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गांधी शताब्दी अस्पताल में ईसीजी जांच की सुविधा जल्द
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अमर उजाला में छपी खबर।
- फोटो : DEHRADUN
गर्भवती महिलाओं को ईसीजी जांच के लिए अब दो अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जिला अस्पताल के राजकीय गांधी शताब्दी परिसर में तकनीशियन की नियुक्ति हो गई है। अब जल्द ही यहां ईसीजी जांच की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
अभी ईसीजी जांच के लिए गर्भवती महिलाओं को गांधी शताब्दी परिसर से आधा किलोमीटर दूर स्थित जिला कोरोनेशन अस्पताल परिसर जाना पड़ता है। वहां से फिर डॉक्टर को जांच रिपोर्ट दिखाने के लिए वापस गांधी शताब्दी अस्पताल पहुंचना होता है। इस तरह से एक बार की ईसीजी जांच के लिए गर्भवतियों को एक किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ रहा है। रूटीन या इमरजेंसी की स्थिति और प्रसव से पहले डॉक्टर ईसीजी जांच की सलाह देते हैं। ईसीजी जांच आमतौर पर दिल तक रक्त पहुंचाने वाली वाहिकाओं में परेशानी, ऑक्सीजन की कमी, नसों के ब्लॉकेज, टिशूज की असामान्य स्थिति, सीने में तेज दर्द या सूजन, सांस लेने में तकलीफ, हार्ट अटैक के लक्षणों और दिल से जुड़ी अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए की जाती है। प्रसव खासकर सीजेरियन से पूर्व ईसीजी जांच जरूरी है। कई बार कुछ अन्य परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर ईसीजी की सलाह देते हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक, गर्भावस्था के अंतिम दिनों या आपात स्थिति में गर्भवती के लिए ज्यादा दूर आने-जाने और लाइन में देर तक खड़ा होना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में जिस अस्पताल में महिला की डिलीवरी हो रही है, वहीं ईसीजी जांच की व्यवस्था होनी चाहिए। अमर उजाला ने गर्भवती महिलाओं की इस समस्या को 27 फरवरी 2021 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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इस पर संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ्य महानिदेशालय से तकनीशियन और ईसीजी मशीन की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया था। शनिवार को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल से जिला गांधी शताब्दी अस्पताल को ईसीजी तकनीशियन मिल गया है।
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गांधी शताब्दी अस्पताल परिसर में ईसीजी तकनीशियन ने ज्वाइन कर लिया है। जल्द ही ईसीजी मशीन की व्यवस्था भी कर ली जाएगी। इसके बाद गर्भवती महिलाओं को ईसीजी जांच के लिए ज्यादा चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। एक-दो दिन में गांधी शताब्दी अस्पताल परिसर में ईसीजी जांच की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी।
- डॉ. शिखा जंगपांगी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय जिला अस्पताल कोरोनेशन एवं गांधी शताब्दी
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अभी ईसीजी जांच के लिए गर्भवती महिलाओं को गांधी शताब्दी परिसर से आधा किलोमीटर दूर स्थित जिला कोरोनेशन अस्पताल परिसर जाना पड़ता है। वहां से फिर डॉक्टर को जांच रिपोर्ट दिखाने के लिए वापस गांधी शताब्दी अस्पताल पहुंचना होता है। इस तरह से एक बार की ईसीजी जांच के लिए गर्भवतियों को एक किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ रहा है। रूटीन या इमरजेंसी की स्थिति और प्रसव से पहले डॉक्टर ईसीजी जांच की सलाह देते हैं। ईसीजी जांच आमतौर पर दिल तक रक्त पहुंचाने वाली वाहिकाओं में परेशानी, ऑक्सीजन की कमी, नसों के ब्लॉकेज, टिशूज की असामान्य स्थिति, सीने में तेज दर्द या सूजन, सांस लेने में तकलीफ, हार्ट अटैक के लक्षणों और दिल से जुड़ी अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए की जाती है। प्रसव खासकर सीजेरियन से पूर्व ईसीजी जांच जरूरी है। कई बार कुछ अन्य परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर ईसीजी की सलाह देते हैं।
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विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक, गर्भावस्था के अंतिम दिनों या आपात स्थिति में गर्भवती के लिए ज्यादा दूर आने-जाने और लाइन में देर तक खड़ा होना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में जिस अस्पताल में महिला की डिलीवरी हो रही है, वहीं ईसीजी जांच की व्यवस्था होनी चाहिए। अमर उजाला ने गर्भवती महिलाओं की इस समस्या को 27 फरवरी 2021 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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इस पर संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ्य महानिदेशालय से तकनीशियन और ईसीजी मशीन की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया था। शनिवार को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल से जिला गांधी शताब्दी अस्पताल को ईसीजी तकनीशियन मिल गया है।
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गांधी शताब्दी अस्पताल परिसर में ईसीजी तकनीशियन ने ज्वाइन कर लिया है। जल्द ही ईसीजी मशीन की व्यवस्था भी कर ली जाएगी। इसके बाद गर्भवती महिलाओं को ईसीजी जांच के लिए ज्यादा चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। एक-दो दिन में गांधी शताब्दी अस्पताल परिसर में ईसीजी जांच की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी।
- डॉ. शिखा जंगपांगी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय जिला अस्पताल कोरोनेशन एवं गांधी शताब्दी