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वन कर्मियों ने मिलीभगत कर छोड़े कछुआ तस्कर
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Thu, 30 Jun 2016 12:01 PM IST
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- फोटो : demo
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टांडा रेंज में वनकर्मियों ने मिलीभगत कर कथित तौर पर कछुआ तस्करों को छोड़ दिया था। यह बात विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया साबित हुई है। जांच अधिकारी ने मामले में आगे गैर विभागीय उच्चस्तरीय जांच कराने की भी संस्तुति की है।
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11 अप्रैल को तराई केंद्रीय वन प्रभाग के टांडा रेंज में अप्रैल में कछुआ तस्करों को गूलरभोज मोड़ पर पकड़ने और बाद में ‘बड़ी डील’ के बाद छोड़ने की चर्चा उड़ी थी। मामले में पुलिस के इंटेलीजेंस के उच्चाधिकारी ने मामले में तस्करों को छोड़ने संबंधी पत्र प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव को लिखा।
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इसके बाद मामले की जांच एसडीओ बीएस निषाद को सौंपी गई। कई दिनों से चल रही जांच पूरी हो गई है। सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट में वन कर्मियों की भूमिका मिली है। इसमें वन दरोगा, फारेस्ट गार्ड आदि शामिल है। जांच में कहा गया है कि जो घटना की बात कही जा रही है वह पूर्णत: सत्य है।
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हालांकि मामले से जुड़े संबंधित किसी भी पक्ष ने मामले में बयान नहीं दिया है। ऐसे में मामले की दूसरी जांच एजेंसियों से जांच करानी चाहिए। जांच रिपोर्ट प्रभागीय वनाधिकारी सनातन को दी गई है। जांच अधिकारी ने जांच रिपोर्ट भेजने की पुष्टि की है। ऐसे में वन दरोगा कैलास तिवारी, वन रक्षक संदीप सूंठा और अंकित जायसवाल पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
तरणताल की जांच लटकी
तरणताल में तीन जून को एक प्रशिक्षु तैराक की डूबने से मौत हो गई थी। शासन ने मामले की जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी थी। रिपोर्ट को जल्द भेजने को कहा गया था। पर यह जांच बयानों के कारण लटकी हुई है। जांच कर्ता सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह का कहना है कि घटना से जुड़े सभी लोगों के बयान हो चुके हैं। करीब सभी काम पूरे हो गए हैं। केवल युवक का पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर का बयान लिया जाना है। यह बयान लेकर जल्द ही जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।