रिश्तेदार की गोद भरने को प्रेमी ने खेला घिनौना 'खेल'
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देहरादून के प्रेमनगर से मासूम आकाश का अपहरण कॉल सेंटर में नौकरी करने वाले प्रेमी युगल ने किया था। युवक ने बच्चे को अपने निसंतान रिश्तेदार को 51 हजार रुपए में बेच दिया था।
बच्चे की बरामदगी में सोशल मीडिया की भूमिका अहम रही। दोनों को कोर्ट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
पांच अक्टूबर को बाइक सवार युवक-युवती ने टाफी दिलवाने के बहाने नंदा की चौकी, प्रेमनगर के समीप स्थित झुग्गी बस्ती में रहने वाला लाला राम के बेटे आकाश (उम्र एक साल) का अपहरण कर लिया था।
पुलिस और एसओजी इस मामले की जांच कर रही थी। 22 नवंबर को पुलिस को दोनों की लोकेशन रुड़की क्षेत्र में मिली और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी लड़के के रिश्तेदार का कोई वारिस नहीं
गिरफ्तार युवक-युवती की पहचान अंकित सिंघल पुत्र विमल कुमार निवासी मिर्जापुर जिला सहारनपुर और सोनम पुत्री स्व. मनोज गुप्ता निवासी कुंजा ग्रांट विकासनगर के रूप में हुई।
पूछताछ में दोनों ने बताया कि रुपयों के लालच में उन्होंने आकाश का अपहरण किया था। अंकित की देवबंद निवासी मामी ने फोन कर दोनों को बताया था कि उनकी रुड़की निवासी रिश्तेदार का कोई वारिस नहीं है।
उन्हें एक बच्चा गोद लेना है। इस पर अंकित ने उनसे संपर्क साधा और कहा कि वह किसी आश्रम से उनके लिए बच्चा ले आएगा। उसने बताया कि इसके लिए आश्रम को 50 हजार रुपए फीस देनी पड़ेगी।
रुड़की निवासी रिश्तेदारों ने हामी भरी तो वह अपनी प्रेमिका के साथ बच्चे की तलाश में देहरादून पहुंच गया और आकाश का अपहरण कर लिया।
लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे थे दोनों
एसएसपी अजय रौतेला ने बताया अंकित और सोनम की दिसंबर 2013 में सगाई हो चुकी है और दोनों प्रेमनगर में किराये का कमरा लेकर लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे।
दोनों पहले हर्बटपुर में एक मोबाइल शाप में जाब करते थे। वहीं दोनों में प्यार हुआ। लेकिन अब अंकित और सोनम अलग-अलग काल सेंटर में जॉब कर रहे थे। दोनों का कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है।
सोशल मीडिया रहा अहम
मामले के खुलासे में, सोशल मीडिया और मोबाइल सर्विलांस ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों आरोपितों का स्केच बनाया था। स्केच को फेसबुक और वेट्सअप के जरिये प्रचारित किया गया।
स्केच देखने के बाद एक व्यक्ति ने दोनों को पहचान लिया। इसी व्यक्ति ने पुलिस को दोनों के मोबाइल नंबर भी दिए और सर्विलांस के जरिये दोनों रुड़की से पकड़े गए।
खो चुके थे आकाश से मिलने की उम्मीद
लाला राम और उनकी पत्नी प्रेमवती को विश्वास ही नहीं हो रहा कि आकाश अब उनकी आंखों के सामने है। आकाश के अपहरण के बाद दोनों हताश हो चुके थे। दोनों पुलिस के पास गए जरूर थे, लेकिन उन्हें ज्यादा उम्मीद नहीं थी।
लाला राम मानते थे कि पुलिस सिर्फ अमीरों की सुनती है, लेकिन अब उनके लिए पुलिस गरीबों की हीरो है। एसएसपी कार्यालय में बेटे को गोल में उठाने के बाद दोनों बार-बार पुलिस का शुक्रिया अदा करते रहे।
रामलाल बोले, साहब, मैं तो दिहाड़ी मजदूरी करता हूं। बच्चे के अपहरण के बाद, इसकी मां ने तो खाना पानी ही छोड़ दिया था। हम गरीबों के पास खोने के लिए संपत्ति तो होती नहीं। लाडला है, वो ही चला गया तो मानो सबकुछ लुट गया।
आज बेटा मिला तो ऐसा लगा कि जैसे कोई खजाना मिल गया हो। एसएसपी अजय रौतेला ने कहा, पुलिस के लिए हर मुकदमा एक ‘सब्जेक्ट’ की तरह होता है। और किसी भी अपराध को अमीरी और गरीबी के तराजू में नहीं तोला जाता।
मासूम आकाश के मिलने से पुलिस विभाग ने भी राहत की सांस ली है। उसकी तलाश में जुटी पुलिस टीम में इंस्पेक्टर कैंट वीके जेठा, एसएसआई डीएम बलूनी, एसओजी प्रभारी रवि सैनी, एसआई मुकेश त्यागी, प्रेमनगर चौकी प्रभारी विक्की टम्टा, एसआई संध्या रानी, कांस्टेबल प्रमोद, अनिल कुमार, ललित कुमार, डबल सिंह, सचिन व विपिन शामिल थे।