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करोड़ों की जमीन के लिए कर दी केयर टेकर की हत्या

Tue, 11 Aug 2015 03:43 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 11 Aug 2015 03:43 PM IST
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murdr for land.

आईजी के ऑफिस से बाहर से गायब केयर टेकर राव शफी मोहम्मद के कत्ल का राज करोड़ों की जमीन के खेल में छिपा है।

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पुलिस फिलहाल इसी दिशा में पड़ताल कर रही है। दरअसल, इस साल जनवरी माह में हुए बैनामे में शफी गवाह था। पुलिस की जांच में इस भूमि के अब तक आठ बैनामे सामने आए हैं, जिससे जुड़े 32 लोग पुलिस के रडार पर हैं। पुलिस एक-एक कर सभी की कुंडली खंगाल रही है, ताकि हत्यारोपी तक पहुंचा जा सके।

पुलिस महानिरीक्षक आफिस में कब्जे की शिकायत दर्ज कराने के बाद बीते सोमवार गायब हुए बुजुर्ग राव शफी मोहम्मद का शव रविवार को विकासनगर में आसन नदी के किनारे मिला था। लाश मिलने के बाद पुलिस की जांच और तेज हो गई है। शफी के बेटे राव आफताब ने हत्या में पांच लोगों को नामजद किया है।
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पुलिस अधीक्षक नगर अजय सिंह ने सोमवार को जमीन से जुड़े रिकार्ड खंगाले। सूत्रों के मुताबिक टर्नर रोड की बेशकीमती डेढ़ बीघा जमीन का मालिक बंटवारे के बाद पाकिस्तान चला गया था।
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इसके बाद यह जमीन शत्रु संपत्ति घोषित हो गई थी। साल 1967 में यह संपत्ति ज्ञान प्रकाश के नाम हो गई। तब से अब तक इस भूमि के आठ बैनामे हो चुके हैं। विवाद केचलते रजिस्ट्री निरस्त होती रही। जमीन का दाखिल खारिज किसी के हक में नहीं हो पाया।

इस कारण केयर टेकर शफी उस पर काबिज रहा। हर बार रजिस्ट्री ज्ञान प्रकाश को मालिक दर्शाकर की गई है। इस भूमि की जनवरी माह में चार लोगों ने एक करोड़ 20 लाख रुपए में बैनामा कराया था, जिसमें केयर टेकर शफी मोहमम्द गवाह था।

दूसरी पार्टी ने इस बैनामे को फर्जी बताते हुए चुनौती दी है। एसपी सिटी की मानें तो तमाम बैनामे ज्ञान प्रकाश द्वारा ही किए गए हैं, लेकिन वह कौन है, अब तक सामने नहीं आया है।

जाहिर है इस जमीन पर कब्जा करने केफेर में कई ज्ञान प्रकाश पैदा कर दिए गए। पुलिस मान रही है कि इसी विवाद में हत्या का कारण छिपा है, लेकिन जमीन में काफी लोगों की दिलचस्पी होने के कारण पुलिस को जांच आगे बढ़ाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

संदेह के दायरे में आए लोगों से कई दौर की पूछताछ हो चुकी है। इनमें कई लोग वो भी हैं, जो उसके साथ आईजी आफिस में शिकायत करने के लिए आए थे।

परिचित पर ही संदेह
पुलिस मान रही है कि शफी मोहम्मद के हत्यारोपी जो भी हैं, वो परिचित हैं। शहर के बीच तो किसी को जबरन उठाना संभव नहीं है। ऐसे में इस बात की संभावना अधिक है कि कोई विश्वास में शफी को अपने साथ ले गया। बाद में हत्या करने के बाद उसके शव को बोरे में भरकर फेंक दिया।

फुटेज का भी लिया जायजा
आईजी के कड़े रुख के चलते पुलिस ने बुजुर्ग शफी के हत्यारों तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों में सोमवार के दिन के फुटेज भी खंगाले गए हैं, ताकि उसकी आखिरी लोकेशन मिल सके।

शफी हत्याकांड की जांच कई पहलुओं पर चल रही है। मुख्य बिंदु विवादित भूमि का ही है, क्योंकि अब तक हुए बैनामों में से एक में केयर टेकर गवाह बना था। संदिग्धों से पूछताछ चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।
- अजय सिंह, पुलिस अधीक्षक नगर

पुलिस में शिकायत पर मिली मौत की सजा
केयर टेकर शफी मोहम्मद की हत्या पुलिस के लिए चुनौती बन गई है। यदि पुलिस इस मामले में आरोपियों तक जल्द नहीं पहुंचती है तो इस तरह की शिकायत करने उसके पास कोई नहीं आएगा।

किसी मामले की शिकायत करने कोई आईजी के पास आए और उसके बाद उसकी हत्या कर दी जाए तो इससे पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगते हैं।

बीते सोमवार को राव शफी मोहम्मद ने आईजी के आफिस में जमीन पर कब्जे की आशंका के साथ खुद की जान को खतरा बताया था। इस मामले में पुलिस तो कुछ नहीं कर पाई, लेकिन हत्यारों ने बुजुर्ग को मौत दे दी। आशंका जताई जा रही है कि पुलिस में शिकायत करने की वजह से ही शफी की हत्या की गई।

विवादित जमीन के केयर टेकर शफी की कत्ल सच तो आरोपियों के पकड़ने जाने पर ही सामने आएगा लेकिन हत्या सुनियोजित साजिश के तहत की गई यह तय है। शफी को भी इस बात का अहसास था, तभी तो तीन अगस्त को आईजी संजय गुंज्याल के आफिस में पहुंचकर अपनी हत्या की आशंका जताई थी।

लिखित में की गई शिकायत में बताया था कि कुछ लोग जमीन पर जबरन कब्जा करने की फिराक में हैं, जिनसे उसे जान का खतरा है। एसआईटी उसकी शिकायत को संज्ञान में लेकर कुछ कर पाती, उससे पहले साजिश कर्ताओं ने शाफी को मार डाला। ऐसा लगता है कि हत्यारों को शफी की पैंतरेबाजी का अंदाजा हो गया था।

यही वजह रही कि आईजी आफिस से निकलने के बाद शफी को आगे की पैरोकारी करने का मौका नहीं दिया। शफी के गायब होने के  बाद से ही परिजन अनहोनी की आशंका जता रहे थे।

जमीन के लिए हुआ अब्बू का कत्ल

मृतक शफी मुहम्मद के बेटे राव आफताब का कहना है कि जमीन के लिए उसके पिता की हत्या की गई है। पहले से उन्हें धमकियां मिल रही थीं। वह झुके नहीं तो कत्ल कर उन्हें रास्ते से हटा दिया गया है। पुलिस को उन्हाेंने पूरी बात बता दी है। वह दोषियों को सजा दिलाकर दम लेंगे।

गर्दन की टूटी हड्डी
बुजुर्ग शफी अहमद को गला दबाकर मारा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी गर्दन की हड्डी टूटने की बात उजागर हुई है। शरीर पर भी चोट के निशान पाए गए हैं। पीएम के बाद सोमवार तीसरे पहर शफी को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

प्रापर्टी में दूसरा कत्ल
क्लेमेंटटाउन क्षेत्र में तीन माह में प्रापर्टी को लेकर यह दूसरा कत्ल हुआ है। शफी मोहम्मद से पहले प्रापर्टी डीलर विपुल त्यागी की हत्या करने के बाद गढ़ मुक्तेश्वर में उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

आरोपी तो पकड़े गए, लेकिन पुलिस अभी तक कत्ल के साक्ष्य नहीं जुटा पाई है। इस कारण अब तक अपहरण में हत्या की धारा नहीं जुड़ सकी है।

कोर्ट में पेश हुए मारपीट के आरोपी
दून बार एसोसिएशन के ऑडिटर के साथ मारपीट के आरोपियों को सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में रिमांड पर पेश किया गया।

बार एसोसिएशन के ऑडिटर आशुतोष गुलाटी ने कहा कि लूट की धाराओं में मामला दर्ज था, लेकिन पुलिस ने लूट की धाराओं को चोरी में बदल दिया है। मामले में अदालत ने पुलिस को फिर से जांच के आदेश दिए हैं।


कड़ी सुरक्षा में पेश किए गए आरोपी
बार एसोसिएशन के ऑडिटर पर हमले के आरोपियों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश किया गया। अधिवक्ताओं की नाराजगी को देखते हुए शाम तक भारी पुलिस फोर्स कोर्ट परिसर में मौजूद रही।

आरोपियों की जमानत पर आज होगी सुनवाई
बार एसोसिएशन के ऑडिटर आशुतोष गुलाटी पर हमले के आरोपियों की जमानत पर अदालत में आज सुनवाई होगी। आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में हैं।

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