भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पिछले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के 58 प्रत्याशियों को अयोग्य घोषित कर दिया है। ये सभी अगले तीन साल तक विधानसभा और लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। चुनाव खर्च का ब्योरा न देने की वजह से आयोग ने यह कार्रवाई की है।
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रजनी रावत
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इसे कांग्रेस नेता व ऋषिकेश के नगरपालिका अध्यक्ष दीप शर्मा और महिला आयोग की उपाध्यक्ष रजनी रावत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इन दोनों ही नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के टिकट की दावेदारी की है।
बता दें कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 10 क के अनुसार, विधानसभा चुनाव के प्रत्येक प्रत्याशी को चुनाव खर्च का ब्योरा देना अनिवार्य है। वर्ष 2012 में 261 निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था।
जिन 58 प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने पर रोक की घोषणा शुक्रवार को की गई है, इनमें से ज्यादातर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे। ऐसे चर्चित नामों में ऋषिकेश से कांग्रेस के टिकट की दावेदारी कर रहे नगर पालिका के अध्यक्ष दीप शर्मा, रायपुर से टिकट की दावेदार रजनी रावत, सहसपुर चुनावी तैयारी कर रही भाजपा नेत्री लक्ष्मी अग्रवाल, गुलजार अहमद, रायपुर से अजय सूद, डोईवाला से भार्गव चंदोला समेत कई नाम हैं जिनका चुनाव लड़ने का ख्वाब चकनाचूर हो जाएगा।
गौरतलब है कि चुनाव खर्च का ब्योरा न देने पर अब तक कुल 89 प्रत्याशी अयोग्य ठहराए जा चुके हैं। निर्वाचन विभाग के मुताबिक, पिछला चुनाव लड़े 29 उम्मीदवारों को जून माह में और दो अन्य को जुलाई माह में आयोग अयोग्य घोषित किया जा चुका है।