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वर्ष 2025 तक चलने लायक नहीं रह जाएंगी देहरादून की सड़कें
अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 11 Apr 2018 12:55 PM IST
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संयुक्त अध्ययन में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है
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राजधानी देहरादून की सड़कें 2025 तक पैदल चलने लायक भी नहीं रह जाएंगी। जिस तेजी से हर वर्ष वाहनों की संख्या बढ़ रही है, उस लिहाज से अगले सात सालों में यह आंकड़ा 15 लाख के पार हो जाएगा। यातायात पुलिस और यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) के संयुक्त अध्ययन में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।
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अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, शहर में करीब 72 किमी लंबी सड़कों का जाल है। इनमें कुछ सड़कें अत्यंत महत्वपूर्ण और सबसे ज्यादा यातायात का दबाव झेलती हैं। इनमें विशेष तौर पर आईएसबीटी से घंटाघर, हरिद्वार रोड, राजपुर रोड, चकराता रोड शामिल हैं।
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अभी शहर में निकलने वाला व्यक्ति औसतन सात से 20 मिनट तक जाम में फंसता है। लेकिन जिस हिसाब से शहर में वाहनों की संख्या बढ़ रही है, उसके अनुसार वर्ष 2025 में हर वाहन करीब एक से डेढ़ घंटे तक जाम में फंसा रहेगा। स्थिति यह रहेगी की प्रमुख सड़कों पर पैदल चलने वालों तक को जाम में फंसना पड़ेगा। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर अगस्त 2017 में यह अध्ययन शुरू हुआ था, जिसकी रिपोर्ट बीते दिनों ही आई है।
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दून आरटीओ में पंजीकृत वाहन (2018)
दो पहिया- 6,02,939
तिपहिया- 5829 (पैसेंजर)
1845 (मालवाहक)
चौपहिया- 1,99,520 (प्राइवेट)
7,794 (मोटर कैब)
7,354 (मैक्सी कैब)
386 (डंपर)
20199 (ट्रक)
5169 (बस)
1151 (मिनी बस प्राइवेट)
कुल वाहन- 8,87,678
एक साल में 142 मौतें
दून में सड़क दुर्घटनाओं में हर साल बड़ी संख्या में लोग जान गंवाते हैं। पिछले वर्ष दून में रोजाना औसतन एक बड़ी सड़क दुर्घटना हुई। यातायात पुलिस के आंकड़ों के अनुसार पूरे साल 343 बड़े सड़क हादसे हुए। इन हादसों में 142 लोगों की मौत हुई। वहीं, 250 से ज्यादा लोग घायल हुए। दून जैसी शांत जगह जहां पूरे साल अपराध में 19 लोगों ने जान गवांई, वहां सड़क हादसों में मरने वालों का यह आंकड़ा बहुत अधिक है। 2016-17 में प्रदेशभर में एक हजार से अधिक सड़क हादसे हुए।
नई सड़क, फ्लाईओवर जरूरी
रिपोर्ट के अनुसार, दून में अभी सालभर में 60 हजार वाहन बढ़ रहे हैं। इनमें हर साल 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी भी होगी। उसके अलावा हजारों की संख्या में बाहर से आने वाले वाहन अलग हैं। इसके चलते यातायात का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। दूसरी ओर सड़कों के विस्तार पर बिल्कुल भी काम नहीं हो पाया है। ऐसे में वैकल्पिक सड़कों और फ्लाईओवर के निर्माण और मुख्य शहर में यातायात के दबाव को कम किए बिना स्थिति नहीं सुधर सकेगी। बाहर से आने वाले वाहनों को वैकल्पिक सड़कों से निकालने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने पर भी काम करना होगा।
अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर दून में यातायात सुधार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्य शहर में यातायात का दबाव कम करने के लिए रिपोर्ट में जो सुझाव दिए गए हैं, उनके अनुसार काम किया जा रहा है। वैकल्पिक सड़क, फ्लाईओवर या पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- लोकेश्वर सिंह, एसपी ट्रैफिक