हरियाणा और दिल्ली में मोस्ट वांटेड एक लाख के इनामी को देहरादून पुलिस ने किया गिरफ्तार
- हरियाणा और दिल्ली में है मोस्ट वांटेड, 2018 में पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद हो गया था फरार
- इंस्पेक्टर की हत्या समेत हरियाणा और दिल्ली में कई संगीन मुकदमे हैं दर्ज
- एक साल से देहरादून के दून विहार में पहचान छिपाकर रह रहा था आरोपी
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हरियाणा और दिल्ली में मोस्ट वांटेड अनिल लीला पहलवान को दून पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित है। वह एक साल से देहरादून के दून विहार इलाके में पहचान छिपाकर रह रहा था। उसके पास कार के अलावा 32 बोर का पिस्टल बरामद हुआ है। वेटलिफ्टिंग में नेशनल खिलाड़ी रहे अनिल के खिलाफ पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या के अलावा कई संगीन अपराध दर्ज हैं। वह 2018 में पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद फरार हो गया था।
बहादुरगढ़ के नूना माजरा निवासी अनिल पहलवान उर्फ अनिल गंजा हरियाणा और दिल्ली में दहशत का पर्याय रहा है। हरियाणा में अनिल पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। कई दिन के आपरेशन के बाद दून पुलिस उसे गिरफ्तार करने में कामयाब रही।
डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि गढ़वाल रेंज के आईजी अजय रौतेला को मिले इनपुट के आधार पर एसपी देहात प्रमेन्द्र डोभाल की अगुवाई में टीम गठित कर राजपुर इलाके में सादी वर्दी में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। सिलेंडर के अलावा ठेली लगाकर पुलिसकर्मियों ने अनिल के बारे में जानकारी जुटाई। यह भी पता चला कि अनिल की पत्नी देहरादून की है। वह 2014 में तिहाड़ जेल में भी अनिल से मिलने गई थी। उसी आधार पर पत्नी का फोटो आदि जुटाया गया। पत्नी की गुपचुप रेकी कर पुलिस अनिल के ठिकाने तक पहुंच गई।
डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि शातिर अपराधी अनिल पहलवान के फायरिंग करने की आशंका के चलते पहले दून विहार के इलाके को सील करने के साथ बुलेट प्रूफ जाकेट के साथ पुलिसकर्मियों को आवास के दोनों तरफ लगाया गया। बृहस्पतिवार रात दून विहार में मकान नंबर 259 से आरोपी अनिल को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से 32 बोर की पिस्टल के साथ कार भी बरामद हुई। उसे नेहरू कालोनी थाने लाकर पूछताछ की गई। पता चला कि अनिल पहलवान करीब एक साल से दून विहार में कमरा किराए पर लेकर रह रहा था।
लंबी है पहलवान के जुर्म की फेहरिश्त
अनिल पहलवान ने बीच में पढ़ाई छोड़कर रिश्ते के भाई बबलू के साथ नागल में जिम खोला था। बबलू ने अपनी पत्नी के ब्वाय फ्रेंड का कत्ल कर दिया था। बबलू के पीछे-पीछे अनिल भी अपराध की राह पर चल पड़ा। उसने 2011 में पहली बार कार लूट की थी।
2011 में ही अनिल ने आनंद कालेज के एक छात्र का अपहरण कर एक करोड़ की फिरौती वसूली थी। बहादुरगढ़ के एक प्रोफेसर की रिहाई के बदले भी 20 लाख रुपये वसूले थे। अनिल के साथी मनोज मोरखेड़ी के मौसी के लड़के को इंस्पेक्टर रामकिशन दहिया ने एनकाउंटर में मार दिया था। अनिल और मनोज ने 2013 में रोहतक सिटी में इंस्पेक्टर रामकिशन दहिया की हत्या कर एनकाउंटर का बदला लिया था।
पुलिस टीम को पांच हजार का इनाम
सरपंच के अलावा रेलवे कर्मचारी सतीश उर्फ काना की हत्या में भी उसका हाथ रहा है। 2014 में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने आरोपी को पकड़ा था। 2017 में पैरोल पर बाहर आया तो एक डिस्को क्लब के संचालक से 50 लाख की रंगदारी मांगी थी। 2018 केअंत में अनिल पहलवान दोबारा पैरोल पर बाहर आया था और तब से फरार चल रहा था। दुस्साहिसक घटनाओं के चलते दिल्ली पुलिस ने अनिल और इसके गैंग के सदस्यों को मकोका में भी निरुद्ध किया था।
आईजी अजय रौतेला ने एक लाख रुपये के इनामी अनिल पहलवान को गिरफ्तार करने वाली टीम में शामिल रहे एसपी देहात प्रमेन्द्र डोभाल, एसपी सिटी श्वेता चौबे, सीओ विकासनगर भूपेन्द्र सिंह धोनी, आईजी आफिस में तैनात उप निरीक्षक मोहम्मद यासीन, इंस्पेक्टर यशपाल बिष्ट, एसओजी प्रभारी ऐश्वर्य पाल, एसओ नेहरू कालोनी दिलबर नेगी, उप निरीक्षक आशीष रावत, एसओजी के मोहन, देवेन्द्र ममगांई, ललित, अमित, देवेन्द्र, विपिन, अभिषेक आदि को पांच हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।