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देहरादून: सीबीआई कोर्ट का फैसला; फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट मामले में आचार्य बालकृष्ण बरी

Mon, 07 Sep 2026 12:08 PM IST
Alka Tyagi माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 07 Sep 2026 12:08 PM IST
सार

आरोप है कि बालकृष्ण ने पासपोर्ट बनवाने के लिए बरेली स्थित पासपोर्ट कार्यालय में खुर्जा के एक संस्कृत महाविद्यालय से जुड़े कथित फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे।

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Dehradun Verdict today in case involving forged documents and passport linked to Acharya Balkrishna
आचार्य बालकृष्ण - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बाबा रामदेव के सहयोगी और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण से जुड़े फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट मामले में आज देहरादून की सीबीआई अदालत ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने बालकृष्ण को बरी कर दिया है। मामला फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के आरोपों से जुड़ा है।

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सीबीआई के अनुसार, बालकृष्ण ने पासपोर्ट बनवाने के लिए बरेली स्थित पासपोर्ट कार्यालय में खुर्जा के एक संस्कृत महाविद्यालय से जुड़े कथित फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे। मामले में उनके खिलाफ आपराधिक धाराओं और पासपोर्ट अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। करीब डेढ़ दशक पुराने इस मामले में आज कोर्ट ने फैसला सुनाया है।
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ये था पूरा मामला

बता दें कि पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ शिकायत की गई थी कि वह नेपाल के नागरिक हैं। उन्होंने भारतीय पासपोर्ट फर्जी दस्तावेज के आधार पर बनाया है। इस पर सीबीआई ने वर्ष 2011 में उनके खिलाफ जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया था। जांच में पाया गया था कि उन्होंने खुर्जा के एक शिक्षण संस्थान से फर्जी डिग्री भी हासिल की है।

जालसाजी का आरोपपत्र दाखिल किया गया था

यह मामला उस वक्त खासा चर्चाओं में रहा। सीबीआई ने इस मामले में वर्ष 2016 में नेपाल सरकार के साथ पत्राचार किया था। आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। इसके साथ ही शिक्षण संस्थान के पूर्व प्रिंसिपल नरेश चंद द्विवेदी के खिलाफ भी धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इस मामले में स्पेशल मजिस्ट्रेट सीबीआई की कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन था।

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