कंडक्टर से रिश्वत लेने वाले एटीआई पर गाज, सस्पेंड
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ग्रामीण डिपो की बस में 21 बेटिकट सवारी पकड़े जाने के मामले में आरएम की जांच में दोनों एटीआई पर परिचालक से रिश्वत लेकर मार्ग पत्र में टिप्पणी न करने के आरोप सिद्ध हुए। इस पर आरएम ने कार्रवाई करते हुए दोनों एटीआई को निलंबित कर दिया है।
शुक्रवार को मामले में आरएम ने ग्रामीण डिपो के यातायात अधीक्षक जेपी बड़थ्वाल, रुड़की के एटीआई राज सिंह, नरेंद्र कुमार और परिचालक अभिषेक के बयान दर्ज किए। परिचालक ने बताया कि डब्लूटी न लिखने के एवज में दोनों एटीआई ने उससे दस हजार रुपये की मांग की थी। इस पर उसने तीन हजार रुपये तभी और सात हजार रुपये बाद में देने को कहा।
इसीलिए एटीआई ने मार्ग पत्र में टिप्पणी और यात्रियों के दोबारा टिकट नहीं बनवाए। दौराला के टोल प्लाजा पर एआरएम और यातायात अधीक्षक की टीम ने मार्ग पत्र पर टिप्पणी की और टिकट बनवाए। सभी के बयानों के आधार पर आरएम ने दोनों एटीआई को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया।
यह था मामला
दो अगस्त की रात करीब साढ़े दस बजे मुरादनगर में ग्रामीण डिपो की बस संख्या यूके 07 1064 में एटीआई राज सिंह और नरेंद्र ने 21 डब्लूटी पकड़ी थी। बस को दौराला स्थित टोल प्लाजा पर ग्रामीण डिपो के एआरएम प्रतीक जैन और टीएस जेपी बड़थ्वाल की टीम ने रुकवाया था। टीएस ने एटीआई की भूमिका संदिग्ध बताकर केस फाइल किया था। जबकि दोनों एटीआई ने भी रुड़की डिपो के एआरएम जेके शर्मा को मुरादनगर से चलती बस में ही डब्लूटी लिखने और मार्ग पत्र पर टिप्पणी करने की रिपोर्ट दी थी। परिचालक को मामले में तत्काल बर्खास्त कर दिया था। आरोप प्रत्यारोप की जांच मुख्यालय से आरएम देहरादून अनूप रावत को सौंपी गई थी।
परिचालक को बनाया मोहरा, यूनियन करेगी आंदोलन
रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने मामले में एआरएम प्रतीक जैन को बचाने के लिए निगम प्रबंधन और एक यूनियन पर परिचालक को मोहरा बना एटीआई पर कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। यूनियन के महामंत्री अशोक चौधरी का कहना है कि मामले में मेरठ तक की डब्लूटी लिखे मार्ग पत्र पर एआरएम के हस्ताक्षर होने और 10 से ज्यादा डब्लूटी होने के कारण एआरएम पर कार्रवाई होनी थी। उन्हीं को बचाने के लिए निगम के एक बड़े अफसर और एक यूनियन के नेता ने यह सारी पटकथा तैयार की। उन्होंने सवाल उठाया कि 21 डब्लूटी करने वाले परिचालक के बयान दर्ज करने का कोई औचित्य ही नहीं था। जबकि चालक से कोई पूछताछ नहीं की गई और एटीआई का पक्ष भी दरकिनार किया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में यूनियन की क्षेत्रीय पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। जिसमें आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
इनका है कहना
मामले की जांच आरएम दून को सौंपी गई थी। जांच में एटीआई दोषी पाए गए। जिनको निलंबित कर दिया गया है।
-दीपक जैन, महाप्रबंधक संचालन, उत्तराखंड परिवहन निगम