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टॉयलेट में प्रसव और बच्चे की मौत का मामला, दून मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 14 Nov 2018 11:10 AM IST
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दून महिला अस्पताल के टॉयलेट में महिला के प्रसव और बच्चे की मौत के मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने दून मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। निदेशालय ने इस बात पर भी जवाब मांगा है कि एक के बाद एक घटनाओं का जिम्मेदार कौन है ?
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दून महिला अस्पताल में रविवार को एक महिला का प्रसव टॉयलेट में हो गया था। आरोप है कि महिला के पति बृजमोहन ने स्टाफ को मदद के लिए बुलाया, लेकिन कोई नहीं आया। काफी देर बाद भी जब कुछ नहीं सूझा तब वह खुद ही अपनी जैकेट में नवजात को महिला अस्पताल लाया और बाद में अन्य लोगों की मदद से पत्नी को लाया। जहां उपचार के दौरान शिशु की मौत हो गई। इससे पहले भी दो नवंबर को अस्पताल में फर्श पर महिला का प्रसव हुआ था।
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उससे पूर्व 20 सितंबर को एक महिला का प्रसव फर्श पर हुआ था, जिसमें जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। तीनों मामलों पर चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने सख्त नाराजगी जताई है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने दून मेडिकल कॉलेज(दून महिला अस्पताल इसके अधीन है) प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्होंने लगातार हो रही घटनाओं पर दो दिन के भीतर जवाब मांगा है।
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फर्श पर प्रसव : एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी
दून महिला अस्पताल के शौचालय में प्रसव और नवजात की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन मामले की लीपापोती में जुट गया। हैरत की बात है कि अव्यवस्थाओं में सुधार करने के बजाए अस्पताल प्रशासन ने पीड़िता के पति से एक पत्र लिखवा लिया। यह पत्र जब सोशल मीडिया में वायरल हुआ तो जमकर किरकिरी हुई। आखिर में अधिकारियों ने पत्र डिलीट कर दिया। दून मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य से लेकर डॉक्टर व नर्स तक मामले को दबाने में लग गए हैं। हद तो तब हो गई जब मंगलवार को दबाव बनाकर अस्पताल प्रशासन ने तीमारदार से उसे ही पूरे मामले का जिम्मेदार होने का पत्र लिखवा लिया।
इसके बाद उसे सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया। इसके बाद जैसे ही प्रशासन को पता चला कि तीमारदार पहले ही मीडिया के सामने अस्पताल की लापरवाही उजागर कर चुके हैं तो प्रबंधन ने उसे डिलीट कर दिया। महिला के पति का पत्र वायरल हुआ तो अमर उजाला ने इस मामले में पीड़ित पक्ष से बात की। पति की बहन ने बातचीत में बताया कि पूरी तरह से अस्पताल प्रशासन ही जिम्मेदार है। इससे साफ हो गया है कि अस्पताल प्रशासन ने जबर्दस्ती दबाव बनाकर महिला के पति से पत्र लिखवाया था। मामले में दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता का कहना है कि अब जब तक मामले की जांच होने के बाद रिपोर्ट नहीं आएगी, तब तक वह इस पत्र को जारी नहीं करेंगे। यहां यह भी सवाल उठ रहा है कि जब पहले ही इस मामले की जांच की औपचारिकता पूरी कर क्लीन चिट दे दी गई है तो किस बात की जांच दोबारा की जा रही है।
दबाव बनाने का पहला मामला नहीं
दून महिला अस्पताल प्रशासन का मरीज के तीमारदार पर दबाव बनाकर पत्र लिखवाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी दो नवंबर को जब महिला का फर्श पर प्रसव हो गया था तो इसका विरोध करने वाले पति पर दबाव बनाया था। जिसके बाद दूसरे दिन महिला का पति मुकर गया था।