पिता की शहादत पर बोली बेटियां, न होता पाकिस्तान तो न जाती जान
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शहीद नरेंद्र सिंह बिष्ट की बेटियों को अपने पिता की शहादत पर गर्व है। उनका कहना है कि पिता देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए। शहीद की दोनों बेटियों का कहना है कि यदि पाकिस्तान न होता तो हमारे देश के जवानों को सीमा पर जान नहीं गंवानी पड़ती।
वर्ष 1994 में गढ़वाल राइफल में भर्ती हुए नरेंद्र सिंह बिष्ट एक साल बाद ही रिटायर होने वाले थे। वह अभी 26 जुलाई को ही दस दिन की छुट्टी पूरी कर वापस ड्यूटी पर गए थे। इस दौरान उन्होंने अपने गांव नाखोली, नारायणबगड़ चमोली जाकर पूजा अर्चना भी की थी।
सात अगस्त को वह आतंकियों से मुठभेड़ में घायल हो गए। नौ दिन शहीद जिंदगी और मौत से लड़ता रहा। किसी को इस बात का इल्म तक नहीं था कि आतंकियों से लोहा लेने वाला ये वीर जिंदगी की जंग हार जाएगा। बेटियों का क्या पता था कि उनकी सिर से पिता का हाथ ही उठ जाएगा।
मुखाग्नि के पूर्व काफी देर तक पिता के शव से लिपटी रही
उन्होंने बेटियों की पढ़ाई के लिए ही सेलाकुई स्थित हरिपुर में करीब 12 वर्ष पूर्व घर बनाया था। मुखाग्नि के पूर्व बेटियां अपने पिता शहीद नरेंद्र सिंह बिष्ट के शव के काफी देर लिपटी रही। अमर उजाला से बात करते हुए दोनों बेटियों ने बताया कि उनको अपने पिता की शहादत पर गर्व है।
उन्होंने अपने पिता की मौत का जिम्मेदार पाकिस्तान और आतंकवाद को बताया। बेटियों ने मांग की है कि सरकार को सीमा पर ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए ताकि देश के जवान शहीद न हो। शहीद नरेंद्र के पिता चंद्र सिंह बिष्ट भी फौज में थे। कई वर्ष पूर्व उनका निधन हो गया।