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अब सियासी आपदा प्रबंधन में जुटा सीएम खेमा

Fri, 29 Jul 2016 10:50 AM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 29 Jul 2016 10:50 AM IST
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damage control after uttarakhand cabinet expansion
harish rawat - फोटो : अमरउजाला

उत्तराखंड सीएम हरीश रावत की कैबिनेट का हिस्सा नहीं बनने से आहत कई कांग्रेसी विधायकों में पनपे असंतोष से पैदा सियासी आपदा के प्रबंधन में सीएम के विश्वस्त जुट गए हैं।

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शपथ ग्रहण के तुरंत बाद विधायक हीरा सिंह बिष्ट और फुरकान अहमद के तीखे बोल से असंतोष की आग को हवा मिली है। सीएम दरबार के कुछ करीबी विधायक दोनों से संपर्क में हैं। गढ़वाल को सहेजने में जुटे सीएम हरीश रावत के लिए मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज होने वाले फिलहाल सरकार के गणित को बिगाड़ नहीं सकें, लेकिन विधानसभा चुनाव में जरूर हरीश एंड कंपनी को डेंट करेंगे। गढ़वाल में ब्राह्मण ठाकुर के संतुलन बैठाने में जुटे हरीश रावत को इसके साथ अब दलित अल्पसंख्यक के बीच की नाराजगी शांत करने की सबसे बढ़ी चुनौती है।
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सरकार में रिक्त पड़े दो मंत्रियों के पदों पर विधायक नवप्रभात और राजेंद्र भंडारी की ताजपोशी तय प्लानिंग के तहत बृहस्पतिवार को हो गई। सीएम यह भली भांति जानते थे कि इस फैसला से मंत्री बनने की आस लगाए कुछ दूसरे विधायक नाराज होंगे। विधायक हीरा सिंह बिष्ट ने वरिष्ठता तो विधायक फरकान ने अल्पसंख्यक की दुहाई देकर अपना विरोध जाहिर भी कर दिया है।
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इन दोंनो के अलावा आधा दर्जन और विधायक हैं जो मंत्रिमंडल में आने की आस लगाए बैठे थे, जिनकी नाराजगी आने वाले समय में दिखेगी। स्थिति की संवेदनशीलता भांपते हुए सीएम ने अपने करीबियों को फीडबैक के काम पर लगा दिया है। हालांकि इस नाराजगी को पार पाने में उनकी चुनौती भाजपा-बसपा बढ़ा सकती है। बसपा हरिद्वार में दलित अल्पसंख्यक की अनदेखी से अपना सियासी फायदा तलाशेगी।

वहीं भाजपा सरकार के निर्णय को हरिद्वार में अपने लिए मुफीद लेकर चल रही है। भाजपा का फोकस पहाड़ में ठाकुर ब्राह्मण के कांग्रेसी संतुलन के प्रयास को असंतुलित करने का रहेगा। भंडारी की ताजपोशी के बाद भले ही चमोली के दो अन्य विधायकों जीतराम आर्य और अनसूया प्रसाद मैखूरी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उनकी चुप्पी तूफान आने से पहले का सन्नाटा साबित हो सकती है।


भंडारी को कुर्सी देने से नाराज विधायकों पर सतपाल महाराज की नजर भी रहेगी। नाराज विधायक महाराज के करीबी माने जाते हैं। वहीं इसका असर पौड़ी जनपद की सीटों पर भी रहेगा, जहां से ब्राह्मण चेहरे को मंत्रिमंडल में लाने की पैरवी होती रही है।

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