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डीजीपी ने रद्द की स्पेशल माइनिंग टास्क फोर्स
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 03 Dec 2013 01:46 PM IST
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उत्तराखंड में अवैध खनन रोकने के लिए बनी स्पेशल माइनिंग टास्क फोर्स वजूद में आते ही विवादों में फंस गई।
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हुआ यूं कि डीजीपी की अनदेखी कर सीधे ही मनपसंद पुलिसवालों की नियुक्ति करा ली गई। नाराज डीजीपी ने रविवार को ही पीएचक्यू पहुंचकर जिम्मेदार अफसरों को तलब किया और नियुक्ति आदेश निरस्त कर दिए।
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वहीं जिलों में भेजे गए नियुक्ति के आदेश वापस कराए गए। इतना ही नहीं, डीजीपी ने फोर्स के स्वरूप में कुछ संशोधन करने का प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया। मुख्यमंत्री ने बड़े जोश के साथ माइनिंग स्पेशल टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की थीं।
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सलाह मशविरा किए बगैर फोर्स में चहेतों की नियुक्ति
गठन के आदेश में लिखा है कि डीआईजी व डीएसपी की नियुक्ति शासन करेगा और शेष कर्मियों की नियुक्ति डीजीपी की सहमति से होगी। लेकिन सूत्र बताते है कि शनिवार के दिन ही डीजीपी से सलाह मशविरा किए बगैर फोर्स में चहेतों की नियुक्ति के आदेश जारी हो गए।
एसटीएफ से इंस्पेक्टर कैलाश पंवार, हरिद्वार में रितेश कुमार समेत दो उपनिरीक्षक व दो पीएसी के सूबेदार समेत पंद्रह पुलिसकर्मियों की नियुक्ति करा ली गई। नियुक्त पुलिसकर्मियों की सूची देख डीजीपी नाराज हो गए।
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उन्होंने तत्काल इन नियुक्तियों को निरस्त करने के आदेश दिए। जिलों में भेजे गए फैक्स वापस मंगाए गए। हालांकि डीजीपी बीएस सिद्धू ने इतना भर कहा कि माइनिंग फोर्स में एसटीएफ, विजिलेंस से लोग ले लिए गए थे, इससे इन दोनों एजेंसियों के कामकाज पर फर्क पड़ता। इसलिए नियुक्ति आदेश निरस्त किए गए।
शासन को भेजा प्रस्ताव
-चार टीमों की जरूरत हैं, लेकिन बनाए गए ढांचे में एक ही टीम
-यह स्पष्ट होना चाहिए कि अवैध माइनिंग को रोकने का दायित्व अभी तक जिन प्रमुख विभागों के पास है उन्हीं का रहेगा।
-यदि इस टीम को किसी क्षेत्र में अवैध खनन होता मिला तो उस क्षेत्र के स्थानीय अफसरों की जवाबदेही तय हो।
-जितने पद इस फोर्स के लिए स्वीकृत किए हैं उतने ही पद अभी होने वाली भर्ती में बढ़ाए जाए।
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