हमेशा से आतंकी निशाने पर रहे हैं रुड़की हरिद्वार
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बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा ढहाये जाने की 22वीं बरसी पर आतंकी हमले के अंदेशे को लेकर शुक्रवार रात से हरिद्वार पुलिस अलर्ट थी। बावजूद इसके उत्तराखंड पुलिस का खुफिया तंत्र गच्चा खा गया।
रुड़की विस्फोट ने पुलिस के अलर्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जम्मू-कश्मीर में सिलसिलेवार आतंकी हमले हो रहे हैं, कई जवान शहीद हो चुके हैं तो कई मासूम अपनी जान गवां चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी को भी टारगेट करने तक की बात सामने आ चुकी है। विवादित ढांचा ढहाए जाने की बरसी पर हर साल सतर्कता बरतने की बात कही जाती है।
एक तरह से देखे तो कुंभनगरी ही हिंदू संगठनों की रणनीति का केंद्र बिंदु रही है। राम मंदिर को लेकर हिंदू संगठनों ने कई बडे़ फैसले हरिद्वार में बैठकर लिए है।
अलर्ट रहने के निर्देश किए थे जारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक विवादित ढांचा ढाये जाने की बरसी को लेकर वॉकीटॉकी सैट पर आतंकी हमले को लेकर अलर्ट रहने के निर्देश जारी किए गए थे। रुड़की को लेकर पुलिस थोड़ा अलर्ट थी क्योंकि हिंदू संगठन शौर्य दिवस मनाने का ऐलान कर चुके थे। लेकिन हरिद्वार को लेकर निश्चिंत थी।
सूत्रों की मानें तो आतंकी हमले के साथ मिश्रित आबादी, धर्मस्थलों एवं सार्वजनिक स्थलों की चेकिंग को लेकर कोताही न बरतने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक कान से सुनकर दूसरे कान से बात निकाल दी गई।
आतंकियों के निशाने पर हरिद्वार
आतंकवाद में लंबे समय तक सुलगे पंजाब की छाया हरिद्वार पर भी पड़ी है। हरिद्वार में भी आतंकी घटनाएं घटी है तो कभी मौत का सामान मिलता रहा है। शिवजी पैलेस का वजूद अब भले ही खत्म हो गया हो लेकिन शहरवासियों की जुबां पर वर्ष 1991 में साजन फिल्म के शो में हुए विस्फोट की चर्चा यदा कदा आ जाती है।
विस्फोट में पांच मासूम लोग मारे गए थे। इस घटना को पंजाब के आतंकवाद से जोड़कर देखा गया था। वर्ष 1993 में बस स्टैंड से भारी मात्रा में आरडीएक्स मिला था। आरडीएक्स उर्दू के अखबार में लिपटा थे, इस अखबार के तार यूपी के रामपुर से जुडे़ थे। पर पुलिसिया जांच जाने क्यों आगे नहीं बढ़ पाई थी, ये आज तक सवाल है।
रुड़की विस्फोट के बाद जागी हरिद्वार पुलिस
1992 में ही रुड़की हाईवे पर दिल्ली से हरिद्वार आ रही मेरठ डिपो की बस पर अत्याधुनिक असलहें से ताबड़तोड़ फायरिंग कर बीस लाशें बिछा दी गई थी। 1998 में सहारनपुर रुड़की रेल मार्ग पर भारी मात्रा में विस्फोटक मिले थे, वो भी आज तक राज ही है।
हरिद्वार लक्सर रेलमार्ग के बीच एक ट्रेन में भी विस्फोट कर कई लोगों की जान लें ली गई थी। यही नहीं कई बार आतंकितयों को हरिद्वार रुड़की से पकड़ा गया लेकिन कानूनी दांवपेंच अपनाकर सभी को राहत ही मिली।
शनिवार को रुड़की में विस्फोट हुए विस्फोट के बाद हरिद्वार पुलिस की तंद्रा टूटी। आनन फानन में पुलिस सड़क पर भले ही उतर आई पर तिराहों चौराहों पर चेकिंग में चुस्ती कहीं नहीं दिखी। हरकी पैड़ी, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे से लेकर प्रमुख धार्मिक स्थल पर भी चहलकदमी कर पुलिस ने चेकिंग की रस्म अदा की।
जैसे ही रुड़की में हुए विस्फोट की खबर फ्लैश हुई आला अधिकारियों ने हरिद्वार शहर में पुलिस सड़कों पर उतार दी। मिश्रित आबादी में गश्त करने के निर्देश वॉकी टॉकी से फ्लैश हुए। सार्वजनिक स्थलों पर भी पुलिसवालों के बूटों की धमकी गूंजी, पर कही कोई चेकिंग को लेकर सजग नहीं दिखा।
तिराहों चौराहों पर पुलिस वाले जरुर थे, पर हाथ बांधे खडे़ थे। कोई चेकिंग को लेकर चौकस नहीं थी, सब केवल रस्म अदायगी कर रहे थे। शहर के होटल, लॉज एवं धर्मशालाओं की तरफ किसी की निगाह ही नहीं गई।
बेहद असुरक्षित है हरिद्वार
रुड़की में हुए विस्फोट की हकीकत क्या है, ये जांच का विषय है। पर, बड़ी बात ये है कि ऐसे तो कुंभनगरी को दहलाना बेहद ही आसान है। विश्व की आस्था के केंद्र हरकी पैड़ी की सुरक्षा में एक नहीं बल्कि कई हजार कमियां हैं। कुंभनगरी पर आतंकी साया मंडराता रहा है। गाहे बगाहे आतंकी संगठनों के नाम से कुंभनगरी को दहलाने के धमकी भरे पत्र आते रहे हैं।
लेकिन कुंभनगरी की सुरक्षा को लेकर पुलिस महकमा कितना सजग है इसकी हकीकत कुछ यूं है। हरकी पैड़ी के गंगा घाटों पर कई हजार की संख्या में अनजान चेहरे बसे हैं। ये कौन हैं, कहां से आए हैं, ये क्या करते हैं। ये कोई नहीं जानना चाहता। भिखारी बड़ी तादाद में हैं, उनकी क्या पहचान है ये किसी को मालूम नहीं है।
रिक्शा चालक, फड़, रेहडी, ढाबे, टी स्टॉल, कूड़ा बीनने से लेकर कई हजार अनजान चेहरे हरकी पैड़ी के इर्द गिर्द ही बसे हैं। इन्हें भी छोड़ देते हैं, हरकी पैड़ी पुलिस चौकी के इर्द गिर्द ही दुपहिया चौपहिया वाहन पार्क होते हैं। बम निरोधक दस्ते की ड्यूटी केवल शाम को गंगा आरती के वक्त चेकिंग की है, वो भी केवल रस्म निभाते हैं।
ये वो चेहरे एवं पेशे से जुडे़ लोग हैं जो पूरे भौगोलिक परिवेश से भली भांति वाकिफ हैं और कभी भी संकट बन सकते हैं। लेकिन पुलिस महकमा है कि उसे कोई लेना देना नहीं है। हरकी पैड़ी तक पहुंचने वाले किसी भी रास्ते में स्नान पर्व को छोड़कर चौकसी नहीं दिखाई देती।
तब भी भीड़ इतनी होती है कि पुलिसवाले बस खडे़ के खडे़ ही रह जाते हैं। हरिद्वार पुलिस का यही हाल रहा, तब कुंभनगरी को दहलाना कोई मुश्किल काम नहीं।