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हमेशा लहर पर सवार होकर आता है टिहरी का सांसद

Sun, 18 May 2014 03:37 PM IST
ओमप्रकाश तिवारी / अमर उजाला, देहरादून
ओमप्रकाश तिवारी / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 18 May 2014 03:37 PM IST
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टिहरी संसदीय सीट पर जीतने वाला प्रत्याशी अक्सर किसी न किसी लहर पर सवार होकर आता है।

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इस बार मोदी लहर पर सवार
वर्ष 1977 से अब तक बहुत कम बार ऐसा हुआ है कि यहां से जीतने वाला प्रत्याशी किसी लहर पर सवार न रहा हो। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की माला राज्य लक्ष्मी शाह जीती हैं।

वर्ष 2012 के उपचुनाव में कांग्रेस के साकेत बहुगुणा को गैस सिलेंडर के विरोध की आंधी में उड़ाने वाली महारानी इस बार मोदी लहर पर सवार थी।

महारानी को 57.55 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि साकेत बहुगुणा को 32.75 फीसदी वोट मिले हैं।

राजीव की लहर से कम थी मोदी लहर मोदी लहर पर सवार होकर भाजपा की माला राज्य लक्ष्मी शाह ने कांग्रेस के साकेत बहुगुणा को भले ही दूसरी बार मात दे दिया हो।

लेकिन आंकड़े बताते हैं कि मोदी लहर वर्ष 1984 की राजीव गांधी की लहर से कमजोर थी। 1984 में टिहरी संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी ब्रह्दत्त को 63.58 प्रतिशत वोट मिले थे।
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प्रतिद्वंद्वी साकेत को 32.75 फीसदी वोट
ब्रह्दत्त के प्रतिद्वंद्वी एलकेडी के त्रिपन सिंह को केवल 19.74 फीसदी वोट मिले थे। इस इस बार मोदी लहर पर सवार महारानी को 57.55 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी साकेत को 32.75 फीसदी।
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महारानी को मिले वोट प्रतिशत से ब्रह्दत्त का वोट प्रतिशत 6.03 फीसदी अधिक है। यही नहीं ब्रह्त्त के प्रतिद्वंद्वी को जहां 19.74 फीसदी मिले थे, वहीं महारानी के प्रतिद्वंद्वी साकेत को 32.75 फीसदी वोट मिले हैं।

आंकड़े बताते हैं कि मोदी लहर इस सीट पर राजीव लहर से कमजोर थी।

इन पर रहा लहर का असर
टिहरी संसदीय सीट से जीतने वाला प्रत्याशी अक्सर किसी न किसी लहर पर सवार रहा है। जब भी किसी की लहर रही है तो जीतने वाले का मत प्रतिशत बढ़ जाता है।

वर्ष 1977 में जब देश में इंदिरा गांधी के खिलाफ लहर थी तो इस सीट से बीएलडी से चुनाव लड़ने वाले त्रिपन सिंह नेगी 58.47 प्रतिशत वोटों से जीते थे।

कांग्रेस के हरि सिंह बिष्ट को 29.07 फीसदी वोटों से ही संतोष करना पड़ा था। इसी तरह वर्ष 2004 में भाजपा के मानवेंद्र शाह कांग्रेस प्रत्याशी विजय बहुगुणा से 3.11 प्रतिशत अधिक वोट पाकर जीत गए थे।

मानवेंद्र शाह को 47.63 और बहुगुणा को 44.52 प्रतिशत वोट मिले थे। वर्ष 2004 में भाजपा अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत उदय और इंडिया शाइनिंग जैसे नारों की लहर पर सवार थी।

देश में बदलाव की लहर
वर्ष 1998 में भी इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी मानवेंद्र शाह को 51.82 प्रतिशत वोट मिले थे। उनके मुकाबले कांग्रेस के विजय बहुगुणा को 39.75 प्रतिशत वोट मिले थे। इस साल भी देश में बदलाव की लहर चल रही थी।

लोग केंद्र में अस्थिर सरकार से तंग आकर एक स्थिर सरकार की चाह में थे। एक साल बाद वर्ष 1999 में यहां से भाजपा के मानवेंद्र शाह 43.01 प्रतिशत मतों से जीते थे।

उनके मुकाबले कांग्रेस के विजय बहुगुणा को 39.75 फीसदी ही वोट मिले थे। इस साल भी केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार अल्पमत में आकर गिर गई थी। ऐसे में लोगों में भाजपा के प्रति सहानुभूति की लहर थी।

बिना लहर घट जाता है मत प्रतिशत

टिहरी के मतदाता बिना लहर भी भाजपा प्रत्याशी मानवेंद्र शाह को वर्ष 1991 और 1996 में चुन चुके हैं। लेकिन तब शाह को उतने प्रतिशत वोट नहीं मिले थे।

वर्ष 1996 में मानवेंद्र शाह को 35.75 और 1991 में 39.14 फीसदी वोट मिले थे। उनके मुकाबले कांग्रेस प्रत्याशी नव प्रभात को 22.59 फीसदी और ब्रह्मदत्त को 27.77 फीसदी वोट मिले थे।

वर्ष 2009 के चुनाव में कांग्रेस के विजय बहुगुणा 43.14 फीसदी वोट से भाजपा के जसपाल सिंह राणा को हराया। राणा को 33.80 प्रतिशत वोट मिले थे।

बहुगुणा जब 2012 में मुख्यमंत्री बन गए तो उनके बेटे साकेत ने उपचुनाव लड़ा। साकेत को भाजपा की माला राज्य लक्ष्मी शाह ने करीब बीस हजार वोटों से हराया था।

शख्सियत भी हारीं हैं यहां
वर्ष 1980 में कांग्रेस के त्रिपन सिंह नेगी ने सीपीआई के विद्यासागर नौटियाल को 43.93 फीसदी वोट से हराया था। नौटियाल को 26.53 फीसदी वोटों से ही संतोष करना पड़ा था।

विद्यासागर नौटियाल लेखक और साहित्यकार तो थे ही साथ ही बेहतर सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। इस इलाके में उन्होंने लोगों के लिए काफी काम किए थे। लेकिन चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।


यही नहीं वर्ष 1989 में कांग्रेस के ब्रह्मदत्त ने निर्दलीय के इंद्रमणि बड़ोनी को हराया था। ब्रह्मदत्त को 38.04 और बड़ोनी को 35.08 फीसदी वोट मिले थे। यह वही इंद्रमणि बड़ोनी हैं जिन्हें अब उत्तराखंड का गांधी कहा जाता है।

टिहरी गढ़वाल से विजेता प्रत्याशियों के जीत का प्रतिशत
वर्ष - विजेता - प्रतिशत - पार्टी - हारे प्रत्याशी - प्रतिशत - पार्टी
2009 - विजय बहुगुणा - 43.14 - कांग्रेस - जसपाल सिंह राणा - 33.80 भाजपा
2004 - मानवेंद्र शाह - 47.63 - भाजपा - विजय बहुगुणा - 44.52 कांग्रेस
1999 - मानवेंद्र शाह - 43.01 - भाजपा - विजय बहुगुणा - 39.75 कांग्रेस
1998 - मानवेंद्र शाह - 51.82 - भाजपा - हीरा सिंह बिष्ट - 15.88 कांग्रेस
1996 - मानवेंद्र शाह - 35.75 - भाजपा -  नवप्रभात - 22.59 एआईआईसी (टी)
1991 - मानवेंद्र शाह - 39.14 - भाजपा - ब्रह्मदत्त - 27.77 कांग्रेस
1989 - ब्रह्मदत्त - 38.04 - कांग्रेस - इंद्रमणि बडोनी - 35.08 निर्दलीय
1984 - ब्रह्मदत्त - 63.58 - कांग्रेस - त्रिपन सिंह - 19.74 एलकेडी
1980 - त्रिपन सिंह - 43.93 - कांग्रेस - विद्यासागर नौटियाल - 26.53 सीपीआई
1977 - त्रिपन सिंह - 58.47 - बीएलडी - हीरा सिंह बिष्ट - 29.07 कांग्रेस

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