आर्थिक सर्वे 2020: उत्तराखंड में पर्यटन की संभावना अपार, सरकार नहीं खोल रही रोजगार के द्वार
- प्रदेश में सौ में से केवल आठ को ही मिल रहा है पर्यटन में सीधा रोजगार
- सेवा क्षेत्र में तेजी से विस्तार, लेकिन पर्यटन को नहीं मिल रहा फायदा
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कई सहूलियतें होने के बाद भी उत्तराखंड अपनी पर्यटन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा है। तमाम दावों के बाद भी पर्यटन में सीधे तौर पर रोजगार पाने वालों की संख्या उत्तराखंड में पड़ोसी राज्य हिमाचल से कम है। प्रदेश में सेवा क्षेत्र का विस्तार तेजी से हो रहा है लेकिन उसका फायदा पर्यटन को नहीं हो पा रहा है।
शुक्रवार को जारी आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक सेवा क्षेत्र का प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान 40.5 प्रतिशत है। इसका मतलब यह भी हुआ कि प्रदेश में अगर सौ रुपये हैं तो 40.5 रुपये सेवा क्षेत्र से ही मिल रहे हैं। सेवा क्षेत्र का ही एक बढ़ा हिस्सा व्यवसाय, होटल, जलपान गृह आदि के रूप में पर्यटन से जुड़ा हुआ है।
इतना होने पर प्रदेश में पर्यटन से रोजगार का सीधा फायदा उठाने वाले लोगाें की संख्या बेहद कम है। पड़ोसी राज्य हिमाचल से तुलना करने पर यह और भी साफ हो रहा है। हिमाचल में कुल रोजगार का 10 प्रतिशत रोजगार प्रत्यक्ष रूप से पर्यटन से जुड़ा हुआ है।
उत्तराखंड में मात्र आठ प्रतिशत लोग ही पर्यटन से सीधा फायदा रोजगार के रूप में ले रहे हैं। पर्यटन में अप्रत्यक्ष रोजगार के रूप में फायदा लेने वालों का प्रतिशत हिमाचल से अधिक है। साफ है कि उत्तराखंड को पर्यटन प्रदेश बनाने के लिए सरकार को पर्यटन में प्रत्यक्ष रोजगार से भी जोड़ना होगा।
राहत की बात यह है कि सेवा क्षेत्र का विस्तार उत्तराखंड में अन्य कई राज्यों की तुलना में अधिक है। आर्थिक सर्वे में सेवा क्षेत्र को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया गया है और यह भी कहा गया है कि पर्यटन की क्षमता का और अधिक उपयोग किया जाए। उत्तराख्ंाड में सेवा क्षेत्र के विकास की दर का अनुमान 9.5 प्रतिशत आंकी गई है। हाल ही में प्रदेश सरकार की ओर से जारी आर्थिक सर्वेक्षण में विकास दर दस प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।
अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी
उत्तराखंड
प्रत्यक्ष 2.29
अप्रत्यक्ष 5.27
हिमाचल
प्रत्यक्ष 3.20
अप्रत्यक्ष 6.29
पर्यटन से रोजगार
उत्तराखंड
प्रत्यक्ष 7.99
अप्रत्यक्ष 21.18
हिमाचल
प्रत्यक्ष 10.23
अप्रत्यक्ष 20.23
(स्रोत आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21)
उत्तराखंड का सेवा क्षेत्र
परिवहन, भंडारण, संचार में सर्विस 14805 करोड़
संचार एवं प्रसारण 10671 करोड़
व्यापार,होटल एवं जलपान गृह 26027 करोड़
वित्तीय सेवाएं 4881 करोड़
व्यवसायिक सेवाएं 10044 करोड़
लोक प्रशासन 8612 करोड़
अन्य सेवाएं 12816 करोड़
कुल 77248 करोड़
(स्रोत..........आर्थिक सर्वेक्षण उत्तराखंड )
चिंता : किसानों को लोन देने में हो रही है आनाकानी
उन चुनिंदा राज्यों में उत्तराखंड भी शामिल है जो खेती के लिए किसानों को कर्ज उपलब्ध कराने को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक खेती की रोजगार, आय और खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्र सरकार ने 2019-20 में 13.50 लाख करोड़ रुपये का कर्ज किसानों को उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया था।
इसमें से नौ लाख करोड़ रुपये ही बांटा जा सका। आर्थिक सर्वे में पाया गया कि किसानों को लोन देने में पर्वतीय राज्यों की ओर से कोताही हो रही है। कुल लोन में इन राज्यों की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है। हाल ही में फोकस पेपर जारी करते समय कृषि क्षेत्र के लिए उत्तराखंड में 24556 करोड़ रुपये की ऋण संभावना जताई गई थी।
सरकारी बैंकों को भी सुधरना होगा
आर्थिक सर्वेक्षण में यह साफ कहा गया है कि देश में प्राइवेट बैंकों के मुकाबले सरकारी बैंकों की कार्यक्षमता कम है। उत्तराखंड भी इसका अपवाद नहीं है। मुसीबत यह है कि प्रदेश में निजी बैंकों की बजाय सरकारी बैंकों का ही अधिक बोलबाला है। ऐसे में प्रदेश को सरकारी बैंकों के इस रवैये का अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।