मेरठ के दारोगा व सिपाही पर सीबीआईडी कसेगी शिकंजा

Dehradun Bureauदेहरादून ब्यूरो Updated Fri, 28 Sep 2018 02:20 AM IST
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मेरठ के दारोगा और सिपाही पर सीबीआईडी कसेगी शिकंजा
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। विद्युत निगम के कर्मचारी शशांक चौधरी के अपहरण के मामले की जांच सीबीसीआईडी ने लगभग पूरी कर ली है। पिछले दिनों सीबीसीआईडी की एक टीम ने मेरठ जाकर भी इस संबंध में साक्ष्य जुटाए थे। माना जा रहा है कि इस मामले में आरोपी मेरठ पुलिस के दारोगा व सिपाही समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। दोनों आरोपी अभी निलंबित चल रहे हैं।
24 दिसंबर 2015 को मेरठ पुलिस का एक दारोगा राममिलन व सिपाही नाजिम कुछ लोगों के साथ विकासनगर स्थित शशांक चौधरी के ऑफिस आए थे। वे शशांक को मेरठ में किसी मामले में वांछित बताकर मेरठ ले गए। वहां अगले दिन उन्हें थाने में न ले जाकर एक होटल में ले गए। आरोप है कि वहां आठ-दस लोग पहले से ही मौजूद थे, जो शशांक पर उसकी पैतृृक संपत्ति की रजिस्ट्री कराने का दबाव बनाने लगे। शशांक ने जब मना किया तो उन्होंने जान से मारने की धमकी दी और अगले दिन रजिस्ट्रार ऑफिस में ले जाकर उससे जबरन रजिस्ट्री कराई। शशांक जैसे ही वापस लौटे तो उन्होंने इसकी शिकायत विकासनगर पुलिस से की, लेकिन उन्हें कई महीनों तक टरकाया जाता रहा। मामले में शशांक ने फरवरी 2016 में एसएसपी से शिकायत की थी। एसएसपी के आदेश पर मामले की जांच हुई और 16 अप्रैल 2016 को दारोगा राममिलन व सिपाही नाजिम व अन्य के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। लगभग एक साल बाद मामले की जांच पुलिस से हटाकर सीबीसीआईडी को दे दी गई। इसमें सीबीसीआईडी ने शशांक की दादी व अन्य परिजनों से बात की और मामले में कई स्तर से जांच की। सीबीसीआईडी की अब तक की जांच में सामने आया है कि पुलिसकर्मियों ने अपने थाने में न तो शशांक की आमद दिखाई और न ही रवानगी। यही नहीं शशांक के खिलाफ मेरठ में कोई मुकदमा भी नहीं है। सीबीसीआईडी ने रजिस्ट्रार कार्यालय में जांच की। बताया जा रहा है कि अब तक की जांच में दारोगा व सिपाही पर लगे आरोप सही साबित हुए हैं। सीबीसीआईडी जल्द ही इन दोनों के साथ ही कई और लोगों को भी गिरफ्तार कर सकती है।

कोट ...
मामले में जांच लगभग पूरी हो चुकी है। जल्द ही इसमें फाइनल कार्रवाई की जाएगी। टीम ने मेरठ में भी कई स्तर से जांच की है, जिनमें शशांक के आरोपों की पुष्टि हो रही है।
- श्वेता चौबे, एसपी, सीबीसीआईडी
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ये है असल मामला
जांच में सामने आया है कि 16 अगस्त 2014 को शशांक की दादी विजया चौधरी ने मेरठ स्थित अपनी संपत्ति का सौदा सौरभ चौधरी, पंकज और सुशील कुमार को किया था। तीनों को आठ माह में विजया चौधरी को 1.19 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। इस आधार पर ही जमीन की रजिस्ट्री कराई जानी थी, लेकिन वे इस अवधि में विजया चौधरी को केवल 64 लाख रुपये ही दे पाए। शेष रकम के लिए उन्होंने 30 अप्रैल 2015 का दिन निर्धारित किया था, लेकिन वह इस तिथि पर भी भुगतान नहीं कर सके और पुलिस के साथ मिलकर यह षड्यंत्र रच डाला।
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