सावधानः हिमाचल से लेकर बिहार तक भूकंप का खतरा
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आईआईटी के भूकंप विशेषज्ञों की मानें तो कांगड़ा (हिमाचल) से लेकर उत्तराखंड और बिहार तक आठ मैग्निट्यूड के भूकंप का खतरा बना है।
अभी तक इस क्षेत्र में जितने भी भूकंप आए हैं, वह सब सात मैग्निट्यूड से कम क्षमता के थे। जबकि प्रत्येक 200 साल में भूगर्भ में आठ मैग्निट्यूड के भूकंप को पैदा करने वाली ऊर्जा एकत्र हो जाती है।
यहां यह भी गौर करने लायक है कि सात मैग्निट्यूड के भूकंप से निकलने वाली ऊर्जा, आठ मैग्निट्यूड के बराबर होती है। ऐसे में आठ मैग्निट्यूड के भूकंप की आशंका हमेशा बनी हुई है।
आईआईटी रुड़की के अर्थक्वेक डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष एवं भूकंप वैज्ञानिक प्रो. एमएल शर्मा ने बताया कि हिमालयी क्षेत्र में कांगड़ा और उत्तराखंड से लेकर बिहार तक के बीच करीब 600 वर्षों में सात मैग्निट्यूड से कम के ही भूकंप आए हैं।
1999 में चमोली में आए भूकंप का मैग्निट्यूड 6.8, 1991 के उत्तरकाशी भूकंप का 6.6, 1980 के धारचूला भूकंप का 6.1 और 1975 किन्नौर के भूकंप का मैग्निट्यूड 6.2 था। जबकि भारतीय और यूरेशियन प्लेट के टकराने से भूगर्भ में प्रत्येक 200 साल में आठ मैग्निट्यूड के बराबर की ऊर्जा एकत्र हो जाती है।
ऐसे में सात से मैग्निट्यूड के भूकंप से उतनी ऊर्जा नहीं निकल पाती, जितनी कि एकत्र होती है। उन्होंने बताया कि आठ मैग्निट्यूड के एक भूकंप से सात मैग्निट्यूड के 30 भूकंप और छह मैग्निट्यूड के एक हजार भूकंप के बराबर ऊर्जा निकलती है। ऐसे में जहां पर आठ के बराबर के भूकंप काफी समय नहीं आए हैं। वहां इसकी आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
100 साल में साढ़े चार मीटर खिसक रही प्लेट
हिमालय में जहां पर फाल्ट हैं वहां पृथ्वी की प्लेटें 100 साल में करीब 4.5 मीटर खिसकती है। वहीं आठ मैग्निट्यूड के भूकंप के बाद पृथ्वी पांच से आठ मीटर तक अपनी जगह बनाती है। ऐसे में आठ से कम मैग्निट्यूड वाले भूकंप 100 साल के अंतराल में आते रहते हैं।
वैज्ञानिकों की भूमिका को केंद्र गंभीर
नेपाल में आए भूकंप के बाद वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आपदा की समस्या के समाधान की दिशा में केंद्र सरकार की ओर से गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं। भूकंप की त्रासदी से कैसे निपटा जाए इसके लिए वैज्ञानिकों की भूमिका को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसी के केंद्र सरकार की पहल पर नेपाल में जाने वाले वैज्ञानिकों के दल में आईआईटी रुड़की को शामिल किए जा रहा है। केंद्रीय मंत्रालय की ओर से इस बाबत संस्थान को दिशा निर्देश दिए गए हैं।
मिनिस्ट्री आफ अर्थ साइंस की ओर से आईआईटी रुड़की के भूकंप विभाग के वैज्ञानिकों से संपर्क साधा गया है। जिसके तहत नेपाल जाने वाली वैज्ञानिकों की टीम में संस्थान के वैज्ञानिकों को शामिल किए जाने के लिए वार्ता की गई है। सूत्रों के अनुसार मंगलवार को केंद्रीय टीम नेपाल के रवाना होगी।
इस बाबत आईआईटी के अर्थक्वेक डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो. एमएल शर्मा ने भी संस्थान के वैज्ञानिकों से मंत्रणा की है। वैज्ञानिक भूकंप से संबंधित तथ्य जुटाने में लगे हैं। ताकि निरीक्षण के दौरान ज्यादा से ज्यादा जानकारियों को उपयोग में लाया जा सके।