बाजारों में बढ़ गई रौनक, आज चांद नजर आया तो कल मनेगा ईद का त्योहार
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बृहस्पतिवार को ईद का चांद नजर आया तो शुक्रवार को ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाएगा। चांद की तस्दीक न होने पर शनिवार को ईद मनाई जाएगी।
शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी और शहर मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने बताया कि रमजानुल मुबारक के रोजे और इबादतों के बाद आने वाला ईद-उल फितर का त्योहार रोजेदारों के लिए खुदा का इनाम है।
उन्होंने कहा कि पैगंबरे इस्लाम ने कहा है कि जब अहले ईमान रमजान के पवित्र महीने के एहतरामों से फारिग हो जाते हैं और उसके तमाम कामों को पूरा कर लेते हैं, तो अल्लाह एक दिन अपने उस इबादत करने वाले बंदों को बख्शीश व इनाम से नवाजता है। इसी बख्शीश व इनाम के दिन को ईद-उल फितर का नाम देते हैं।
रमजान माह खत्म होते ही इस्लामिक कलैंडर का दसवां माह शव्वाल शुरू होता है। इस माह की पहली चांद रात ईद की चांद रात होती है। इस रात का इंतजार वर्ष भर खास वजह से होता है, क्योंकि इस रात को दिखने वाले चांद से ही इस्लाम के बड़े त्योहार ईद-उल फितर का ऐलान होता है। इस तरह से यह चांद ईद का पैगाम लेकर आता है। इस चांद रात को अल्फा कहा जाता है।
खरीददारों से बाजार गुलजार
ईद की नमाज से पहले अदा करें जकात-फितरा
शहर मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने बताया कि ईद मनाने से पहले फितरा और जकात निकालना जरूरी है। फितरा गरीब और मजलूमों को दिया जाता है। जिससे वह भी ईद की खुशी में शरीक हो सके। फितरे और जकात अदा न करने से रमजान के फजाईल अधूरे रह जाते है। उन्होंने लोगों से ईद की नमाज से पहले जकात और फितरा अदा करने की अपील की।
खरीददारों से बाजार गुलजार
ईद उल फितर पर्व की खरीददारी करने को पलटन बाजार, आजाद कालोनी, इनामुल्ला बिल्डिंग, विभिन्न मॉल समेत तमाम मुस्लिम इलाकों में ईद की खरीदारी के लिए लोगों के उमड़ने से बाजार गुलजार है। युवाओं की पहली पसंद डिजाइनर कुर्ते बने है। जबकि महिलाएं भी कढ़ाई के शूट पसंद कर रही है। वहीं जूतों और सिवाईयों की दुकानों से भी भीड़ हटने का नाम नही ले रही है। मसजिदों में हो रही तैयारी ईद की नमाज के लिए मसजिदों में तैयारियों की जा रही है।