही। एनआईईपीवीडी के निदेशक डॉ. हिमांग्शु दास ने बताया कि वर्तमान में दिव्यांगजनों के लिए शैक्षिक और पुनर्वास संस्थान उनकी जनसंख्या के अनुरूप बहुत ही कम है। इसलिए हम सभी को इस ओर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय जल्द ही दिव्यांगजनों के लिए अपना एक अध्ययन केंद्र परिसर में स्थापित करेगा, जिससे कि दिव्यांगजनों को उच्च शिक्षा लेने में कोई समस्या नहीं आएगी। कार्यशाला में डॉ. सिद्धार्थ पोखरियाल, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. विनोद केन, डॉ. सुनील शिरपुरकर, डॉ. आरपी सिंह, बृजमोहन सिंह, डॉ. अंजली सिंह मौजूद रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विशेष शिक्षा में सहायक उपकरणों की भूमिका विषय पर हुई कार्यशाला में अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड मुक्त विवि के कुलपति प्रो. ओम प्रकाश सिंह नेगी ने कहा कि वर्तमान समय सूचना तकनीकी का है। और डिजिटल तकनीकी का प्रयोग कोविड काल ने हम सभी को करना सिखा दिया है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में परिवर्तन कर अधिक से अधिक तकनीकियों का समावेश किया जाना जरूरी है। साथ ही उन्होंने मुक्त विवि का एक अध्ययन केंद्र संस्थान में खोलने की बात कही। एनआईईपीवीडी के निदेशक डॉ. हिमांग्शु दास ने बताया कि वर्तमान में दिव्यांगजनों के लिए शैक्षिक और पुनर्वास संस्थान उनकी जनसंख्या के अनुरूप बहुत ही कम है। इसलिए हम सभी को इस ओर काम करने की जरूरत है।
विज्ञापन
उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय जल्द ही दिव्यांगजनों के लिए अपना एक अध्ययन केंद्र परिसर में स्थापित करेगा, जिससे कि दिव्यांगजनों को उच्च शिक्षा लेने में कोई समस्या नहीं आएगी। कार्यशाला में डॉ. सिद्धार्थ पोखरियाल, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. विनोद केन, डॉ. सुनील शिरपुरकर, डॉ. आरपी सिंह, बृजमोहन सिंह, डॉ. अंजली सिंह मौजूद रहीं।
विज्ञापन