मानसून से पहले बढ़ी सरकार की चिंता, 37 जगहों पर कभी भी तबाही मचा सकते हैं बादल
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उत्तराखंड में मानसून पहुंचने से पहले ही सरकार की चिंता बढ़ गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मानसून सत्र की तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए और डीएम को सभी नोडल अधिकारियों के मोबाइल नंबर की सूची तैयार कर संवेदनशील स्थानों पर चस्पा करने के आदेश दिए।
कलेक्ट्रेट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सीएम ने सभी विभागीय अधिकारियों से मानसून सत्र की तैयारियों की जानकारी ली। अपर जिलाधिकारी मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि जिला मुख्यालय सहित सभी तहसीलों में आपदा कंट्रोल रूम 24 घंटे प्रभावी है। जिले में 37 संवेदनशील स्थानों को चिह्नित किया गया है। उन्होंने बताया कि जिले में दो क्रेन मारवाड़ी व पुलिस लाइन गोपेश्वर में तैनात की गई है। जिले में मानसून काल के लिए तीन माह का खाद्यान्न एवं 88 केएल मिट्टी के तेल का भंडारण किया गया है।
एसपी तृप्ति भट्ट ने बताया कि मानसून काल में राहत बचाव के लिए नदी किनारे बसे गांवों के स्थानीय 75 तैराक युवकों को आपदा मित्र के रूप में प्रशिक्षण दिया गया है। सभी थाना/पुलिस चैकियों को आपदा किट भी उपलब्ध करा दी गई है। जिले में गौचर, गोविंदघाट, पांडुकेशर, घांघरिया व बदरीनाथ एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं। उप वन संरक्षक बदरीनाथ एनएन पांडेय ने कि मानसून के दौरान विभाग की ओर से जिले में 12 लाख, 42 हजार 883 पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है, जिनका रोपण 15 जून के बाद शुरू कर दिया जाएगा।
आपदा प्रबंधन के लिए जनसहभागिता बढ़ाएं
सीएम ने उत्तरकाशी जिले में भी अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग कर बैठक की। उन्होंने जिले में डेंजर जोन को चिह्नित कर यहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम करने को कहा। उन्होंने आपदा प्रबंधन के लिए जनसहभागिता को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जल संरक्षण एवं वनीकरण अभियानों को सफल बनाने पर जोर दिया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक ददन पाल ने बताया कि आपदा से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है।
संवेदनशील स्थानों का चयन कर जरूरी सुरक्षा इंतजाम एवं कर्मचारी तैनात किए गए हैं। जिले में 543 आवासों को संवेदनशील घोषित किया गया है। यहां रह रहे परिवारों को बरसात में सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 6300 स्वयं सेवियों को आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। बैठक में एसडीएम देवेंद्र नेगी, डीएफओ संदीप कुमार, ओसी कलेक्ट्रेट अनुराग आर्य, आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल आदि मौजूद रहे।
वहीं पौड़ी में हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग में सीएम ने डीएम को आपदा के दौरान राहत व बचाव कार्य के लिए अभी से जरूरी उपकरण खरीदने एवं कार्मिकों की नियुक्ति के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यक दवा व अन्य सामग्री को संवेदनशील स्थलों, तहसील व ब्लॉक मुख्यालयों में पहुंचा दिया जाए। अतिक्रमण पर तत्काल कार्रवाई की जाए। डीएम सुशील कुमार ने बताया कि आपदा के दौरान त्वरित कार्रवाई के लिए जनपद व तहसील स्तर पर आपदा कंट्रोल रूम खोले गए हैं।