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Dehradun News: डायबिटिक रेटिनोपैथी की अब एआई से होगी पहचान

Sun, 01 Dec 2024 12:08 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 01 Dec 2024 12:08 AM IST
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Diabetic retinopathy will now be identified through AI
Iदून अस्पताल में जल्द शुरू होगी सुविधा, कर्मचारियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
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Iमधुमेह के कई मरीजों की एक साथ हो सकेगी जांच, पर्वतीय और दूरगामी इलाकों के लोगों को भी मिलेगा फायदाI
Iदून अस्पताल में जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी रोग की पहचान की जाएगी। चिकित्सकों के मुताबिक इसके इस्तेमाल से एक साथ 50 से भी अधिक मरीजों की रेटिना में होने वाले इस रोग की पहचान एक साथ की जा सकेगी। इसके लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।I
Iशहर से देहात तक मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों की संख्या में बढ़ती जा रही है। इसके अलावा बच्चों में भी टाइप-1 डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है। दून अस्पताल के रेटीना विशेषज्ञ की ओपीडी में हर रोज करीब 10 मरीज डायबिटिक रेटिनोपैथी से पीड़ित मिल रहे हैं। चिकित्सक बताते हैं कि आज भी कई मधुमेह के मरीज ऐसे हैं, जो डायबिटिक रेटिनोपैथी के शिकार हैं, लेकिन जांच न होने की वजह से उनको रोग के संबंध में जानकारी ही नहीं हैं।
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Iआमतौर पर यह समस्या पर्वतीय और दूरगामी क्षेत्रों में देखने को मिलती है। जहां पर संसाधन के अभाव लोग जांच से वंचित रह जाते हैं, लेकिन फंडस कैमरे के माध्यम से एक साथ ही कई मधुमेह के मरीजों की फोटो खींचकर उनकी एआई साफ्टवेयर के माध्यम से जांच की जा सकेगी।
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Iदिल्ली-ऋषिकेश एम्स के बाद दून अस्पताल में लगेगा एआई साफ्टवेयर
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Iदून अस्पताल के रेटीना विशेषज्ञ डॉ. नीरज सारस्वत ने बताया कि यह साफ्टवेयर वर्तमान में दिल्ली और ऋषिकेश एम्स में संचालित किया जा रहा है। इसको दून अस्पताल में स्थापित करने के लिए अधिकारिक प्रस्ताव आया है। यह एआई आधारित सॉफ्टवेयर मरीजों के लिए काफी मददगार साबित होगा। इससे कम समय में अधिक लोगों में डायबिटिक रेटिनोपैथी की पहचान की जा सकेगी।
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Iसंसाधन विहीन इलाकों में लोगों को मिलेगी राहत
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Iचिकित्सकों के मुताबिक दून अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में एआई सॉफ्टवेयर स्थापित होने से ऐसे क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा जो चिकित्सा के क्षेत्र में आज भी संसाधन विहीन है। चिकित्सक की टीम पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित गावों के सभी मधुमेह पीड़ित लोगों को एकत्रित कर उनकी फंडस कैमरे के माध्यम से फोटो खींचेगी। इन सभी फोटो को एक साथ एआई सॉफ्टवेयर में लगाकर जांच करने के बाद रोग से पीड़ित मरीजों की पहचान की जा सकेगी।I

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Iदून अस्पताल में डायबिटिक रेटिनोपैथी की पहचान के लिए एआई सॉफ्टवेयर स्थापित होने से बड़ी संख्या में मरीजों को लाभ मिलेगा। इसकी मदद से कम समय में अधिक मरीजों में रोग की पहचान की जा सकेगी। - डॉ. अनुराग अग्रवाल, चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पतालI
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