पिपली घोटाला LIVE: पूर्व प्रधान को तीन साल की जेल
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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले की ग्राम पंचायत पिपली के पूर्व ग्राम प्रधान को अनियमितता का दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष का कारावास मिला है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुकेश चंद्र आर्य ने फैसले में जांच अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया तथा इस मामले में डीएम और एसपी को कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
सहायक अभियोजन अधिकारी विपुल पांडे और सुरेंद्र नेगी ने बताया कि तत्कालीन डीएम के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी (डीपीआरओ, डीडीओ और एई आरईएस) ने पिपली गांव में एकल पेयजल योजना, राजीव गांधी पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र व मिलन केंद्र की जांच की थी।
अनियमितता की पुष्टि होने पर तत्कालीन एबीडीओ ने ग्राम प्रधान विजय लाल के विरुद्ध पटवारी चौकी पिपली में 24 मार्च 2008 को मुकदमा दर्ज कराया।
विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में पेश किए गए। कोर्ट में सिर्फ गबन के मामले में सुनवाई चली।
जांच में वीडीओ को बचाने पर कोर्ट सख्त
बहस के दौरान आरोपी ने कहा कि वह अनपढ़ है। सब कुछ हिसाब-किताब वीडीओ करता था। सारा रिकार्ड उसके पास रहता था। धन आहरण भी दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर से होता था। ऐसे में उसको दोषी ठहराना ठीक नहीं है।
बहस सुनने के बाद सीजेएम ने कहा कि यह हैरानी करने वाला तथ्य है कि विवेचक ने जांच समिति के निष्कर्ष के अलावा अन्य किसी तथ्य का अन्वेषण नहीं किया। तत्कालीन वीडीओ के विरुद्ध कोई शब्द जांच रिपोर्ट में नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि जांच समिति ने अपने सहयोगी कर्मचारियों को बचाने की कोशिश की है।
लोकायुक्त ने की थी जांच
ग्रामीणों की शिकायत पर लोकायुक्त द्वारा ग्राम पंचायत पिपली में विकास योजनाओं की जांच कराई गई थी। जांच के बाद लोकायुक्त ने डीएम को डीपीआरओ, दो वीडीओ, सचिव (पंचायत) और एकाउंटेट से 1,73,000 रुपये वसूली के आदेश दिए थे। इसके बावजूद डीएम ने एक व्यक्ति को जांच कमेटी का सदस्य नियुक्त किया।