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सीबीआई में दिया नौकरी का झांसा, ठग लिए चार लाख

Wed, 06 Jul 2016 01:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 06 Jul 2016 01:57 AM IST
सार

  • गृह मंत्रालय के निलंबित कर्मचारी समेत चार नामजद
  • कैंट कोतवाली में दर्ज कराया गया ठगी का मुकदमा

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fraud in the name of job in cbi.
धोखा - फोटो : demo pic

विस्तार

सीबीआई में एएसआई की नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवक से चार लाख रुपये ठग लिए। बाकायदा फर्जी नियुक्ति पत्र भी थमा दिया। इस मामले में गृह मंत्रालय से निलंबित कर्मचारी समेत चार के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराया गया है। पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

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कैंट कोतवाली क्षेत्र के डाकरा निवासी दिलीप कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि सहपाठी रहे जगदीश उनियाल ने जुलाई 2012 में उसे सीबीआई में एएसआई के पद पर भर्ती कराने का झांसा दिया। कहा कि उनका चचेरा भाई संदेश डबराल गृह मंत्रालय में उच्च पद पर है। उनियाल ने इसके लिए छह लाख रुपये की डिमांड की।
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तय हुआ कि तीन लाख पहले और तीन लाख रुपये नियुक्ति के बाद दिया जाएगा। एडवांस के तौर पर ढाई लाख रुपये दिए गए थे, दिसंबर 2012 में डाक से नियुक्ति पत्र भी आ गया, जिसमें 29 जनवरी 2013 की ज्वाइनिंग तिथि अंकित थी। नियुक्ति पत्र आते ही उनियाल ने बाकी रकम के लिए दबाव बना लिया। इसके बाद डेढ़ लाख रुपये देकर बाकी रकम ज्वाइनिंग के बाद देना तय हुआ।

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पैसे ले लिए तो ज्वाइनिंग होने से किया इनकार

fraud in the name of job in cbi.
फर्जीवाड़ा - फोटो : demo pic

अचानक 25 जनवरी को दोस्त उनियाल ने फिलहाल ज्वाइनिंग होने से इनकार कर दिया। इसके बाद काफी समय तक उसे गुमराह किया जाता रहा। अपने स्तर पर जानकारी जुटाई तो पता चला कि संदेश डबराल काफी समय से निलंबित चल रहे हैं। इनके द्वारा उपलब्ध कराया गया नियुक्ति पत्र भी फर्जी है। इंस्पेक्टर हरीश मेहरा ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

सिंगापुर भेजने के नाम पर ठगे ढाई लाख
सिंगापुर भेजने के नाम पर बेरोजगार युवक से ढाई लाख रुपये ठग लिए गए। बिहार के आरा निवासी हरेराम ने डालनवाला कोतवाली पुलिस को बताया कि सुभाष रोड पर आफिस चलाने वाले यशस्वी शर्मा ने अपनी पत्नी और दो अन्य साथियों की मदद से उसे सिंगापुर भेजने का झांसा दिया।

इसके लिए उससे ढाई लाख रुपये ले लिए। पहले तो उसे काफी दिनों तक गुमराह किया जाता रहा। बाद में फर्जी वीजा थमा दिया गया। पोल खुली तो आरोपी आफिस बंद करके फरार हो गए।

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