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Dehradun News: बारिश न होने से किसान चिंतित, मटर की बुआई प्रभावित
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Iसाहिया क्षेत्र की प्रमुख फसलों में शामिल है मटर, करीब 1100 हेक्टेयर में होती है मटर की खेतीI
बारिश न होने से जनजातीय क्षेत्र के किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। कई जगहों पर अभी तक मटर की बुआई नहीं कर सके हैं। जिन जगहों पर किसानों ने जैसे-तैसे बुआई कर भी दी है तो वहां पाले और धूप के कारण कोपल मुरझा रहे हैं। क्षेत्र में किसान सबसे ज्यादा मटर की खेती करते हैं। करीब 1100 हेक्टेयर में इसका उत्पादन होता है। यह क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसल है। इससे किसानों को अच्छी कमाई होेती है। फसल हाथों हाथ बिक जाती है।
नवंबर से लेकर दिसंबर का प्रथम सप्ताह मटर की बुआई के लिए उपयुक्त माना जाता है। समय पर बुआई से फसल मार्च माह के अंत और अप्रैल में तैयार हो जाती है। इधर, आधा दिसंबर से ज्यादा समय बीतने के बाद भी बारिश नहीं हुई हैं। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ने लगी हैं। अलसी निवासी परम सिंह, दातनू निवासी भीम सिंह, बोहरी निवासी रण सिंह, तारली निवासी नारायण सिंह का कहना है अधिकांश खेती बारिश पर आधारित है। बारिश न होने से मटर की बुआई नहीं कर सके हैं। अच्छे उत्पादन के लिए 350 रुपये प्रति किग्रा की दर से बीज खरीदा है, लेकिन सिंचाई के अभाव में खेत बुआई के लिए तैयार नहीं हो सके हैं। कई किसानों ने बुआई की है तो उनकी फसल की कोपल पाले और तेज धूप के कारण मुरझा रही हैं। यदि जल्द बारिश न हुई तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
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Iबुआई के लिए जमीन में नमी जरूरी होती है। वर्तमान में बारिश बेहद जरूरी है। पाला पड़ने से भी फसल को नुकसान पहुंच रहा है। इससे उत्पादन के भी प्रभावित होने की आशंका है।
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Iडॉ. रामकुमार, वरिष्ठ उद्यान प्रभारीI
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बारिश न होने से जनजातीय क्षेत्र के किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। कई जगहों पर अभी तक मटर की बुआई नहीं कर सके हैं। जिन जगहों पर किसानों ने जैसे-तैसे बुआई कर भी दी है तो वहां पाले और धूप के कारण कोपल मुरझा रहे हैं। क्षेत्र में किसान सबसे ज्यादा मटर की खेती करते हैं। करीब 1100 हेक्टेयर में इसका उत्पादन होता है। यह क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसल है। इससे किसानों को अच्छी कमाई होेती है। फसल हाथों हाथ बिक जाती है।
नवंबर से लेकर दिसंबर का प्रथम सप्ताह मटर की बुआई के लिए उपयुक्त माना जाता है। समय पर बुआई से फसल मार्च माह के अंत और अप्रैल में तैयार हो जाती है। इधर, आधा दिसंबर से ज्यादा समय बीतने के बाद भी बारिश नहीं हुई हैं। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ने लगी हैं। अलसी निवासी परम सिंह, दातनू निवासी भीम सिंह, बोहरी निवासी रण सिंह, तारली निवासी नारायण सिंह का कहना है अधिकांश खेती बारिश पर आधारित है। बारिश न होने से मटर की बुआई नहीं कर सके हैं। अच्छे उत्पादन के लिए 350 रुपये प्रति किग्रा की दर से बीज खरीदा है, लेकिन सिंचाई के अभाव में खेत बुआई के लिए तैयार नहीं हो सके हैं। कई किसानों ने बुआई की है तो उनकी फसल की कोपल पाले और तेज धूप के कारण मुरझा रही हैं। यदि जल्द बारिश न हुई तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
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Iबुआई के लिए जमीन में नमी जरूरी होती है। वर्तमान में बारिश बेहद जरूरी है। पाला पड़ने से भी फसल को नुकसान पहुंच रहा है। इससे उत्पादन के भी प्रभावित होने की आशंका है।
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Iडॉ. रामकुमार, वरिष्ठ उद्यान प्रभारीI