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60 हजार रुपये तक लेते हैं फीस, नहीं है कोई नियम

Thu, 27 Dec 2018 02:12 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 27 Dec 2018 02:12 AM IST
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60 हजार रुपये तक लेते हैं फीस, नहीं है कोई नियम
ब्यूरो/अमर उजाला।
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देहरादून। राज्य में नशा मुक्ति केंद्रों के लिए कोई दिशा-निर्देश न होने के कारण इनके संचालक रोगियों के परिजनों से मनमाना शुल्क वसूलते हैं। तीन से पांच महीने का कोर्स बताकर परिजनों से 40 से 60 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। नियम न होने के कारण प्रशासन भी इन पर कार्रवाई करने से बचता है। अधिकारियों के मुताबिक निर्धारित मानक होने पर ही इनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
दरअसल, कई राज्यों में नशा मुक्ति केंद्रों के संबंध में सख्त मानदंड बने हुए हैं। उन्हीं के आधार पर शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। जबकि, उत्तराखंड की स्थिति उन राज्यों से अलग है। जागृति नशा मुक्ति केंद्र की जांच कर रहे सिटी मजिस्ट्रेट मनुज गोयल ने बताया कि इस केंद्र में बहुत खामियां हैं, लेकिन इसके संचालक को सुधार के निर्देश ही दिए जा सकते हैं। यदि कोई मानदंड या कानून होता तो इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। जहां तक फीस वसूलने की बात है तो ये तरह-तरह का कोर्स बताकर उनके हिसाब से फीस वसूलते हैं। इस मामले में भी यही बात है कि सरकारी नियमों में यदि शुल्क निर्धारण होता तो फीस अधिक वसूलने पर कार्रवाई की जाती।
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क्षमता से पांच गुणा ज्यादा रोगी भर्ती
जागृति नशा मुक्ति केंद्र में क्षमता से लगभग पांच गुणा ज्यादा रोगी भर्ती किए गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि वहां केवल 20-25 लोगों के रहने-खाने की व्यवस्था है। जबकि, केंद्र में करीब 97 रोगियों को भर्ती किया गया है। जब जांच शुरू हुई तो उनके परिजनों को बुलाया गया। जिन लोगों को वहां से ले जाया जा सकता था परिजन उन्हें ले गए। वर्तमान में भी इस केंद्र में 77 रोगी हैं। यह भी क्षमता से लगभग तीन गुणा ज्यादा हैं। धीरे-धीरे उनके परिजनों को भी बुलाया जा रहा है।
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लगते हैं कई आरोप
नशा मुक्ति केंद्रों पर आरोप लगते हैं कि वहां नशा छुड़ाने के नाम पर रोगियों को फर्श पर लिटाया जाता है। उनसे तमाम कार्य कराए जाते हैं। यही नहीं उन्हें महीनों तक एक कमरे में बंद रखा जाता है। कई मामले तो रोगियों को पीटने तक के सामने आ चुके हैं। जिसकी वजह से उनमें मौत तक हो चुकी है।

विवादों से पुराना नाता
>>5 नवंबर 2012: देहरादून में ही एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
>>12 अप्रैल 2013: ऋषिकेश में नशा मुक्ति केंद्र संचालक और उसके साथियों ने एक युवक को इतना पीटा था कि उसकी मौत हो गई। बाद में आरोपी गिरफ्तार किए गए थे।

>>25 नवंबर 2018: सहसपुर क्षेत्र में संचालित एक नशा मुक्ति केंद्र में नाबालिग से दुष्कर्म किया गया था। अगले दिन पुलिस ने केंद्र के कर्मचारी को गिरफ्तार किया था।
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