रूढ़ियां तोड़ बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज, मां की चिता को मुखाग्नि देकर किया अंतिम संस्कार
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रूढ़ियों को तोड़ जब मां के अंतिम संस्कार के लिए बेटियां आगे आईं तो हर कोई भावुक हो उठा। उत्तराखंड के नरेंद्रनगर की एक बेटी ने मां की चिता को मुखाग्नि दी है। उनके इस फैसले की हर जगह प्रशंसा की जा रही है। नगर क्षेत्र में निवास कर रही कला देवी की तीन बेटियां हैं।
सोमवार को उनका आकस्मिक निधन हो गया। घाट पर उनकी चिता को अग्नि देने की बात होने लगी, तो अपनी तीन बहनों में सबसे छोटी बेटी आभा पंवार आगे आई। उन्होंने घाट पर जाकर अपनी मां को मुखाग्नि देकर अन्य कर्मकांड करवाते हुए समाज में बेटियों को बोझ समझने वालों को जवाब दिया।
लोगों ने कहा कि आभा ने बेटी होते हुए मां की चिता को मुखाग्नि देकर पुरुषों का वर्चस्व तोड़ने का काम किया है। ज्योतिषाचार्य हेतराम थपलियाल ने कहा कि गरुड़ पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि बेटा न होने की दशा में बेटियां भी अपने माता-पिता का अंतिम संस्कार और अन्य कर्मकांड कर सकती हैं।
इस मौके पर नगर पालिकाध्यक्ष राजेंद्र विक्रम सिंह पंवार, राजेंद्र गुसाईं, जयपाल सिंह नेगी, अजय धमाधा, मनवीर सिंह नेगी, मुकेश भंडारी, बिजेंद्र नेगी और राकेश भंडारी आदि मौजूद थे।