{"_id":"5a761a0e4f1c1ba3268b8272","slug":"91517689358-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसआईटी संस्तुति बेमानी, चार मामलों में नहीं एफआईआर","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
एसआईटी संस्तुति बेमानी, चार मामलों में नहीं एफआईआर
Updated Sun, 04 Feb 2018 02:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
एसआईटी की सिफारिश बेमानी, चार मामलों में नहीं एफआईआर
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
शिक्षा विभाग में अमान्य प्रमाण-पत्रों से नियुक्तियाें के मामलाें में एसआईटी की सिफारिश के बाद भी चार मामलों में शिक्षकाें के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने में शिक्षा निदेशालय खुद बाधा बना हुआ है। दो माह बाद भी पत्रावली संबंधित थानाें को भेजी गईं हैं। विभागीय अधिकारी नियमों का तर्क देकर उनके बचाव में आ गए हैं।
शासन के आदेश पर शिक्षकाें के अमान्य प्रमाण-पत्राें की जांच कर एसआईटी ने 19 शिक्षकाें के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी, लेकिन अभी तक सिर्फ 15 के खिलाफ मुकदमे दर्ज हो पाए हैं, जबकि दो शिक्षा मित्राें के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है।
कुमाऊं रेंज के रामनगर, जसपुर और दिनेशपुर के तीन शिक्षकाें के प्रमाण-पत्र भी जांच में अमान्य पाए गए थे। एसआईटी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश शिक्षा निदेशालय से की थी, लेकिन दो माह बाद भी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। एक ऐसा ही मामला हरिद्वार जिले का भी है। इन चाराें मामलों में विभागीय अधिकारियों ने एसआईटी की सिफारिश के बाद नियमों का तर्क देकर नई जांच में उलझा दिया है। संबंधित थानों में पत्रावली न पहुंचने के कारण चार प्रकरणों में अभी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।
विज्ञापन
--
शिक्षा विभाग दर्ज कराएगा रिपोर्ट
एसआईटी प्रमाण-पत्राें की जांच में आए तथ्यों के आधार अपने स्तर से कार्रवाई की सिफारिश शिक्षा निदेशालय को भेज चुकी है। एफआईआर दर्ज कराने की जिम्मेदारी विभाग की है। चार मामलों में अभियोग दर्ज की रिपोर्ट अभी तक उन्हें मिल पाई है। विभागीय अधिकारी ही इस मामले में बता सकते हैं।
- श्वेता चौबे, प्रभारी एसआईटी
--
नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी करके कार्रवाई करेंगे, जिससे दोषियों के बचने की गुंजाइश न रहे। कमी रह जाने पर दोषियों को राहत मिल जाती है।
- कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
शिक्षा विभाग में अमान्य प्रमाण-पत्रों से नियुक्तियाें के मामलाें में एसआईटी की सिफारिश के बाद भी चार मामलों में शिक्षकाें के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने में शिक्षा निदेशालय खुद बाधा बना हुआ है। दो माह बाद भी पत्रावली संबंधित थानाें को भेजी गईं हैं। विभागीय अधिकारी नियमों का तर्क देकर उनके बचाव में आ गए हैं।
शासन के आदेश पर शिक्षकाें के अमान्य प्रमाण-पत्राें की जांच कर एसआईटी ने 19 शिक्षकाें के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी, लेकिन अभी तक सिर्फ 15 के खिलाफ मुकदमे दर्ज हो पाए हैं, जबकि दो शिक्षा मित्राें के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है।
विज्ञापन
कुमाऊं रेंज के रामनगर, जसपुर और दिनेशपुर के तीन शिक्षकाें के प्रमाण-पत्र भी जांच में अमान्य पाए गए थे। एसआईटी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश शिक्षा निदेशालय से की थी, लेकिन दो माह बाद भी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। एक ऐसा ही मामला हरिद्वार जिले का भी है। इन चाराें मामलों में विभागीय अधिकारियों ने एसआईटी की सिफारिश के बाद नियमों का तर्क देकर नई जांच में उलझा दिया है। संबंधित थानों में पत्रावली न पहुंचने के कारण चार प्रकरणों में अभी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।
विज्ञापन
--
शिक्षा विभाग दर्ज कराएगा रिपोर्ट
एसआईटी प्रमाण-पत्राें की जांच में आए तथ्यों के आधार अपने स्तर से कार्रवाई की सिफारिश शिक्षा निदेशालय को भेज चुकी है। एफआईआर दर्ज कराने की जिम्मेदारी विभाग की है। चार मामलों में अभियोग दर्ज की रिपोर्ट अभी तक उन्हें मिल पाई है। विभागीय अधिकारी ही इस मामले में बता सकते हैं।
- श्वेता चौबे, प्रभारी एसआईटी
--
नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी करके कार्रवाई करेंगे, जिससे दोषियों के बचने की गुंजाइश न रहे। कमी रह जाने पर दोषियों को राहत मिल जाती है।
- कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा