Dehradun: दूसरे राज्य के फर्जी शस्त्र लाइसेंस को उत्तराखंड में वैध कराने का खुलासा, एक शातिर गिरफ्तार
आरोपी ने फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस संख्या-3805 तैयार कराया। इसे पहले हरियाणा के सिरसा से मेरठ में ट्रांसफर दिखाया, यानी रिकॉर्ड पर चढ़वा दिया। फिर 2020 में इसे मेरठ से ट्रांसफर करवाकर देहरादून जिला कार्यालय में दर्ज करा दिया। जब एसटीएफ ने सिरसा प्रशासन से संपर्क किया तो पता चला कि वहां से ऐसा कोई लाइसेंस कभी जारी ही नहीं हुआ था।
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बाहरी राज्यों में बने फर्जी शस्त्र लाइसेंस को उत्तराखंड में वैध कराने का खेल चल रहा है। मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक ऐसे शातिर को गिरफ्तार किया, जिसने हरियाणा के सिरसा से फर्जी लाइसेंस बनवाया। फिर उसे पहले मेरठ और फिर देहरादून ट्रांसफर करा जिलाधिकारी कार्यालय की पंजिका में दर्ज करा दिया। आशंका जताई जा रही है कि जांच में इस तरह अवैध लाइसेंस को वैध कराने के और भी कई मामले सामने आ सकते हैं।
एसटीएफ एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी मनोज मूल रूप से शामली (यूपी) का रहने वाला है। पुलिस टीम ने बीती रात प्रेमनगर के केहरी गांव में दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया। तलाशी में उसके पास से फर्जी लाइसेंस और .30 बोर की एक अवैध सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल व पांच कारतूस बरामद हुए। एसटीएफ एसएसपी ने बताया कि मनोज एक पेशेवर अपराधी है।
उस पर पहले से ही देहरादून के बसंत विहार और प्रेमनगर थाने में जानलेवा हमला, धोखाधड़ी और बलवा जैसे तीन मामले दर्ज हैं। इससे पहले आरोपी ने फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस संख्या-3805 तैयार कराया। इसे पहले हरियाणा के सिरसा से मेरठ में ट्रांसफर दिखाया, यानी रिकॉर्ड पर चढ़वा दिया। फिर 2020 में इसे मेरठ से ट्रांसफर करवाकर देहरादून जिला कार्यालय में दर्ज करा दिया। जब एसटीएफ ने सिरसा प्रशासन से संपर्क किया तो पता चला कि वहां से ऐसा कोई लाइसेंस कभी जारी ही नहीं हुआ था। इस खुलासे ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, क्योंकि गिरोह के तार उत्तर प्रदेश और हरियाणा से जुड़े हैं।
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सरकारी कर्मियों की मिलीभगत की भी होगी जांच
जांच का मुख्य केंद्र अब वह सिंडिकेट है जिसने जिला कार्यालय के रिकॉर्ड में इस फर्जी लाइसेंस की एंट्री कराई। माना जा रहा है कि बिना विभागीय मिलीभगत के कागजी रिकॉर्ड में हेरफेर संभव नहीं है। एसटीएफ अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में सरकारी दफ्तरों के किन कर्मचारियों की मिलीभगत थी। एसटीएफ ने आशंका जताई है कि उत्तराखंड के अन्य जनपदों में भी इस तरह के कई अपराधियों ने फर्जी लाइसेंस के दम पर हथियार जमा कर रखे हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जाएगी। जिलाधिकारी कार्यालयों की शस्त्र पंजिका में दर्ज कराए गए फर्जी लाइसेंस व संलिप्त व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
दूसरे जिलों व राज्यों के लाइसेंस वहां के डीएम की एनओसी के बाद होते हैं दर्ज : डीएम
दूसरे जिलों और राज्यों से ट्रांसफर होने वाले इस तरह के लाइसेंस संबंधित जिलाधिकारी की एनओसी और स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किए जाते हैं। इस मामले में किस स्तर की चूक हुई है, यह देखा जाएगा। फिलहाल पुलिस की ओर से लिखित रिपोर्ट का इंतजार है। पुलिस से जो रिपोर्ट आएगी उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-सविन बंसल, जिलाधिकारी
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